जीने का अंदाज नया है

ग्लोबलाइजेशन, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलाव और सूचना Rांति ने समाज को इस तरह प्रभावित किया है कि कुछ वर्षो में ही जीवनशैली में जबर्दस्त बदलाव आ गया है। जीने का यह अंदाज बिलकुल नया है...
रहन-सहन और खानपान की शैली हो या फिर लोगों के कामकाज और सोचने का तरीका। पहले की तुलना में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है। बदलाव की इस दौड़ में समाज का हर वर्ग पूरे जोशखरोश के साथ शमिल है क्योंकि सभी को यह मालूम है कि आज जो इंसान वक्त के साथ कदम मिलाकर नहीं चलेगा वह पिछड़ जाएगा। हमारी जीवनशैली पर किन बातों ने सबसे अधिक प्रभाव डाला है, आइए डालते हैं उन पर एक नजर। ज्यादा पुरानी बात नहीं है। 90 के दशक तक गिने-चुने लोगों के पास ही मोबाइल होता था और इनकमिंग कॉल्स भी पेड होती थीं। किसी को भी लोग अपना मोबाइल नंबर बताने से हिचकिचाते थे। पर अब मोबाइल समाज के हर तबके के लिए सर्वसुलभ है। आज आप अपने घर पर काम करने वाली घरेलू नौकरानी के मोबाइल पर फोन करके उससे आसानी पूछ सकती हैं कि उसके आने में अभी कितनी देर है। मोबाइल से एस.एम.एस. की नई संस्कृति विकसित हुई है, जो युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। क्योंकि इससे कम खर्च और कम समय में आप दूसरों तक अपना संदेश पहुंचा सकते हैं। इसके जरिये एक-दूसरे को बधाई संदेश और जोक्स भेजने का चलन तो पुराना हो चुका है। अब युवाओं के बीच मोबाइल के जरिये चैटिंग काफी लोकप्रिय हो रहा है। फोटो खींचने, रिकॉòर्डिग करने और गाने सुनने के लिए तो मोबाइल का इस्तेमाल होता ही है। अब थ्री जी मोबाइल उपलब्ध हैं, जिनमें इन फीचर्स के अलावा कई नई सुविधाएं उपलब्ध हैं और यह आपके लिए कंप्यूटर का भी काम करता है।
मोबाइल ने युवाओं के बीच प्रेम की अभिव्यक्ति को भी बहुत आसान बना दिया है। इस संदर्भ में 36 वर्षीय आई.टी. प्रोफेशनल नितिन जोशी कहते हैं, एक दशक पहले अगर किसी लडकी को आई लव यू बोलना होता था तो हम दस बार सोचकर भी हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। लेकिन मोबाइल के कारण आज के युवाओं के लिए यह बहुत आसान हो गया है।
कंप्यूटर
याद कीजिए जब पूरे ऑफिस में सिर्फ एक अदद कंप्यूटर होता था। जिस पर बारी-बारी से सभी अपना हाथ आजमाते थे। कंप्यूटर तब एक हौवा हुआ करता था, हमेशा लोगों के मन में यही डर बना रहता था कि सिस्टम छूते ही कहीं कोई गडबडी न हो जाए। इसमें कोई ताच्चुब नहीं कि विशालकाय और ब्लैक एंड व्हाइट स्Rीन वाले कंप्यूटर्स जल्द ही म्यूजियम की शोभा बढाने लगेंगे। कलर्ड टीएफटी मॉनिटर और आधुनिकतम सॉफ्टवेयर्स से लैस कंप्यूटर अब हमारी जरूरत बन चुके हैं। कवि योगेन्द्र मौçeल कहते हैं, अब वे दिन लद गए जब लेखक और कवि लिखने के लिए कागज और कलम पर आश्रित रहते थे। पिछले आठ वर्षो से मैंने लिखने का हाइटेक तरीका अपना लिया है, जब सारी दुनिया आगे बढ रही है तो हम क्यों पीछे रहें। इससे हम अपनी रचना का बडी आसानी से संपादन कर सकते हैं और उसे सुरक्षित रख सकते हैं। अब मैं लंबी यात्रा के दौरान मैं आराम से लेखन कार्य कर पाता हूं। अब पॉम टॉप कंप्यूटर ने जीवन को और भी आसान बना दिया। आपकी हथेलियों के बीच समा जाने वाले इस छोटे कंप्यूटर से आप जब और जहां चाहें वहां बैठ कर अपने ऑफिस के सारे काम निबटा सकते हैं।
आज कंप्यूटर समाज के हर वर्ग की जरूरत बन चुका है अल्पशिक्षित çस्त्रयां भी अपने कामकाज के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करने लगी हैं। यह बदलाव निpय ही सुखद है।
मोबाइल
ज्यादा पुरानी बात नहीं है। 90 के दशक तक गिने-चुने लोगों के पास ही मोबाइल होता था और इनकमिंग कॉल्स भी पेड होती थीं। किसी को भी लोग अपना मोबाइल नंबर बताने से हिचकिचाते थे। पर अब मोबाइल समाज के हर तबके के लिए सर्वसुलभ है। आज आप अपने घर पर काम करने वाली घरेलू नौकरानी के मोबाइल पर फोन करके उससे आसानी पूछ सकती हैं कि उसके आने में अभी कितनी देर है।
मोबाइल से एस.एम.एस. की नई संस्कृति विकसित हुई है, जो युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। क्योंकि इससे कम खर्च और कम समय में आप दूसरों तक अपना संदेश पहुंचा सकते हैं। इसके जरिये एक-दूसरे को बधाई संदेश और जोक्स भेजने का चलन तो पुराना हो चुका है। अब युवाओं के बीच मोबाइल के जरिये चैटिंग काफी लोकप्रिय हो रहा है। फोटो खींचने, रिकॉòर्डिग करने और गाने सुनने के लिए तो मोबाइल का इस्तेमाल होता ही है। अब थ्री जी मोबाइल उपलब्ध हैं, जिनमें इन फीचर्स के अलावा कई नई सुविधाएं उपलब्ध हैं और यह आपके लिए कंप्यूटर का भी काम करता है।
मोबाइल ने युवाओं के बीच प्रेम की अभिव्यक्ति को भी बहुत आसान बना दिया है। इस संदर्भ में 36 वर्षीय आई.टी. प्रोफेशनल नितिन जोशी कहते हैं, एक दशक पहले अगर किसी लडकी को आई लव यू बोलना होता था तो हम दस बार सोचकर भी हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। लेकिन मोबाइल के कारण आज के युवाओं के लिए यह बहुत आसान हो गया है।
इंटरनेट
इंटरनेट के माघ्यम से आने वाली सूचना Rांति ने समय और दूरी की सारी सीमाओं को तोड दिया है। सबसे बडी बात यह है कि इसने हमारी प्रोफेशनल लाइफ को ज्यादा आसान और व्यवस्थित बना दिया है। अब पहले की तरह बिजली के बिल का भुगतान, रेलवे के रिजर्वेशन और एल.आई.सी.का प्रीमियम जमा करने के लिए आपको घंटों लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। इंटरनेट बैंकिंग से आपका यह काम मिनटों में नाममात्र के खर्च से पूरा हो जाता है। स्कूल कॉलेज में एडमिशन के लिए भी अब आसानी से ऑनलाइन आवेदन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। हाई स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट आसानी से अपना रिजल्ट इंटरनेट पर देख सकते हैं। ऎसा नहीं है इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ युवा पीढी ही करती है। बल्कि आजकल बडी तेजी से बुजुर्ग भी इंटरनेट का इस्तेमाल सीख रहे हैं। दिल्ली की 19 वर्षीया स्वाति रंगराजन कहती हैं, पिछले वर्ष जब मेरी दादी हमारे घर पर आई थीं तब मैंने उन्हें इंटरनेट का इस्तेमाल सिखा दिया था। अब वह चेन्नई जाकर वहां से मेरे साथ अकसर चैटिंग करती हैं। इंटरनेट की सोशल नेटवर्किग साइट्स और ब्लॉगिंग की सुविधा ने दूर बैठे लोगों के बीच संवाद कायम करने और भावनाओं की अभिव्यक्ति की पूरी आजादी दी है।
आज इंटरनेट पर फेसबुक और ऑरकुट जैसे कई सोशल नेटवर्किग वेब साइट्स मौजूद हैं, जिनके माघ्यम से आप अपने स्कूल-कॉलेज के पुराने दोस्तों के साथ दोबारा संवाद स्थापित कर सकते हैं।
ईएमआई की सुविधा
इन दिनों भले ही आर्थिक मंदी का दौर चल रहा हो लेकिन पिछले एक दशक में विदेशी और देशी बैंकों ने जहां एटीएम मशीनों के माघ्यम से बैंकिंग प्रणाली को आम लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया है, वहीं ईएमआई (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉल्मेंट) के माघ्यम से आसान किस्तों पर लोन उपलब्ध कराया है। जिससे लोगों की जीवनशैली में बहुत तेजी से बदलाव आया। पहले लोग रिटायरमेंट के बाद अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर मकान या फ्लैट ले पाते थे, लेकिन अब युवाओं के लिए आरामदायक जीवन की सारी सुख-सुविधाएं जुटाना बेहद आसान हो गया है। इससे निम्न मघ्यम वर्ग तेजी से मघ्यम और मघ्यम वर्ग उच्च मघ्यम वर्ग में प्रवेश कर रहा है। आज अच्छी नौकरी करने वाला 25 वर्ष का युवक भी शादी करने से पहले ही अपने लिए फ्लैट और कार खरीद लेता है। पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। कुल मिलाकर इससे आम लोगों का जीवन स्तर तेजी से ऊपर की ओर उठ रहा है।
टूरिज्म का बदलता स्वरूप
पहले छुट्टियों में सपरिवार घूमने जाना अच्छी-खासी मशक्कत का काम होता था लेकिन अब ट्रैवल एजेंसियां सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटन स्थलों के लिए भी किफायती पैकेज टूर की व्यवस्था करवाती हैं। इससे पर्यटन के प्रति आम लोगों के मन में काफी दिलचस्पी पैदा हुई है। अब वे दिन गए जब छोटे शहरों में रहने वाला आम इंसान विदेश के नाम पर सिर्फ नेपाल जाने की हिम्मत जुटा पाता था। आजकल थाइलैंड, सिंगापुर, मलेशिया जाने वाले मघ्यवर्गीय पर्यटकों की तादाद में तेजी से वृद्धि हो रही है। आज की अति व्यस्त जीवनशैली और मल्टीनेशनल कंपनियों की ऊंची तनख्वाह ने समाज में एक ऎसे तबके को जन्म दिया है, जो छुट्टियों का इस्तेमाल घूमने-फिरने के बजाय आराम और स्वास्थ्य लाभ के लिए करना ज्यादा पसंद करता है। इसी के कारण हेल्थ टूरिज्म और रिसॉर्ट में छुट्टियां बिताना आधुनिक जीवनशैली का अहम हिस्सा बन गया है।
शॉपिंग मॉल्स
आज केवल महानगर ही नहीं, छोटे शहरों में भी तेजी से शॉपिंग मॉल्स खुलते जा रहे हैं। इससे भारतीय जीवनशैली में बहुत जबरदस्त बदलाव आया है। अब लोगों के लिए शॉपिंग केवल आसान ही नहीं, दिलचस्प भी हो गया है। एक ही कॉम्प्लेक्स में खरीदारी, बच्चों के खेलने, फिल्में देखने और खाने-पीने की सुविधाएं होने के कारण अब लोग पूरे परिवार के साथ शॉपिंग का पूरा लुत्फ उठाते हैं। कम समय में और उचित कीमत पर अब लोगों को बिना किसी परेशानी और थकान के अच्छी क्वालिटी की चीजें उपलब्ध होती हैं। इसके साथ ही आज बडे से बडे विदेशी ब्रैंड का शोरूम और ईटिंग आउटलेट इन मॉल्स में आसानी से देखा जा सकता है। इसलिए अब विदेशी ब्रैंड्स के प्रोडक्टस भी आम मघ्यवर्गीय लोगों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। मॉल संस्कृति ने समाज के मघ्यवर्ग को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा फन लविंग बना दिया है। अब मौज-मस्ती, घूमना-फिरना, परिवार और दोस्तों के साथ लंच या डिनर पर अकसर बाहर जाना शहरी मघ्यवर्गीय जीवनशैली का अटूट हिस्सा बन गया है।
जिम
पिछले दस वर्षो में आम लोगों के बीच सेहत और फिटनेस को लेकर काफी जागरूकता आ गई है। पहले सिर्फ महानगरों में गिने-चुने जिम होते थे और उन तक सिर्फ उच्चवर्ग के लोगों की पहुंच होती थी। आज हर छोटे-बडे शहर में हेल्थ क्लब और जिम आसानी से देखे जा सकते हैं। जहां वर्कआउट करने वाले लोगों में çस्त्रयों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। इसी तरह लोगों के खानपान की शैली बहुत तेजी से बदल गई है। आज लोग कम कैलरी वाली स्वास्थ्यवर्धक चीजों, जैसे ऑर्गेनिक फल-सब्जियां, अनाज, लौ फैट चीज, मक्खन, ब्राउन ब्रेड, शुगर फ्री मिठाइयां रोस्टेड नमकीन आदि आज के शहरी मघ्यम वर्ग के भोजन में शामिल हो चुका है।
अपार्टमेंट संस्कृति
बढती आबादी और जगह की कमी ने सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में ही नहीं बल्कि लखनऊ-पटना जैसे मंझोले आकार के शहरों में भी लोगों को अपार्टमेंट में रहने पर मजबूर कर दिया है। यह बहुत बडा बदलाव है क्योंकि जहां हम रहते हैं, उस वातावरण का गहरा प्रभाव हमारे पूरे व्यक्तित्व पर पडता है। मजबूरी में ही सही लेकिन इससे लोगों के बीच पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सिविक सेंस पैदा हुआ। अब लोग यह समझने लगे हैं कि अगर हमारे घर में पार्टी है तो हम अपने शोर से पडोसियों की नींद नहीं खराब कर सकते। अपार्टमेंट संस्कृति ने लोगों की जीवनशैली को काफी हद तक सुव्यवस्थित कर दिया है क्योंकि कम जगह में आराम के साथ रहने की पहली शर्त है-सुव्यवस्थित होना। अब इस बात की कल्पना नहीं की जा सकती कि मकान का बडा कमरा पुरानी चीजों से भर कर रखा जाए और हम उन्हें देख कर अतीत की यादों को ताजा करते रहें। अब जिंदगी में पुराने सामान ही नहीं बल्कि पुराने रिश्तों के लिए भी जगह कम होती जा रही है। आपर्टमेंट संस्कृति संयुक्त परिवारों के टूटने का बडा कारण है। इसने एकल परिवार वाले एक ऎसे वर्ग को जन्म दिया है, जो रोजगार की तलाश में गांव से छोटे शहरों या वहां से महानगरों में आ बसा। समय और स्थान काअभाव इस वर्ग को उसकी अपनी जमीन से दूर खींच ले गया। समाज का यह तबका अपनी जीवनशैली में महानगरीय स्मार्टनेस और वहां की व्यक्तिवादी सोच को तेजी से शामिल कर रहा है।