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औपचारिकता!
लोकपाल विधेयक पर लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का भाषण भाजपाइयों को भले ही सुहाया हो, लेकिन इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने जिस तरह सरकार में बैठे मंत्रियों की तारीफों के पुल बांधे, वह आम आदमी के गले कतई नहीं उतरते। सुषमा ने लोकपाल मुद्दे पर सरकार के पूर्व में दिए गए बयानों को शेरो-शायरी के जरिए रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश जरूर की, लेकिन उनके भाषण से यह समझ में नहीं आया कि वह सरकार के खिलाफ बोल रही हैं या सत्ता पक्ष की भाषा।
अपने भाषण में जिस तरह सुषमा ने कभी प्रणव मुखर्जी, तो कभी पी. चिदम्बरम या पवन बंसल की तारीफ की, उससे ये नहीं लगा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बोल रहा हो। लोकसभा हो या राज्यसभा अथवा विधानसभा, नेता प्रतिपक्ष का कर्तव्य हर मौके पर सरकार को क
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