Last updated - Tue, May 21, 2013
Education
Print Save E-mail Bookmark and Share
Home
News
Career
Management Mantra
Special Coverage
More
"हम ही हम हैं तो क्या हम हैं...?"
किसी भी संस्थान में लीडर्स से काफी अपेक्षाएं होती हैं। ऑर्गनाइजेशन चाहता है कि लीडर्स बेस्ट आउटपुट दें। वहीं टीम मेंबर्स की चाह होती है कि वे लीडर से कुछ न कुछ सीखते रहें। अब यह लीडर पर निर्भर है कि वह सबको कैसे खुश रखता है। लीडर अगर सबकी परवाह करता है, तो सब अच्छा चलता है।

पर जब लीडर ही आत्ममुग्ध हो, तो वो दूसरों को प्रेरित नहीं कर सकता। ऎसा लीडर दूसरों की तारीफ सुनकर नाराज हो जाता है। वह सिर्फ खुद को केंद्र में रखना जानता है। उसे लगता है कि वही सबसे काबिल है। यह स्थिति टीम मेंबर्स के लिए परेशानी ला सकती है। अगर लीडर सिर्फ खुद को पसंद करता है, तो वह हर किसी की गलती निकालने लगता है और इससे टीम के बाकी सदस्य कुंठित होने लगते हैं। यह सब लीडर की खुद की कमी के कारण होता है, पर इसका खामियाजा सबको उठ
 
      comments to the editor
Write here:
Terms & Conditions
Name:

Location:

E-mail:
 
 
 

Readers speak:No comments have been added for this news yet. Be the first to comment!
 
 
 
 
 
 

Madhya Pradesh news | Hindi News | Patrika - Largest Hindi News Portal