प्राकृतिक चिकित्सा से एसिडिटी चित

क्या आप तनावग्रस्त रहते हैं, आपका खान-पान नियमित नहीं है या आप दिन भर काम में व्यस्त रहते हैं, तो आपको एसीडिटी यानी अम्ल पित्त की शिकायत हो सकती है। इससे पेट में दर्द होता है और गैस बनती है। इस रोग में आमाशय का रस बहुत तेजी से निकलता है, इसलिए एसिडिटी के रोगियों को भूख अधिक लगती है।
रोग बढ़ जाने पर सामान्य या कुछ भी भोजन करते ही एसिडिटी हो जाती है। घंटा भर तकलीफ मालूम होने पर छाती के ठीक बीच में जलन प्रारंभ होती है और आमाशय का संचित रस छाती से होकर गले में आ पहुंचता है। इस अवस्था में उल्टी हो जाती है। दीर्घ समय तक यह अवस्था रहने पर दांत खराब हो जाते हैं और आमाशय में घाव हो जाते हैं। इसलिए समय रहते इसका इलाज जरूरी है।
उपचार
एनीमा: आमतौर पर एसिडिटी का रोगी पाचन रस की अम्लता खत्म करने के लिए सोडा