पुरूष प्रधान प्रयोग "...रूका हुआ फैसला"

दादासाहब फालके की "राजा हरिश्चंद्र" (1913) के साथ भारतीय सिनेमा का इतिहास शुरू हुआ, लेकिन सिर्फ पुरूष अदाकारों के साथ। इस फिल्म में एक भी महिला कलाकार नहीं थी, यहां तक कि तारामती का किरदार भी पुरूष एक्टर सालुंके ने निभाया था। फालके की दूसरी फिल्म "भस्मासुर मोहिनी" के साथ महिला कलाकारों ने परदे पर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई। फिल्म में कमला ने फीमेल लीड और उनकी मां दुर्गाबाई ने अहम रोल निभाया था। इसके बाद फिल्मों में महिला कलाकारों का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि 1986 में बासु चटर्जी ने अपने निर्देशन में बनी "एक रूका हुआ फैसला" के साथ एक अनूठा एक्सपेरिमेंट किया। फिल्म में सभी पुरूष किरदार थे। सिडनी लुमेत निर्देशित अमरीकन मोशन पिक्चर "12 एंग्री मैन" की इस रीमेक की कहानी एक कोर्टरूम से शुरू होती है, जहा