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हर दिन,हर पल उत्साह और उमंग से जीएं
नया वष्ाü,नई उमंग और नई सोच के साथ दस्तक दे रहा है। हर इंसान सोचता है कि यदि साल का पहला दिन अच्छा होगा, उमंग उत्साह वाला होगा तो पूरा साल उसी रीति से गुजरेगा। यह सोच उम्दा है क्योंकि जब हम हमारे मन को एक शक्तिशाली संकल्प देते हैं, तो उसी के अनुसार हमारी सभी शक्तियां काम करने लग जाती हंै।

हर दिन मानें नववर्ष
नववर्ष के पहले दिन हर किसी की यह कोशिश रहती है कि कैसे भी आज का दिन अच्छा बीते। कई बार तो झगड़ालू व्यक्ति भी इस दिन खुद को विवाद में डालने से रोकता है। लेकिन दूसरे दिन ही सब कुछ सामान्य हो जाता है। हम केवल नववष्ाü के पहले दिन के लिए क्यों सोचें? हमारी जिंदगी का हर दिन नया होता है। प्रतिदिन सूरज अपनी नयी लालिमाओं, सुनहरी छटाओं के साथ निकलता है। प्रकृति रोज हमें नई-नई सुंदरता प्रदान करती है, ताकि हम खुश रहे, उमंग में रहे और जिंदगी का आनंद लेते रहें।

जब हमें प्रकृति और उसके पांचो तत्व प्रतिदिन हमें नया देने का प्रयास करते हैं तो हम क्यों नहीं इसका आनंद लें। वजह सिर्फ यही है कि हम उसका सम्मान नहीं करते, उसे स्वीकार नहीं करते। हम प्रतिदिन अपने मन को नई सोच, नई उमंग के साथ पूरे दिन का होमवर्क दें। उसी अनुरूप काम करते हुए उसे आगे बढ़ाएं। हम 24 घंटे की दिनचर्या को एक सिस्टम में बांधे और उसे मूर्तरूप देने का प्रयास करें। आप पाएंगे कि धीरे-धीरे आपकी पुरानी आदतों मेें सुधार हो रहा है। यह प्रयास जब कई दिनों तक करते रहेंगे तो आपको महसूस होने लगेगा कि सब कुछ ठीक हो रहा है।

समस्याएं मजबूत बनाती हैं
स्वामी विवेकानंद कहते हैं यदि आपका जीवन सहज चल रहा है। उसमें किसी भी तरह की समस्या नहीं आ रही है तो समझिए कि आप गलत दिशा में चल रहे हैं क्योंकि कामयाबी का रथ समस्याओं को रौंदे बगैर एक कदम भी नहीं चल सकता। सच्चाई यह है कि किसी भी सफलता के पीछे समस्या का होना लाजिमी है। इसलिए कभी समस्याओं से घबराएं नहीं बल्कि मन को स्थिर कर उसका समाधान देखें। दरअसल समस्याएं आपको मजबूत बनाने के लिए आती हैं। जब हमारे सामने परेशानियां ज्यादा होती हंै, तो हमारी सभी कर्मेन्द्रियां और ज्ञानेन्द्रियां अधिक सक्रिय हो जाती हंै, जिससे अनुभव और बुद्धि का विकास होता है।

नकारात्मक सोच को कहें गुडबाय
जिस तरह शरीर के लिए भोजन की जरूरत होती है, वैसे ही आत्मा को भी स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक ऊर्जा जरूरी है। इसलिए हमेशा सकारात्मक बातों का ही मंथन करें। नकारात्मकता मन में बिलकुल नहीं आने दें। यह मान लें कि जो कुछ भी जीवन में घट रहा है, उसके पीछे कोई न कोई अच्छाई छिपी हुई है।

ऎसा मानस बनते ही नकारात्मक सोच कहीं भी नहीं टिकेगी। जीवन में छोटी-छोटी बातें बड़ी भूमिका निभाती हैं। व्यावहारिक जीवन में भी और व्यक्तिगत जीवन में भी। जो लोग इनका ध्यान रखते हैं उनके सफल होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। इन सबके अलावा ईश्वर में दृढ़ विश्वास पत्थर में भी जान फूंक सकता है। मन को यदि यह यकीन हो जाए कि मेरे हर काम में ईश्वरीय मदद मिल रही है तो उसका आत्मविश्वास औरों से कहीं ज्यादा होगा। ऎसे व्यक्ति कभी भी निराश और हताश नहीं होगा। उसमें हमेशा उमंग और उत्साह का स्तर अन्य लोगों से ज्यादा होगा।

ब्रह्मकुमार कोमल
 
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