Patrika Hindi News
Home > Employee Corner
EMPLOYEE CORNER
बिहार में नहीं मिला ढाई दर्जन IPS अफसरों का संपत्ति ब्योरा सरकार को अभी तक राज्य में तैनात करीब ढाई दर्जन आईपीएस अफसरों के संपत्ति का ब्योरा नहीं मिला है...
राज्य सरकार अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षकों के समान मानदेय देगी, लोक शिक्षण संचालनालय ने ये प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है...
अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इसी के साथ अपनी मांगों को लेकर जिले के होमगार्ड जवानों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही...

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

State Employee
जिले के 26 हजार कर्मचारियों को मिलेगी ये सौगात, 21 हजार तक बढ़ सकता है वेतन
इंदौर। वित्तमंत्री जयंत मलैया ने प्रदेश सरकार के बजट में कर्मचारियों और अधिकारियों को एक बड़ी राहत दी है। बजट में की गई सातवें वेतनमान को लागू करने की घोषणा से सभी के चेहरे खिल उठे हैं। नोटबंदी के
लखीमपुर-खीरी। गुरुवार को विकास भवन में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एआरटीओ द्वारा विकास भवन में खड़ी गाडिय़ों को चालान किया जाने लगा। विकास भवन में कार्यरत कर्मचारियों को जब इस बात की जानकारी हुई तब वह आनन-फानन में अपनी गाडिय़ों के पास पहुंचे। एआरटीओ द्वारा जहां इस कार्रवाई को कर्मचारियों के हित में बताया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों में इस कार्रवाई को लेकर खासा आक्रोश देखने को मिला। कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने यह आरोप भी लगाया कि यह कार्रवाई कर्मचारियों को परेशान करने के लिए की गई। विकास भवन में दोपहर तीन बजे एआरटीओ अपनी टीम के साथ विकास भवन पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने खड़ी गाडिय़ों का चालान करना शुरू कर दिया। जब कर्मचारियों को इस कार्रवाई की भनक लगी तो उस समय अफरा-तफरी मच गई। इस पर वरिष्ठ सहायक रामचंद्र वर्मा ने बताया कि हम अपने आफिस का काम करें या अपनी गाडिय़ों की रखवाली करें। आक्रोष जताते हुए उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि सीडीओ की सहमति से यह कार्रवाई की गई है। वहीं यह भी बताया कि बिना सीडीओ की सहमति के एआरटीओ यह कार्रवाई नहीं कर सकता। वहीं एआरटीओ ने 14 गाडिय़ों पर कार्रवाई की जिनमें 11 का चालान कर दिया और तीन गाडिय़ों से 1100 रुपए सम्मन शुल्क वसूल किया। चालान हुई गाडिय़ों ने छह कार व पांच मोटर साइकिल शामिल है। शिकायत पर हुई कार्रवाईमामले पर जानकारी देते हुए एआरटीओ प्रवर्तन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि विकास भवन परिसर में अवैध तरीके से वाहन खड़े करने व गाडिय़ों पर अनाधिकृत रूप से राज्य सरकार या विकास भवन लिखे होने की शिकायत मिल रही थी। जिसे लेकर प्रशासन के संज्ञान में विभाग द्वारा यह कार्रवाई की गई है। विकास भवन आने या जाने वाले किसी भी कर्मचारी या अन्य को परेशान नहीं किया गया है। अगर कोई भी कर्मचारी इससे नाराज हैं तो उन्हें समझना चाहिए कि यह कार्रवाई उनके वाहनों की सुरक्षा के लिए की गई है। चुनाव बहिष्कार की चेतावनीविकास भवन परिसर में एआरटीओ द्वारा वाहनों के किए गए चालान में कई कर्मचारियों की गाडिय़ां भी शामिल हैं जिस पर कर्मचारियों ने खासी नाराजगी जाहिर की। कर्मचारियों का कहना है कि विकास भवन में किसी भी तरह का स्टैंड नहीं है तो कर्मचारी अपनी गाडिय़ां कहां खड़ी करें। कई कर्मचारियों ने इसे दोषपूर्ण कार्रवाई बताते हुए उच्चाधिकारियों से एआरटीओ के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामचंद्र वर्मा ने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो संघ चुनाव बहिष्कार को विवश हेागा। चुनाव बहिष्कार की चेतावनीनवागत सीडीओ ने कार्य भार संभालने के बाद से विकास भवन परिसर में कहीं नियमों की अनदेखी करने वालों को हवालात की सैर करवाई हैं जिसमें विकास भवन के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं। सीडीओ के इस रवैय्ये से कर्मचारियों में पहले से ही नाराजगी थी और अब कर्मचारियों के वाहन के हुए चालान के बाद कर्मचारी इस कार्रवाई के पीछे सीडीओ के संरक्षण होने की बात कह रहे हैं।
धनबाद/रांची। एक जनवरी 2016 से पुनरीक्षित वेतनमान लागू होने की तिथि तक के बकाया वेतनादि का भुगतान दो किश्तों में वित्तीय वर्ष 2017-18 एवं वित्तीय वर्ष 2018-19 में किया जायेगा। यह कार्य राज्य कर्मियों को सप्तम केन्द्रीय पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किये जाने के फलस्वरूप किया जा रहा है।उक्त बातें राज्य के विकास आयुक्त सह योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित खरे ने बताई। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय सप्तम वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने संकल्प संख्या 246 , 25 जुलाई 2016 द्वारा एक जनवरी 2016 से केन्द्रीय कर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किया है।राज्य सरकार अपने सेवीवर्ग को केन्द्रीय सेवाशर्त्तों के साथ केन्द्रीय वेतनमान एवं अन्य भत्ते केन्द्र सरकार के अनुरुप स्वीकृत करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत है। उन्होंने बताया कि फिटमेंट कमिटि के प्रतिवेदन के गहन विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि प्रतिवेदन के अध्याय-3 एवं 4 में की गई अनुशंसाएँ समिति द्वारा अपनी निर्धारित क्षेर्ताधिकार से बाहर जाकर की गयी हैं। इसलिए इसे अस्वीकार किया गया है।वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने बताया किराज्य कर्मियों को सप्तम केन्द्रीय पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किये जाने के फलस्वरुप अनुमानित राशि लगभग 1800 करोड़ रुपये तथा पुनरीक्षित पेंशन स्वीकृत किये जाने के फलस्वरुप अनुमानित राशि लगभग 700 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार राज्य सरकार पर पड़ेगा।
रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को Seventh Pay देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है राज्य शासन के स्तर पर इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। सभी जरूरी औपचारिकताओं को पूर्ण कर जल्द सातवां वेतनमान दिया जाएगा।मुख्यमंत्री ने रविवार को अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने तत्काल मुख्य सचिव को फोन लगाया और फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के निर्देश दिए। प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के संयोजक सुभाष मिश्रा, राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, पीआर यादव, सुरेन्द्र टूटेजा, संजय सिंह सहित कई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

ढाई लाख राज्य कर्मचारी और 60 हजार पेंशनर्स इंतजार में

छत्तीसगढ़ में Seventh Pay Commission की सिफारिशों का लाभ लेने के लिए करीब ढाई लाख राज्य कर्मचारी और 60 हजार पेंशनर्स इंतजार में हैं। ये सिफारिशें प्रदेश में जस की तस मंजूर की जाती हैं तो सरकारी खजाने पर लगभग 4 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाएगा।CG में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की कवायद शुरू, समिति बनीहालांकि राज्य सरकार की माली हालत फिलहाल सातवें वेतन आयोग को लागू करने की स्थिति में नहीं है। सरकार पिछले 1 साल से अपने खर्चों की पूर्ति के लिए सरकार को प्रतिभूतियों की लगातार बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से सरकार की कमर टूटना तय है।छत्तीसगढ़ में सातवें वेतन आयोग के लिए 8 महीने करना होगा इंतजारइन सिफारिशों से सरकार का राजस्व घाटा भी विकराल रूप ले सकता है। सरकार के सामने इस घाटे को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती रही है और आयोग की सिफारिशों के बाद यह घाटा लगभग दोगुना हो जाएगा।
Read More
Central Employee
भोपाल। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के बाद एक और बड़ी खुशी देने जा रही है। ये खुशी मध्यप्रदेश में काम कर रहे करीब 50 हजार केेंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स को भी मिलेगी। खुशी है डीए की। यानी महंगाई भत्ता। खबर है कि केंद्र सरकार जल्द ही केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में दो से चार फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि ये बढ़ोतरी हुई तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 132 फीसदी से अधिक हो जाएगा। आइए हम बताते हैं इस फैसले का एमपी में क्या असर होगा....यह भी पढ़ें: SBI से अब निकाल पाएंगे कम पैसा, देना पड़ेगी ज्यादा फीस, पढ़ें नए RULE...इसलिए आ रही ये खबरकेंद्र सरकार के अभी देशभर में 50 लाख कर्मचारी जबकि 58 लाख पेंशनर्स हैं। महंगाई भत्ता और महंगाई राहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनकी आय पर मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करने के लिए दिया जाता है। श्रमिक यूनियनें हालांकि इस प्रस्तावित वृद्धि से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि इससे मूल्यवृद्धि के वास्तविक असर की भरपाई करने में मदद नहीं मिलेगी।यह भी पढ़ें: OMG! 400 साल से श्रापित है ये गांव, यहां बच्चे पैदा नहीं कर पाती महिलाएंमध्यप्रदेश पर ये असरमध्यप्रदेश मेें 27 दिसंबर 2016 को ही राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों का डीए 125 से बढ़ाकर 132 फीसदी किया गया था। यदि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों का डीए बढ़ाती है तो एमपी में कार्यरत करीब 50 हजार केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स को भी लाभ होगा। वहीं राज्य के 7.5 कर्मचारियों का भी डीए 132 से बढ़कर 136 फीसदी होने की संभावना बढ़ जाएगी।यह भी पढ़ें: हार्ट का LIVE ऑपरेशन: बॉडी में डॉक्टर ऐसे डालते हैं स्टेंट, देखें वीडियो....ये संगठन नाराजकन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंपलॉइज के अध्यक्ष केकेएन कुट्टी ने कहा कि केंद्र सरकार के सहमति वाले फॉर्मूले के तहत महंगाई भत्ता वृद्धि दो प्रतिशत होगी। यह एक जनवरी 2017 से प्रभावी होगी। हालांकि, कुट्टी ने इतनी मामूली वृद्धि पर निराशा जताते हुए कहा कि महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए बेंचमार्क माना जाने वाले औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वास्तविकता से दूर है।
मध्यप्रदेश। राज्य में काम कर रहे 50 हजार केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए 7वां वेतनमान से जुड़ी एक मायूस करने वाली खबर आई है। सूत्रों के मुताबिक इन केंद्रीय कर्मचारियों के एचआरए की दर तो कम नहीं होगी, पर उनका टीए यानी ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी नहीं बढ़ेगा, यानी उन्हें छठे वेतन आयोग के मुताबिक ही टीए मिलता रहेगा। सचिवों की समिति ने यह सिफरिश केंद्र सरकार से की है। गौरतलब है कि छठे वेतनमान की कई अनुशंसाएं अभी पूर्ण रूप से लागू नहीं हो पाई हैं, साथ ही 7वें वेतनमान में भी टीए, डीए, एचआरए को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सचिवों की समिति ने कुछ नए सुझाव दिए हैं। आइए हम बताते हैं इन सुझावों का मध्यप्रदेश पर क्या असर होगा....यूं समझें क्यों बनी समिति?केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले साल 29 जून को वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी थी, लेकिन भत्तों पर विचार के लिए यह समिति बना दी थी। वेतन आयोग ने कुल 196 भत्तों में से 53 को खत्म करने और 37 को मिलाने की भी सिफारिश की थी। समिति को इसपर भी फैसला करना है।मप्र में पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले मप्र के पेंशनर्स को पेंशन में 7 फीसदी महंगाई राहत के आदेश गुरुवार को हो गए। यह राहत एक जनवरी 2016 से दी जाएगी। अभी उनकी महंगाई राहत 125त्न है। 7त्नकी वृद्धि के बाद यह 132त्न हो जाएगी। आदेश के अनुसार 80 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले पेंशनरों को देय अतिरिक्त पेंशन पर भी महंगाई राहत देय होगी।एमपी में एक जुलाई से 7वां वेतनमानगौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने दो दिन पहले प्रस्तुत बजट में राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों व पेंशनर्स को 1 जुलाई 2017 से 7वें वेतनमान के तहत वेतन देने का ऐलान किया है। हालांकि सरकार ने अभी एरियर के भुगतान का रास्ता नहीं निकाला है।समिति ने दिए ये सुझाव- सातवें वेतन आयोग ने एचआरए 30% से घटाकर 24% करने को कहा, पर वित्त सचिव अशोक लवासा की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति इसे 30 फीसदी ही रखने के पक्ष में है। एमपी में सरकारी कर्मचारियों ने भी एचआरए घटाने के प्रस्ताव का विरोध किया था।- शहरों की श्रेणी के आधार पर एचआरए नए बेसिक वेतन का 24% 16% और 8% हो। - डीए, बेसिक के 50% से अधिक होने पर एचआरए 27%, 18%और 9% हो जाएगा। - डीए, बेसिक के 100%से ज्यादा हुआ तो एचआरए 30%, 20% और 10%किया जाए।
जबलपुर। स्टेशन लॉबी व रनिंग रूम में पानी सहित खान-पान की अव्यवस्था को लेकर गुस्साए लोको पायलटों ने स्टेशन पर गुरुवार को प्रदर्शन किया। लोको पायलट प्लेटफॉर्म एक स्थित लॉबी के समक्ष एकत्र हो गए। वहां वेस्ट सेंट्रल एम्पलाइज यूनियन के पदाधिकारी भी आ गए। इसके बाद नारेबाजी करते हुए रेल प्रशासन को रेलों के पहिए रोकने की चेतावनी तक दे दी।खराब पड़ा है फिल्टररेल यूनियन के पदाधिकारी व लोको पायलटों का कहना था कि एक ओर रेलवे बोर्ड रनिंग स्टाफ को थ्री स्टार होटल जैसी सुविधा देने का आदेश जारी कर रहा है, दूसरी ओर अफसर सोने के लिए बेड, खाना व पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे। जबलपुर व सतना लॉबी का आरओ फिल्टर लगने के बाद से खराब पड़ा है, जिसे आज तक सुधारा नहीं गया। एडीआरएम पिछले सप्ताह सतना गए तो वहां रनिंग रूम में लोको पायलटों को खाना व पानी पिलाने के लिए बैरा उपलब्ध न कराने का निर्देश दे आए। प्रदर्शन के दौरान यूनियन के मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला, निरंजन कुमार, सुशांत नील, मनोरंजन कुमार, मुरलीधर ने संबोधित किया। इनका कहना हैइस संबंध में नवीन लिटोरिया, डिवीजनल सेक्रेट्री, डब्ल्यूसीआरईयू का कहना है कि रेलवे बोर्ड ने रनिंग स्टाफ को थ्री स्टार होटल जैसी सुविधा देने का आदेश जारी किया है। यहां डिवीजन के अफसर इसमें पलीता लगाने में जुटे हैं। लोको पायलटों को सामान्य सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Read More
Bank Employee
जानिए क्यों, बैंक उपभोक्ताओं को फिर होगी परेशानी
होशंगाबाद. नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंक उपभोक्ता और बैंक कर्मचारी की परेशानी अभी खत्म नहीं हुईं थीं कि अब रिजर्व बैंक ने अब नया निर्देश जारी कर दिया है। रिजर्व बैंक के नए निर्देश के तहत अब 31
आगरा। नोटबंदी के दौरान अतिरिक्त काम करने के लिए बैंक कर्मचारियों को मुआवजा दिए जाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर हैं।हालांकि निजी क्षेत्र के बैंक इस हड़ताल ने दूर हैं, उपभोक्ताओं के लिए राहत की ये खबर है कि ये हड़ताल सिर्फ एक दिन के लिए है। इस हड़ताल ने आगरा मंडल सहित अलीगढ़ और बरेली मंडल में करीब 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने संजय प्लेस पर मांगों के लिए प्रदर्शन किया। आगरा, मथुरा, अलीगढ़ में बाजार प्रभावितएसबीआई के एसोसिएट बैंकों के मूल बैंक में विलय के प्रस्ताव और अन्य मुद्दों के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल से आगरा मंडल, अलीगढ़ और बरेली मंडल में बाजार प्रभावित हुए हैं। एक दिन की हड़ताल ने करीब 1400 करोड़ रुपये का करोबार प्रभावित किया है। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारी मदन मोहन राय ने बताया कि अकेले आगरा से ही करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। बरेली, अलीगढ़ और मथुरा में करीब 1400 करोड़ रुपये का बाजार प्रभावित हो सकता है।ये सुविधाएं रहीं प्रभावितएक दिन की हड़ताल से चेक निपटान, नकदी जमा और शाखाओं और अन्य इकाइयों से निकासी जैसी सुविधाएं प्रभावित रहीं। लोग बैंकों में पहुंचे तो ताले नजर आए। जिसके चलते वे वापस लौट गए।ये नहीं हुए शामिलहालांकि, यूएफबीयू में शामिल दो बैंक यूनियनों नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और नेशनल ऑर्गनाईजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। इन संगठनों ने इस हड़ताल को राजनीति से प्रभावित कदम बताया है। इन संगठनों का कहना है कि वह इस हड़ताल में शामिल नहीं है इसलिये इसे यूएफबीयू की हड़ताल कहना सरासर गलत है।ये रहे प्रदर्शन में मौजूदसंजय प्लेस स्थित बैंक आॅफ हैदराबाद पर बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। इस मौके पर अनिल वर्मा, संजय सिंह, मदन मोहन राय, मनीष कुमार, प्रशांत सक्सेना आदि बैंक कर्मचारी मौजूद थे।
जबलपुर/कटनी। नोटबंदी के दौरान किए गए अतिरिक्त कार्य की क्षतिपूर्ति, बैंकिंग एवं श्रम सुधार सहित कई मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल ठान दी है। हड़ताल में 22 से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंकों की 250 से अधिक शाखाओं के करीब 5 हजार से अधिक लोग हड़ताल में शामिल हैं। जबलुपर में सिविक सेंटर व कटनी एसबीआई मुख्य ब्रांच के सामने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजन में प्रदर्शन किया जा रहा है। हड़ताल से बैंक उपभोक्ताओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक कर्मचारियों ने सरकार पर मनमानी का आरोप लगया है। उनका कहना है कि उनसे अधिक काम कराया गया, लेकिन उसकी क्षतिपूर्ति नहीं की जा रही।READ ALSO: देश की सबसे महंगी बिजली मप्र में...जानें कितना लुट रहे हैं आपयह रखी मांगेंअधिकांश बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। नारेबाजी के साथ अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन ने कहा, कि नोटबंदी की अवधि में कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त कार्य की क्षतिपूर्ति दी जाए। ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में लागू भुगतान सीमा को हटाने, केंद्रीय कर्मचारियों की तरह बैंक कर्मचारियों को भी 20 लाख रुपए ग्रेच्युटी दिए जाने, बैंकों में तत्काल प्रभाव से अधिकारी, कर्मचारी, डायरेक्टर्स की नियुक्ति किए जाने मांग शामिल हैं।ये मांगें भी शामिलबैंक कर्मचारियों ने सरकार से सभी शासकीय विभागों की तरह बैंकों मे भी अनुकंपा नियुक्ति करने, 5 दिवसीय बैंकिंग चालू करने, खराब ऋणों की वसूली के लिए सख्त नियम बनाने, ऋण न चुकाने वालों पर सख्त कार्रवाई, 2010 के बाद चालू की गई नई पेंशन स्कीम बंद कर पुरानी स्कीम लागू करने की बात कही। इसके साथ ही पारिवारिक पेंशन स्कीम का दूसरे सरकारी विभागों की तरह पुन: निर्धारित किए जाने, ठेका प्रथा बंद करने सहित गार्ड व संदेश वाहक की भर्ती करने मांग रखी। READ ALSO: Broad Gage: घंसौर तक दौड़ेगी ट्रेन, काउंट डाउन शुरूये रहे शामिलजबलपुर में यूनियन के संयोजक श्रीवर्धन नेमा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया जा रहा है तो वहीं कटनी में भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ के बलवंत नेगी, राजेश साहू, अर्पणा किसपोट्टा के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। इस दौरान बृजभूषण त्रिपाठी, वंदना सिंघई, सत्येंद्र आरख, सुंदरलाल, विष्णु परौहा, संतोष दुबे, श्रीकांत बांगर, अजय शर्मा, रामजी सोनी, विवेक यादव, माधवी मिश्रा, अनिल गुप्ता, अनुकेश दुबे, वीरेंद्र सिंह, अभिषेक माथुर, प्रवीण विश्वकर्मा, अजय शर्मा, विनोद बिचपुरिया आदि मौजूद रहे।
रायपुर. शक्रवार दिनांक 24 फरवरी से तीन दिन तक और एक दिन बाद फिर हड़ताल की वजह से चार दिन बैंक बन्द रहेंगे. हालांकि बैंकों की छुट्टी के दौरान आप ऑनलाइन बैंकिंग का सहारा ले सकते है। 24 फरवरी को महाशिवरात्रि की छुट्टी है, जबकि 25 फरवरी को महीने का आखिरी शनिवार होने के कारण बैंकों में छुट्टी रहेगी, 26 फरवरी को रविवार होने के कारण बैंकों में छुट्टी रहेगी, सिर्फ 27 फरवरी यानी सोमवार को बैंक खुले रहेंगे। इसके अगले ही दिन यानी मंगलवार 28 फरवरी को बैंकों की राष्ट्रीय हड़ताल की वजह से बैंक बंद रहेंगे।बता दें कि 28 फरवरी को सभी सरकारी बैंक कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर जा रहे हैं। ऐसे में चार दिन की छुट्टियों को देखते हुए आप अपना कार्य जिनमें कहीं चेक ड्राफ्ट आदि जमा करना हो, पैसे निकालने हों, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना हो तो आज ही निपटा लें।
Read More
PSU
भविष्य में दो शहरों के मध्य यात्रियों व सामान का आवागमन सुपरसोनिक कैप्सूल के माध्यम से होगा। शोधकर्ताओं ने 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले ऐसे कैप्सूलों का निर्माण आरंभ कर दिया है जो आपको सुरक्षित वांछित स्थान पर पहुंचा देगा। यह कैप्सूल हाइपरलूप के माध्यम से चलेंगे जिसमें से 99.9 प्रतिशत हवा निकाल कर निर्वात कर दिया जाएगा। निर्वात में ये कैप्सूल हवाई मार्ग से भी तेज गति से चलकर निर्धारित स्थान पर पहुंच जाएंगे। इससे समय व ईंधन की बचत होगी व यातायात की परेशानियों से भी मुक्ति मिलेगी ।
गाजियाबाद. देशभर में आज सरकारी और प्राइवेट बैंक एक दिन की हड़ताल पर हैं। गाजियाबाद में भी इस हड़ताल का असर देखने को मिला। महानगर में सरकारी बैंकों की 600 से अधिक ब्रांचों पर ताले लटके नजर आए। वहीं दस प्राइवेट बैंकों की 50 से अधिक शाखाओं में से करीब आधी खुली नजर आई, लेकिन कहीं भी कोई काम नहीं किया गया। बैंकों की हड़ताल का शहर के कारोबार पर खासा फर्क पड़ा। बैंक अधिकारियों की मानें तो एक दिन में करीब तीन हजार करोड़ रूपये का कारोबार हड़ताल से प्रभावित हुआ है। कारोबारियों को आज ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए ही अपना काम चलाना पड़ा।दरअसल नौ बैंक यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएएफबीयू) ने नोटबंदी के दौर के मुआवजे समेत कई विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल का आह्वान किया था। इसमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंक शामिल हैं। इसके अलावा आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस और कोटक महिंद्रा जैसे निजी क्षेत्र के बैंकों में भी काम प्रभावित है।ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन गाजियाबाद (एआईबीईए) के जनरल सेकेट्री आरके जैन ने बताया कि मुख्य श्रम आयुक्त के साथ उच्च स्तर पर बातचीत विफल रही। गाजियाबाद में हड़ताल के चलते 40 सरकारी बैंकों की 600 ब्रांच और 10 प्राइवेट बैंकों की पचास से अधिक शाखाओं में काम नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से क्लिय़रिंग का भी करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रूपया अटक गया है। भविष्य में भी अगर आलाकमान रणनीति बनाता है तो उसका समर्थन किया जाएगा।एचडीएफसी बैंक राजनगर के अधिकारी मंयक के मुताबिक उनके यहां पर बैंक खुला हुआ है। कैश और अन्य सेवाओं के ट्रांजेक्शन कस्टमरों के लिए आज भी आम दिन की तरह ही किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर बैंको में सिर्फ चैक रिसीव किए जा रहे हैं।
रीवा। सुबह कार्यालय पहुंचने के बाद साहबों को न केवल खुद से अपनी टेबल साफ करनी पड़ी बल्कि फाइल लेने सहित अन्य कार्य भी खुद से करने पड़े। हम बात अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की कर रहे हैं। मांगों को लेकर पिछले सप्ताह से कार्य बहिष्कार कर रहे कर्मचारियों के साथ सोमवार को साहबों के सेवादार भी साथी कर्मचारियों के साथ हो गए। कार्यालय का ताला खोलने के बाद सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी साथी कर्मचारियों के साथ प्रशासनिक गेट के सामने धरने पर बैठे। गौरतलब है कि गुरुवार को विवि कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने मांग से संबंधित आदेश जारी नहीं होने पर सोमवार से अधिकारियों का हुक्का-पानी बंद करने की घोषणा की थी। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (सेवादारों) को भी कार्य बहिष्कार में शामिल कर लिया गया है। सभी ने काली पट्टी बांधकर कार्य बहिष्कार किया।
Read More


Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???