Patrika Hindi News
Home > Employee Corner
EMPLOYEE CORNER
54 लाख रूपयों का घोटाला, मंत्री ने 9 इंजीनियरों पर की कार्रवाई झारखंड में चेकडैम को अनुपयोगी बनाने तथा 54 लाख 62 हजार 132 रुपये का दुरुपयोग करने पर 9 इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई है...
कोल्हान के प्रभारी आयुक्त के नेतृत्व वाली दो सदस्यीय जांच टीम ने मौके पर ही जमशेदपुर प्रखंड के राजस्व कर्मचारी यदुपति राज को निलंबित कर दिया...

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

State Employee
खुशखबरी : राज्य कर्मचारियों का DA चार फ़ीसदी बढ़ा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों व शिक्षकों को जनवरी से बढ़े 2 फीसदी महंगाई भत्ते का भुगतान अगस्त के वेतन से किया जाएगा। गुरुवार शाम को इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्णय का अफसरों द्वारा मनमुताबिक पालन कराना राज्य कर्मचारियिों को रास नहीं आया। नतीजा गुरुवार को कर्मचारियों ने सीएम के फैसले के विरोध में जमकर विरोध प्रदर्शन किया।बता दें कि शासन स्तर से जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों सहित मंडलीय व जनपदीय अधिकारियों को प्रातः 09 बजे से जनसुनवाई करने का निर्देश जारी हुआ है। इसके तहत तत्कालीन मुख्य सचिव, ने कर्मचारियों को प्रातः 10 बजे अपने कार्यालयों में उपस्थित होकर कार्य करने तथा मध्याह्न अवकाश आधा घंटा करने के निर्देश जारी किया था। वह आदेश अब भी प्रभावी है। ऐसी स्थिति में जनपदीय अधिकारियों द्वारा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को जनसुनवाई जैसे प्रशासनिक कार्य के लिए कार्यालय अवधि से पूर्व उपस्थित होने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश से कर्मचारियेां में जबरदस्त आक्रोश हैं, राज्य कर्मचारी अपने आपको शोषित महसूस कर रहे हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई न होने से संगठन के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर गुरुवार को वाराणसी के शास्त्री घाट पर कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना प्रर्दशन कर विरोध जताया एंव जिलाधिकारी के प्रतिनिधि एसीएम चतुर्थ को ज्ञापन सौंपा।धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष शशिकान्त श्रीवास्तव व संचालन श्यामराज यादव ने किया। प्रांतीय पर्यवेक्षक के रुप मे उपस्थित उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सुभाष तिवारी ने संबोधित करते हुए कहा कि इस धरना प्रदर्शन के बाद भी यदि शासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की तो परिषद इससे भी बड़े आंदोलन के लिये बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी।धरना प्रदर्शन मे सिंचाई, कोषागार, उद्यान, विकास प्राधिकरण वाराणसी, शिक्षा, परिवहन,एनसीसी, बाट-माप, माध्यमिक शिक्षा, विकास भवन, समाज कल्याण, लोक निर्माण, अबकारी, श्रम, सेवायोजन, गन्ना, उद्योग, वन, व्यापार कर, सूचना, पशुपालन, डीआरडीए, बोरिंग टेक्निशियन, पंचायत, ग्राम विकास, आंतरिक लेखा, स्वास्थय विभाग के कर्मचारियों ने भागीदारी की। वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिवाकर द्विवेदी ने आभार जताया। इस मौके पर वीएन चौबे, नागेंद्र कुमार सिंह, विकेंद्र कुमार पांडेय, त्रिभुवन यादव, राहुल कांत यादव, मदन मोहन श्रीवास्तव, राजेंद्र प्रसाद, सुभाष सिंह, राजेश सिंह, सीवी सिंह,रवींद्र श्रीवास्तव, पीआर यादव, मनोज कुमार, आनंद लाल, गीता उपाध्याय, शैल कुमारी, पुष्पा अग्रवाल, सीताराम, मनोज कुमार, ओम प्रकाश दूबे, रामाश्रय पाल, विपिन सिंह, गौरव जायसवाल आदि ने विचार व्यक्त किए।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारी CM Yogi Adityanath के उस आदेश के विरोध में उतर आए हैं जिसमें उन्होंने सरकारी अफसरों को 9 बजे दफ्तर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। दरअसल कर्मचारियों का विरोध इस बात को लेकर है कि मुख्यमंत्री ने अफसरों को 9 बजे से जन सुनवाई करने को कहा गया है लेकिन जनपद स्तरीय अधिकारियों ने इस आदेश की आड़ लेते हुए सभी कर्मचारियों को 9 बजे दफ्तर पहुंचने के निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य कर्मचारियों ने इस आदेश के खिलाफ लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया और तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इस आदेश से राहत दिलाने की। कर्मचारी प्रेरणा स्थल पर हुआ प्रदर्शन लखनऊ में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के बैनर तले कर्मचारियों ने जिलाधिकारी आवास के सामने कर्मचारी प्रेरणा स्थल पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि शासन ने जनपद और मंडल स्तर के अधिकारियों को सुबह 9 बजे दफ्तर में रहकर जन समस्याओं की सुनवाई के निर्देश दिए थे। जनपद और मंडल स्तरीय अफसरों ने इसे सभी जनपद स्तरीय कर्मचारियों पर थोप दिया है जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है। 9 बजे दफ्तर पहुंचने का विरोध कर रहे हैं कर्मचारी कर्मचारियों का कहना है कि राज्य कर्मचारियों के लिए 1975 में जारी शासनादेश के मुताबिक उन्हें 10 बजे दफ्तर में पहुंचकर कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। अब 9 बजे कर्मचारियों को दफ्तर बुलाने से राज्य कर्मचारियों में आक्रोश है। प्रदर्शन के दौरान जनपद अध्यक्ष बी एस डोलिया, उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्रा, दिवाकर राय, एन डी द्विवेदी, ए के मिश्रा, एस के त्रिपाठी, राजेश वर्मा, रामवीर सिंह, मनोज श्रीवास्तव, संजीव गुप्ता, धर्मेंद्र सिंह, मुकेश जोशी, अशोक सिंह, अशोक दुबे, अनुज कुमार शुक्ला आदि मौजूद रहे।
लखनऊ. जीएसटी (Good and Service Tax) लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश के 18 लाख राज्य कर्मियों को झटका लगा है। सरकार ने सेना की कैंटीन पर तो छूट दे रखी है, लेकिन राज्य कर्मचारी कल्याण निगम को जीएसटी के दायरे में रखा गया है। इससे राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से लाभ उठा रह राज्य कर्मचारियों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है।राज्य कर्मचारी कल्याण निगम ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जीएसटी से छूट का अनुरोध किया है। निगम के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक, निगम के डिपो और बाजारों में करोड़ों का सामान भरा पड़ा है, लेकिन उसे महंगा होने के कारण कोई नहीं खरीद रहा है। ऐसे में सामान न बिकने से निगम के 850 कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन के लाले भी पड़ जाएंगे।यह भी पढ़ें : अब भगवान भी जीएसटी के दायरे में, लोग बोले- मुगलों से भी आगे निकली मोदी सरकारआपको बता दें कि प्रदेश सरकार ने अभी तक 18 लाख राज्य कर्मचारियों के लिए कल्याण निगम और उसके डिपो तथा बाजारों से खरीद पर वैट से छूट दे रखी थी, जिससे कर्मचारियों को दैनिक उपयोग में आने वस्तुएं सस्ती मिलती थीं। राज्य कर्मचारियों के अलावा अभी तक इस सुविधा का फायदा रिटायर कर्मचारियों और मृतक आश्रितों के परिजनों को मिलता था। हालांकि, जीएसटी में सरकार ने राज्य कर्मचारियों को कोई छूट नहीं दी है।यह भी पढ़ें - GST Effect : आज से घर का खाना सस्ता, रेस्टोरेंट गए तो कटेगी जेब
Read More
Central Employee
भोपाल। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने देशभर के सभी केंद्रीय कर्मचारियों के संशोधित भत्तों का भुगतान जुलाई माह से ही करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र के इस कदम से मध्यप्रदेश के करीब पचास हजार कर्मचारियों को बड़ा लाभ मिलने वाला है। इससे सरकारी खजाने में 30 हजार 748 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ केंद्र सरकार पर पड़ेगा। सभी भत्ते एक जुलाई 2017 से ही दिए जाएंगे। इसके साथ ही 48 हजार केंद्रीय कर्मचारियों में से 14 लाख सैन्य कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा।7वां वेतनमान के तहत भत्तों पर सिफारिशों के बारे में केंद्र सरकार के फैसले को गुरुवार को भारत के गजट में प्रकाशित कर दिया गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि संबंधित मंत्रालयों को सलाह दी जाती है कि वे उनकी निगरानी वाले भत्तों पर आदेश को तुरंत जारी करें। यह मौजूदा माह के वेतन बिल में ही शामिल कर दिया जाए।मध्यप्रदेश में है 50 हजार कर्मचारीमध्यप्रदेश में भी केंद्र सरकार के 50 हजार से अधिक कर्मचारी निवास करते हैं। जो सीबीडब्ल्यूडी, केंद्रीय पर्यावरण, प्रदूषण विभाग, पोस्ट आफिस, कृषि सांख्यिकी विभाग आदि विभागों के कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न शहरों में पदस्थ हैं। इन्हें सातवें वेतनमान और HRA का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन आदि Y कैटेगरी के शहरों में आते हैं।क्लास 1,2 और 3 के लिए तय हुआ HRAएचआरए क्लास 1,2 और 3 के कर्मचारियों के लिए तय हुआ है। नया एचआरए, पुराने HRA के आधार पर बनाया गया है, जो 30, 29 और 10 फीसदी था। ए क्लास आफिसर जिनका ग्रेड पे 18000 है, उन्हें X कैटगरी के शहर में 1080 रुपए, Y कैटगरी के शहर में 720 रुपए और Z कैटेगरी के शहरों में 360 रुपए का लाभ बढ़कर मिलेगा। इस स्र पर साढ़े सात लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं, जिन्हें 157 फीसदी एचआरए बढ़कर मिलेगा। उल्लखनीय है कि 28 जून को केंद्र सरकार ने एक्स, वाय, जेड कैटेगरी वाले शहरों के लिए न्यूमतम एचआरए का फैसला किया था।किस कैटेगरी में कितना पैसाकेंद्र सरकार के कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ हाउस रेंट एलाउंसेस (HRA) में मिलने वाला है। इसमें सरकार ने देश के शहरों को तीन कैटेगरी में बांटा है। X कैटेगरी के शहरों में नौकरी करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को 2100 की जगह 5400 रुपए HRA दिया जाएगा। Y कैटेगरी वालों को 3,600 और Z कैटेगरी वालों को 1800 रुपए प्रत्येक माह फायदा होगा।
भोपाल। 7वें वेतनमान के अंतर्गत केंद्रीय कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन-भत्ते से देशभर में फैले 48 कर्मचारियों को लाभ होगा, जबकि मध्यप्रदेश में 50 हजार केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ हाउस रेंट एलाउंसेस (HRA) में मिलने जा रहा है। इसमें सरकार ने देश के शहरों को तीन कैटेगरी में बांटा है। X कैटेगरी के शहरों में नौकरी करने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को 2100 की जगह 5400 रुपए HRA दिया जाएगा। Y कैटेगरी वालों को 3,600 और Z कैटेगरी वालों को 1800 रुपए प्रत्येक माह फायदा होगा।मध्यप्रदेश में है 50 हजार कर्मचारीमध्यप्रदेश में भी केंद्र सरकार के 50 हजार से अधिक कर्मचारी निवास करते हैं। जो सीबीडब्ल्यूडी, केंद्रीय पर्यावरण, प्रदूषण विभाग, पोस्ट आफिस, कृषि सांख्यिकी विभाग आदि विभागों के कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न शहरों में पदस्थ हैं। इन्हें सातवें वेतनमान और HRA का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन आदि Y कैटेगरी के शहरों में आते हैं।क्लास 1,2 और 3 के लिए तय हुआ HRAएचआरए क्लास 1,2 और 3 के कर्मचारियों के लिए तय हुआ है। नया एचआरए, पुराने HRA के आधार पर बनाया गया है, जो 30, 29 और 10 फीसदी था। ए क्लास आफिसर जिनका ग्रेड पे 18000 है, उन्हें X कैटगरी के शहर में 1080 रुपए, Y कैटगरी के शहर में 720 रुपए और Z कैटेगरी के शहरों में 360 रुपए का लाभ बढ़कर मिलेगा। इस स्र पर साढ़े सात लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं, जिन्हें 157 फीसदी एचआरए बढ़कर मिलेगा।उल्लखनीय है कि 28 जून को केंद्र सरकार ने एक्स, वाय, जेड कैटेगरी वाले शहरों के लिए न्यूमतम एचआरए का फैसला किया था।यह भी पढ़ेंMP के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, जुलाई की सैलरी से मिलेगा 7वां वेतनमानयह भी पढ़ेंMP के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, जुलाई की सैलरी से मिलेगा 7वां वेतनमानयह भी पढ़ें7वें वेतनमान में दो लाख पार हो जाएगी अफसरों की सैलरी!
भोपाल। सरकार के वित्त विभाग की एक गलती सरकारी कर्मचारियों पर भारी पड़ गई। कैबिनेट ने शासकीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) 7 फीसदी करने की सौगात दी थी। इस फैसले को वापस लेते हुए 4 फीसदी कर दिया गया है। इससे शासकीय कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है।डीए घटाने का फैसला वापस लेने के पीछे वित्त विभाग की बड़ी चूक सामने आई है। वित्त विभाग ने केंद्र सरकार के आदेश को अनदेखा कर 4 फीसदी की जगह सात फीसदी महंगाई भत्ता देने का आदेश दे दिया था। गौरतलब है कि ये मामला कैबिनेट में भी मंजूर हो गया था। इतनी बड़ी गलती को कोई भी नहीं पकड़ पाया था। गुस्सा हो गए शासकीय कर्मचारी7 फीसदी महंगाई भत्ते की सौगात का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों में इस फैसले से नाराजगी है। कर्मचारियों का मानना है कि इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सरकार को महंगाई भत्ते के आदेश जारी होने के बाद उसे घटाने का फैसला करना पड़ा हो।एक सप्ताह पहले ही दी थी सौगातसरकार के वित्त सचिव ने 15 मई को यह आदेश जारी किया था। इसमें शासकीय कर्मचारियों के DA में 7 फीसदी बढ़ौत्तरी 1 जनवरी 2017 से की गई थी। इसका आदेश कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के बाद ही जारी किया गया था।यह है वजहमंत्रालय सूत्रों के मुताबिक डीए घटाने के पीछे वजह यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के वित्त विभाग ने जिन कर्मचारियों को 6वां वेतनमान दिया जा रहा है उन्हें एक जनवरी 2017 से चार फीसदी डीए बढ़ाकर देने के आदेश जारी किए थे। 7 अप्रैल 2017 को इसके आदेश जारी हुए थे।MP सरकार भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की ही तरह समान महंगाई भत्ता देती है। ऐसे में वित्त विभाग की गलती या फिर आदेश को ताक पर रखाना बताया जा रहा है। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने चार से बढ़ाकर 7 फीसदी डीए की वृद्धि कर दी थी।पहली बार हुई सरकार से ऐसी गलतीइतिहास में यह पहला मामला है जब वित्त विभाग से इतनी बड़ी चूक हो गई। सूत्रों ने ब्यूरोक्रेसी पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ब्यूरोक्रेसी किस तरह कार्य कर रही है यह बड़ा उदाहरण है। डीए बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में गया और अनुमोदन के बाद आदेश जारी किए गए, लेकिन किसी अधिकारी ने यह गलती नहीं पकड़ी।इसके लिए दोषियों के खिलाफ विरूद्ध कार्रवाई हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो 7वां वेतनमान निर्धारण संबंधी आदेश में भी बड़ी चूक हो सकती है। कैबिनेट में यह भी हुए फैसलेडीए को 7 से घटनाकर 4 फीसदी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। -मप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश 2017 के जरिये vit भोपाल विवि सीहोर, सेज विवि इंदौर और रैनेसा विवि इंदौर की स्थापना एवं डीसी विश्वविद्यालय इंदौर का परिसमापन का प्रस्ताव मंजूर।-हाईकोर्ट जबलपुर की परीक्षा सेल के लिए पदों का सृजन का प्रस्ताव मंजूर।- मप्र राज्य न्यायिक अकादमी के लिए विभिन्न काडर के पदों का सृजन का प्रस्ताव मंजूर।-नक्सली ऑपरेशन या कानून व्यवस्था के दौरान घायल अथवा मृत पुलिस कर्मियों को मप्र पुलिस कर्मचारी वर्ग असाधारण परिवार पेंशन नियम 1965 का लाभ देना। यह प्रस्ताव भी मंजूर हो गया।-नर्मदा घाटी विकास विभाग के कर्मचारी एएल ठाकुर और अन्य 55 के मामले में हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा पारित निर्णय का अन्य प्रकरणों में अनुपालन का प्रस्ताव मंजूर-बीना संयुक्त सिंचाई और बहुउद्देशीय परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव स्वीकृत।-आंवलिया मध्यम सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव स्वीकृत, इस परियोजना से खंडवा जिले के 31 गांव को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।- हिरवार सूक्ष्म सिंचाई नहर परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव।-पिछली कैबिनेट में तय हुआ था कि हर मंत्री अपने विभाग का रोडमेप प्रस्तुत करेंगे, अभी कृषि विभाग और उद्यानकी विभाग के रोड मैप का प्रजेंटेशन हो रहा है।यह भी पढ़ेंसातवें वेतनमान के बाद केंद्रीय कर्मचारियों को तोहफा, बढ़कर मिलेगा 24 फीसदी HRA!मोदी सरकार दे सकती है केंद्रीय कर्मचारियों को ये तोहफा7th Pay में कितनी बढ़ेगी सैलरी, कैलकुलेट करें अपना एरियर्सआपके लॉकर में रखा सोना असली या नकली, इन TRICKS से खुद पहचानें शुद्धताबड़ी खबरः आज से महंगी हो गई देश के सबसे बड़े BANK की ये सर्विसेज500 रुपए मिनिमम बैलेंस और अनलिमिटेड ATM से ट्रांजेक्शन, देखें नया रूल
Read More
Bank Employee
बंधन बैंक की महिला कर्मचारी के साथ नकाबपोशों ने की लूट
जावरा. औद्योगिक थाना क्षेत्र में हुसैन टेकरी बायपास चौराहा पर शुक्रवार को दिनदहाड़े लूट की वारदात को बाइक सवार दो बदमाशों ने अंजाम दिया। बंधन बैंक की महिला कर्मचारी के साथ लूट की वारदात हुई।औद्योगिक थाना प्रभारी एमपीसिंह परिहार
बरेली। किसानों की कर्जमाफ़ी का वादा कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने वाली बीजेपी ने किसानों की कर्ज माफ़ी की स्कीम तैयार कर ली है। इसको लेकर मंगलवार को मुख्य सचिव ने कमीश्नर और जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग की जिसमे जानकारी दी गयी कि अगस्त से किसानों का कर्ज माफ़ होना शुरू करा दिया जाएगा।Aadhar Card जरूरी कर्ज माफ़ी के लिए किसानों को अपने बैंक खाते से आधार को लिंक कराना होगा। जिन किसानों का आधार नम्बर बैंक खाते से लिंक नहीं होगा उन किसानों का कर्ज बाद में माफ़ किया जाएगा। वीडियो कान्फ्रेसिंग में बताया गया कि किसान के ऋण की डुप्लीकेसी चेक करने हेतु बैंक अकाउन्ट को आधार से लिंक किया जाएगा।ऐसे कराएं लिंक यूपी बैंक इम्प्लाई यूनियन के सहायक महामन्त्री संजीव मल्होत्रा ने बताया कि Aadhar Card नम्बर को बैंक खाते से लिंक कराना बहुत आसान है। इसके लिए खाताधारक को अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी बैंक में जमा करनी होगी जिसमे खाता संख्या, मोबाइल नम्बर के साथ ही अपना साइन भी करना होगा। Aadhar Card को लिंक कराने के लिए इसकी मूल कॉपी भी बैंक लानी होगी।
बरेली। यूनियन बैंक में जींस और टी-शर्ट पर बैन का आदेश उसी दिन वापस हो गया। बुधवार को मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय से सर्कुलर आया कि अब बैंक कर्मी जींस, टी-शर्ट पहन कर बैंक नहीं आएंगे। जिसका बैंक कर्मियों ने विरोध शुरू कर दिया और क्षेत्रीय कार्यालय को अपना सर्कुरल वापस लेना पड़ा।जींस और टी-शर्ट पहने पर लगाया बैनप्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद सरकारी दफ्तरों में जींस और टी-शर्ट पर बैन लगा दिया गया है। जिसके बाद अब बैंकों में भी ये सिलसिला शुरू हो गया है। इंडियन ओवरसीज बैंक में जींस और टी-शर्ट पर बैन लगाया गया है। अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में भी सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को फॉर्मल ड्रेस में आने का आदेश दिया गया।शाम को ही वापस लेना पड़ा आदेश मेरठ से आदेश आने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया और शाम को ही ये आदेश वापस ले लिया गया। यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन के उप महामंत्री संजीव मल्होत्रा ने कहा कि ये तुगलकी फरमान है और यह अच्छा है कि समय पर इसे वापस ले लिया गया नहीं तो ये संघर्ष का विषय बन जाता।
भोपाल। बैंक कर्मचारी अब बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। आज शाम वे धरना प्रदर्शन करेंगे। यही नहीं खराब ऋणों की वसूली के लिए कठोर कदम उठाने के लिए भी उन्होंने विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं। ये भी पढ़ें : बैरसिया में हुआ अंधा मर्डर, भोपाल एसपी आज करेंगे खुलासाये भी पढ़ें : गर्मी में एग्जाम, एक्पर्ट कहते हैं ऐसे रहें फिट एंड फ्रेशये भी पढ़ें : तम्बाकू निषेध दिवस आपको खेलना होगा क्रिकेट, आखिर क्यों, पढ़ें पूरी खबरजानकारी के मुताबिक आज शाम 5.45 बजे पीएनबी जोनल ऑफिस अरेरा हिल्स भोपाल के सामने बैंक कर्मी धरना प्रदर्शन करेंगे। दरअसल बैंक कर्मचारियों में आक्रोश है कि बैंकों का लगातार निजीकरण किया जा रहा है, उनका विलय किया जा रहा है। वहीं उनकी मांग है कि खराब ऋणों की वसूली के लिए कठोर कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसलिए कठोर से कठोर कदम उठाए जाएं।
Read More
PSU
नई दिल्ली। किसी भी मूल्यवान वस्तुओं को सुरक्षित रूप से रखने के लिए बैंक के लॉकर को ही पारंपरिक रूप से सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना जाता है। हालांकि, एक लोकप्रिय बैंक में हाल ही में हुई लॉकर में डकैती ने बैंक लॉकर्स की सुरक्षा के बारे में संदेह उठाया है। पिछले कुछ वर्षों में दर्ज किए गए बैंक लॉकर्स को लूटने के कई विफल प्रयास भी ग्राहक की चिंताएं बढऩे का कारण बन गई हैं। इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में कहा कि बैंक लॉकर्स से क़ीमती सामान चुराए गए हैं या किसी प्राकृतिक आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हो जाने पर ग्राहकों को क्षतिपूर्ति के लिए बैंक ज़िम्मेदार नहीं हैं।हाल ही में जब आरबीआई और उसके सहयोगी 19 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) से लॉकर चोरी के मामले पे सूचना मांगने के लिए आरटीआई दायर किया गया, तब ही लॉकर में से चोरी के लिए कोई कानूनी दायित्व नहीं है की सच्चाई बाहर आई। दरअसल इसका मतलब यह है कि आपको किसी भी मुआवजे की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए जब आपके बैंक लॉकर से कीमती सामानों की चोरी हो। यहां तक कि निजी क्षेत्र के बैंक भी लॉकरों पर समान नियमों का पालन कर रहे हैं। इसलिए, जब आप अपने आवश्यक दस्तावेज या कीमती आभूषण आदि को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर किराए पर लेते हैं, तब भी, किसी बहुत ही बुरी स्थिति में भी, अनियंत्रित परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाली चोरी या नुकसान के लिए कोई मदद नहीं मिलेगी।बैंक लॉकर्स के अलावा दूसरे विकल्पहालांकि इस तथ्य को इन्कार नहीं किया जा सकता है कि बैंक लॉकर्स काफी हद तक सुरक्षित होते हैं लेकिन किसी भी नुकसान के लॉकर मालिक को कोई भरपाई नहीं मिलेगी। अच्छी खबर यह है कि पारंपरिक बैंक लॉकर्स के अलावा अन्य विकल्प हैं, जिनका आप लाभ उठा सकते हैं। हालांकि इनमें से कुछ बैंक लॉकर के जैसे लागत प्रभावी नहीं हो सकते हैं, लेकिन थोड़ी अधिक किराए का भुगतान करके, आप अपने कीमती सामानों के लिए उच्च सुरक्षा का आश्वासन प्राप्त कर सकते हैं।कीमती सामानों के लिए बीमा करवाएंयदि आपके पास सुरक्षित रखने के लिए कीमती जवाहरात और गहने हैं तो ऐसे मूल्यवान वस्तुओं के लिए बीमा का विकल्प चुनना हमेशा एक अच्छा विचार है। कई बीमा कंपनियां आज, एक गृह बीमा उत्पाद प्रदान करती हैं जहां बहुमूल्य वस्तुओं के लिए आभूषणों की कवरेज में बीमा राशि पर अधिक से अधिक 25त्न तक बीमा करवाया जा सकता है या स्टैंडअलोन(एकल) आभूषण बीमा उत्पाद भी प्रदान करती हैं। अपने मूल्यवान वस्तुओं के आधार पर और अपने महंगे गहनों की सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा बीमा पॉलिसी चुन सकते हैं। यह न केवल सुनिश्चित करता है कि आपकी परिसंपत्तियों को कवर किया गया है बल्कि आपके मन को शांति भी देता है कि किसी भी स्थिति में आपको एक वित्तीय नुकसान उठाना नहीं पड़ेगा।निजी सुरक्षा वाल्ट का विकल्पआप निजी वाल्टों का विकल्प चुन सकते हैं जो कि पूरे भारत में अत्यधिक सुरक्षित लॉकर सेवा प्रदान करते हैं। कई निजी कंपनियां अपने निजी वाल्टों के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा प्रदान करने की बात रखते हैं। अधिकांश प्राइवेट वाल्टस हर बजट प्रकार के लिए अलग-अलग लॉकर के आकार की पेशकश करते हैं जिनमें से प्रत्येक को मजबूत सुरक्षा के लिए ठोस तरीके से निर्माण किया जाता है। यहां तक कि रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर भी कुछ निजी वाल्टस सुल य होते हैं जिससे वे पसंदीदा विकल्प बन जाते हैं। हालांकि यह निजी कंपनियां भी नुकसानों के लिए जि मेदार नहीं होते हैं, उनकी उच्च प्रोफ़ाइल सुरक्षा प्रणाली की वजह से, इनमें तिजोरी को तोडऩे की संभावना कम से कम होती हैं। फिर भी, किसी एक को चुनने से पहले एक जांच कर लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कन्नौज. सुगंध व इत्र कारोबार में पहचान बनाने वाले कन्नौज अब दुर्गन्ध में भी नाम रोशन करेगा। यह बदबू कश्मीर में उपद्रव कर रहे पत्थरबाजों को सबक सिखाने का काम करेगी। सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र कुछ वर्ष पहले ऐसी दुर्गन्ध बनाने में सफल रहा था जो भीड़ या उपद्रवियों को काबू में ला सके। रक्षा मंत्रालय समेत डीआरडीओ में इस पर शोध की तैयारी की जा चुकी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इस दुर्गन्ध का प्रयोग कैप्सूल या किसी अन्य रूप मे भीड़ को काबू करने के लिए ट्रायल भी किया जाएगा। खास तरह के इस दुर्गन्ध के फैलने पर भीषण दुर्गंध उठने से उपद्रवी कुछ पल भी उस स्थान पर नहीं ठहर सकेंगे।सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला की देखरेख में यहां के वैज्ञानिकों द्वारा निर्माण की गई बदबू को करीब डेढ़ साल पहले केंद्रीय सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज सिंह को दिखाया जा चुका है। वह एफ एफ डीसी में प्रदर्शनी के दौरान आए थे। इसकी विशेषताओं को लेकर राज्यमंत्री ने रक्षा मंत्रालय को पत्र भी लिखा था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की विशेष अनुसंधान शाखा में इसके ट्रायल के निर्देश दिए गए। टीम ने प्रधान निदेशक से फोन पर संपर्क भी साधा। अब यह टीम इसका ट्रायल कर भारतीय सेना में बतौर हथियार इसको शामिल करने का प्रयास भी करेगी। प्रधान निदेशक ने बताया कि डिफेंस लैब ग्वालियर के रक्षा वैज्ञानिकों ने ट्रायल को लेकर संपर्क किया है। वह कब तक यहां आएंगे, यह जानकारी नहीं है। इसकी मारक क्षमता बेहतर है। यह दुर्गन्ध भीड़ को काबू करने और अन्य कई मकसद खूबियों से भरा है। अभी पूरी तरह से सहमति नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों के हरी झंडी दिखाने पर बात आगे बढ़ेगी। आखिर इस बदबू का कैसे होगा इस्तेमालदुर्गंध फैलाने वाले रसायन को एक जिस तरह से चाहे उसका उपयोग किया जा सकता है फिर चाहे हम कैप्सूल के रूप में लें या उसको पानी में घोलाए या हम किसी और रूप में लें ये सभी संभावनाएं हो सकती है।इस गंध (बदबू) का स्वास्थ्य पर असर नहींरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और रक्षा मंत्रालय की आवश्यक मंजूरी और स्वीकृति के बाद इसे सेना को सौंपा जाएगा। यह गंध बहुत ही असहनीय है लेकिन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर इसका कोई असर नहीं होता है। एफ एफ डीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने कहा कि दुर्गंध फैलाने वाले रसायन को एक जिस तरह से चाहे उसका उपयोग किया जा सकता है फिर चाहे हम कैप्सूल के रूप में लें या उसको पानी में घोलाए या हम किसी और रूप में लें ये सभी संभावनाएं हो सकती है लेकिन यह सब एक्सपर्ट रिपोर्ट आने के बाद ही कही जाएं जब तक किसी मानव पर इसका प्रयोग नहीं करें तब तक यह कह पाना कि कितना काम करे जिससे यह अभी केवल यह रिसर्च करके देखा गया कि यह सम्भव है कि नहीं तो यह देखा गया कि यह कहने की स्टेज में है कि यह काम संभव है ।वीडियो यहां देखें-
चंद्रमोहन द्विवेदी/रायपुर. राजनांदगांव के शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय में वैज्ञानिक डॉ. बीएस असाटी बीते चार साल से लालभाजी की किस्मों पर काम कर रहे हैं। डॉ. असाटी ने अब तक लालभाजी की 40 किस्मों (जर्नप्लाज्म) को देश के अनेक हिस्सों से इक_ा किया है। इस दौरान उन्होंने लालभाजी की दो किस्में अमर-7 व अमर-11 में अन्य के मुकाबले अधिक गुणवत्ता पाई है। इन किस्मों में अन्य की अपेक्षा अधिक आयरन, कैल्सियम, रेशा, शुष्क पदार्थ की मात्रा है। प्रदेश में अनेक इलाकों में लोगों के कुपोषण का शिकार होने की खबरें आती रहती हैं। एेसे में लालभाजी से बनाए गए टैबलेट, कैप्सूल व पाउडर से कुपोषण की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।लालभाजी को अब टैबलेट और कैप्सूल के रूप में भी लिया जा सकता है। राजनांदगांव में कार्यरत हॉर्टिकल्चर साइंटिस्ट कुछ इसी फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। वे अपने प्रयोग में फॉर्मूला कॉम्बीनेशन के अंतिम चरण में हैं और इस साल के अंत तक मल्टी नूट्रीएन्ट (बहु पोषक तत्च) से भरपूर लालभाजी के टैबलेट व कैप्सूल बाजार में लाने की कोशिश में हैं। डॉ. असाटी के मुताबिक लालभाजी से बनने वाले यह मल्टी नूट्रीअन्ट टैबलेट, कैप्सूल व पाउडर गर्भवती स्त्रियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।&लालभाजी में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी कुछ किस्मों की गुणवत्ता अन्य से बेहतर है। इन्हें दवाइयों के रूप में उपयोग करने पर रिसर्च किया जा रहा है। कोशिश है कि साल के अंत तक यह लोगों के उपभोग के लिए तैयार हो जाए।डॉ. बीएस असाटीउद्यानिकी वैज्ञानिक
Read More


Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???