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ADG और DG लेवल पर हुए बड़े तबादले, देखिए किसकी कहां हुई पोस्टिंग... सरकार ने पुलिस महकमे में कई महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण ओहदे दिए हैं...
जवानों ने पुराने जेल परिसर में प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की...

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State Employee
जिले के 26 हजार कर्मचारियों को मिलेगी ये सौगात, 21 हजार तक बढ़ सकता है वेतन
इंदौर। वित्तमंत्री जयंत मलैया ने प्रदेश सरकार के बजट में कर्मचारियों और अधिकारियों को एक बड़ी राहत दी है। बजट में की गई सातवें वेतनमान को लागू करने की घोषणा से सभी के चेहरे खिल उठे हैं। नोटबंदी के
लखीमपुर-खीरी। गुरुवार को विकास भवन में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एआरटीओ द्वारा विकास भवन में खड़ी गाडिय़ों को चालान किया जाने लगा। विकास भवन में कार्यरत कर्मचारियों को जब इस बात की जानकारी हुई तब वह आनन-फानन में अपनी गाडिय़ों के पास पहुंचे। एआरटीओ द्वारा जहां इस कार्रवाई को कर्मचारियों के हित में बताया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों में इस कार्रवाई को लेकर खासा आक्रोश देखने को मिला। कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने यह आरोप भी लगाया कि यह कार्रवाई कर्मचारियों को परेशान करने के लिए की गई। विकास भवन में दोपहर तीन बजे एआरटीओ अपनी टीम के साथ विकास भवन पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने खड़ी गाडिय़ों का चालान करना शुरू कर दिया। जब कर्मचारियों को इस कार्रवाई की भनक लगी तो उस समय अफरा-तफरी मच गई। इस पर वरिष्ठ सहायक रामचंद्र वर्मा ने बताया कि हम अपने आफिस का काम करें या अपनी गाडिय़ों की रखवाली करें। आक्रोष जताते हुए उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि सीडीओ की सहमति से यह कार्रवाई की गई है। वहीं यह भी बताया कि बिना सीडीओ की सहमति के एआरटीओ यह कार्रवाई नहीं कर सकता। वहीं एआरटीओ ने 14 गाडिय़ों पर कार्रवाई की जिनमें 11 का चालान कर दिया और तीन गाडिय़ों से 1100 रुपए सम्मन शुल्क वसूल किया। चालान हुई गाडिय़ों ने छह कार व पांच मोटर साइकिल शामिल है। शिकायत पर हुई कार्रवाईमामले पर जानकारी देते हुए एआरटीओ प्रवर्तन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि विकास भवन परिसर में अवैध तरीके से वाहन खड़े करने व गाडिय़ों पर अनाधिकृत रूप से राज्य सरकार या विकास भवन लिखे होने की शिकायत मिल रही थी। जिसे लेकर प्रशासन के संज्ञान में विभाग द्वारा यह कार्रवाई की गई है। विकास भवन आने या जाने वाले किसी भी कर्मचारी या अन्य को परेशान नहीं किया गया है। अगर कोई भी कर्मचारी इससे नाराज हैं तो उन्हें समझना चाहिए कि यह कार्रवाई उनके वाहनों की सुरक्षा के लिए की गई है। चुनाव बहिष्कार की चेतावनीविकास भवन परिसर में एआरटीओ द्वारा वाहनों के किए गए चालान में कई कर्मचारियों की गाडिय़ां भी शामिल हैं जिस पर कर्मचारियों ने खासी नाराजगी जाहिर की। कर्मचारियों का कहना है कि विकास भवन में किसी भी तरह का स्टैंड नहीं है तो कर्मचारी अपनी गाडिय़ां कहां खड़ी करें। कई कर्मचारियों ने इसे दोषपूर्ण कार्रवाई बताते हुए उच्चाधिकारियों से एआरटीओ के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामचंद्र वर्मा ने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो संघ चुनाव बहिष्कार को विवश हेागा। चुनाव बहिष्कार की चेतावनीनवागत सीडीओ ने कार्य भार संभालने के बाद से विकास भवन परिसर में कहीं नियमों की अनदेखी करने वालों को हवालात की सैर करवाई हैं जिसमें विकास भवन के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं। सीडीओ के इस रवैय्ये से कर्मचारियों में पहले से ही नाराजगी थी और अब कर्मचारियों के वाहन के हुए चालान के बाद कर्मचारी इस कार्रवाई के पीछे सीडीओ के संरक्षण होने की बात कह रहे हैं।
धनबाद/रांची। एक जनवरी 2016 से पुनरीक्षित वेतनमान लागू होने की तिथि तक के बकाया वेतनादि का भुगतान दो किश्तों में वित्तीय वर्ष 2017-18 एवं वित्तीय वर्ष 2018-19 में किया जायेगा। यह कार्य राज्य कर्मियों को सप्तम केन्द्रीय पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किये जाने के फलस्वरूप किया जा रहा है।उक्त बातें राज्य के विकास आयुक्त सह योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित खरे ने बताई। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय सप्तम वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने संकल्प संख्या 246 , 25 जुलाई 2016 द्वारा एक जनवरी 2016 से केन्द्रीय कर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किया है।राज्य सरकार अपने सेवीवर्ग को केन्द्रीय सेवाशर्त्तों के साथ केन्द्रीय वेतनमान एवं अन्य भत्ते केन्द्र सरकार के अनुरुप स्वीकृत करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत है। उन्होंने बताया कि फिटमेंट कमिटि के प्रतिवेदन के गहन विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि प्रतिवेदन के अध्याय-3 एवं 4 में की गई अनुशंसाएँ समिति द्वारा अपनी निर्धारित क्षेर्ताधिकार से बाहर जाकर की गयी हैं। इसलिए इसे अस्वीकार किया गया है।वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने बताया किराज्य कर्मियों को सप्तम केन्द्रीय पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत किये जाने के फलस्वरुप अनुमानित राशि लगभग 1800 करोड़ रुपये तथा पुनरीक्षित पेंशन स्वीकृत किये जाने के फलस्वरुप अनुमानित राशि लगभग 700 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार राज्य सरकार पर पड़ेगा।
रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को Seventh Pay देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है राज्य शासन के स्तर पर इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। सभी जरूरी औपचारिकताओं को पूर्ण कर जल्द सातवां वेतनमान दिया जाएगा।मुख्यमंत्री ने रविवार को अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने तत्काल मुख्य सचिव को फोन लगाया और फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के निर्देश दिए। प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के संयोजक सुभाष मिश्रा, राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, पीआर यादव, सुरेन्द्र टूटेजा, संजय सिंह सहित कई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

ढाई लाख राज्य कर्मचारी और 60 हजार पेंशनर्स इंतजार में

छत्तीसगढ़ में Seventh Pay Commission की सिफारिशों का लाभ लेने के लिए करीब ढाई लाख राज्य कर्मचारी और 60 हजार पेंशनर्स इंतजार में हैं। ये सिफारिशें प्रदेश में जस की तस मंजूर की जाती हैं तो सरकारी खजाने पर लगभग 4 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाएगा।CG में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की कवायद शुरू, समिति बनीहालांकि राज्य सरकार की माली हालत फिलहाल सातवें वेतन आयोग को लागू करने की स्थिति में नहीं है। सरकार पिछले 1 साल से अपने खर्चों की पूर्ति के लिए सरकार को प्रतिभूतियों की लगातार बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से सरकार की कमर टूटना तय है।छत्तीसगढ़ में सातवें वेतन आयोग के लिए 8 महीने करना होगा इंतजारइन सिफारिशों से सरकार का राजस्व घाटा भी विकराल रूप ले सकता है। सरकार के सामने इस घाटे को नियंत्रित करने की बड़ी चुनौती रही है और आयोग की सिफारिशों के बाद यह घाटा लगभग दोगुना हो जाएगा।
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Central Employee
आगरा। अक्षय तृतीया 28 अप्रेल को है और 27 अप्रेल को केंद्र के लाखों कर्मचारियों व पेंशनर्स को सातवें वेतन आयोग के रूप में मोदी सरकार से बड़ा तोहफा मिलने की उम्मीद है। यानी धनलक्ष्मी के त्योहार से ठीक एक दिन पहले देश के लाखों लोगों के घरों में माता के आशीर्वाद के रूप में धनवर्षा होगी। ऐसे में इस खुशी को अक्षय तृतीया के दिन सेलिब्रेट करें ताकि माता की कृपा आपके घर में सदैव बनी रहे। जानें किस तरह—मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान करें पूजनइस दिन माता लक्ष्मी और नारायण दोनों का पूजन करें। माता लक्ष्मी धन की देवी हैं तो विष्णु भगवान संसार के पालनहार। ऐसा करने से घर में धन, सुख और सपन्नता बरकरार रहती है। भगवान विष्णु को फल,फूल भेंट करके सत्यनारायण की कथा का पाठ कर सकते हैं, वहीं माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल की माला भेंट करें। पूजन के वक्त दक्षिणावर्ती शंख, कौड़ी आदि रखें व कमलगट्टे की माला से किसी भी मंत्र का जाप करें।क्षमतानुसार दान जरूर करेंइस दिन गाय, जमीन, तिल, सोना, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, शहद और कन्या, इन बारह वस्तुओं को दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन आप जितना दान करेंगे उसका चार गुना फल प्राप्त होगा, साथ ही उस पुण्य का कभी क्षय नहीं होगा।खरीदें सोना, रखें व्रतअक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी समाप्त नहीं होता है, और स्वयं श्री हरि और मां लक्ष्मी उसमें निवास करती हैं। इसके अलावा इस दिन यदि व्रत रखा जाए तो घर के क्लेश दूर होते हैं व परिवार में सुख—शांति बनी रहती है।
भोपाल/नई दिल्ली। सातवां वेतनमान पा चुके केंद्र के कर्मचारियों को अब वेतनभत्तों का इंतजार है। वेतनभत्तों को तय करने में जुटी कमेटी दो-तीन दिनों में अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंप सकती है। यदि ऐसा हो गया तो 7वां वेतनमान पाने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को 1 अप्रैल से ही वेतनभत्तों की सौगात मिल सकती है।7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिले काफी समय हो गया है, लेकिन कर्मचारियों को भत्ते के मामले में अब भी मोदी सरकार के फैसले का इंतजार है। कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन भत्तों में बढ़ोत्तरी के लिए बनी लवासा कमेटी की डेडलाइन 22 फरवरी को ही बीत चुकी है। तभी से कर्मचारियों की निगाह इस कमेटी की रिपोर्ट पर लगी हुई है।यह भी पढ़ेंः 7वां वेतनमानः केंद्रीय कर्मचारियों का 30 फीसदी बढ़ सकता है HRA!मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त सचिव अशोक लवासा की अध्यक्षता में बनी कमेटी अलाउंसेस की फाइनल रिपोर्ट इस सप्ताह वित्त मंत्रालय को सौंप सकती है। यदि ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश में रहने वाले केंद्र सरकार के करीब 50 हजार कर्मचारियों को 1 अप्रैल से ही बढ़ा हुआ वेतन भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा।यह भी पढ़ेंः MP के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, एरियर्स समेत मिलेगा 7वां वेतनमानमध्यप्रदेश सरकार भी बढ़ा सकती है भत्तेयदि सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो मध्यप्रदेश सरकार भी अपने कर्मचारियों को केंद्र की तरह वेतन भत्ते की सौगात दे सकती है। इससे मध्यप्रदेश राज्य के करीब 9 लाख कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है।यह भी पढ़ेंः #Budget: मिशन 2018 के मूड में आई सरकार, बजट में दिखा चुनावी रंग1 जुलाई से मिलेगा MP को 7वां वेतनमानसातवां वेतनमान का इंतजार कर रहे मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने बजट भाषण में घोषणा की थी। वित्तमंत्री जयंत मलैया ने कहा था कि कर्मचारियों को 1 जुलाई 2017 से नया वेतनमान दे दिया जाएगा। उन्हें यह 1 जनवरी 2016 से एरियर्स भी दिया जाएगा।यह भी पढ़ेंः बड़ा खुलासा: नोटबंदी का बैंकों पर बुरा असर, सैलरी नहीं दे पा रहा है भारत का ये बड़ा बैंकइसलिए बनी कमेटीसातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बेसिक पे के 24 फीसदी एचआरए की सिफारिश की थी, जिसका कर्मचारियों और यूनियनों ने विरोध किया था। इसके बाद सरकार ने वित्त सचिव के नेतृत्व में सचिवों की कमेटी का गठन किया।यह भी पढ़ेंः बड़ी खबर: दिवालिया हो रहा है भारत का ये बड़ा बैंक, जल्द निकाल लें इस बैंक से अपना पैसावेतन भत्तों में क्या1. केंद्रीय कर्मचारियों का HRA बेसिक सैलरी का 30 फीसदी हो सकता है।2.एचआरए बढ़ाने के साथ ही सरकार कर्मचारियों को बड़ा झटका दे सकती है।3. यह एचआरए पिछले साल से लागू नहीं करते हुए जुलाई 2017 से लागू किया जा सकता है।4. 7वें वेतन आयोग की एक रिपोर्ट में एचआरए का मुद्दा लगभग हल कर लिया गया है।यह भी पढ़ेंः 500 रुपए मिनिमम बैलेंस और अनलिमिटेड ATM से ट्रांजेक्शन, देखें नया रूलसंसद में उठा था मामला-10 मार्च 2017 को वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में उठे सवाल के जवाब में बताया था कि लवासा कमेटी ने वित्त मंत्रालय को अपनी अब तक नहीं दी है। हालांकि मेघवाल ने यह बताया कि कमेटी में बातचीत का दौर अंतिम चरणों में है और जल्द ही रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।-7वें वेतनमान के अलाउंस पर चर्चा के लिए मोदी सरकार ने जुलाई 2016 में लवासा कमेटी का गठन किया था। इसमें 7वें वेतन आयोग ने कर्मचारियों को मिल रहे 196 भत्तों में से 55 भत्तों को कम करने की सिफारिश की थी। इससे अलग आयोग ने कुछ भत्तं को मर्ज करने के लिए कहा था।-केन्द्र सरकार ने लवासा कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने के लिए चार माह का समय दिया था, लेकिन इस दौरान पहले नोटबंदी का ऐलान और फिर 5 राज्यों में चुनावों को देखते हुए सरकार ने फैसला टाल दिया था।-सूत्रों के मुताबिक यह कमेटी मार्च के अंतिम सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। यदि आयोग की सिफारिशों को मानकर वेतनभत्तों में बढ़ोत्तरी की गई तो 1 अप्रैल 2017 से ही इसे केंद्र के कर्मचारियों के लिए लागू कर दिया जाएगा।यह भी पढ़ेंः प्रकाश झा की लिपस्टिक पर बवाल, मुस्लिम बोले- भोपाल में नहीं घुसने देंगेयह भी पढ़ेंः दिन में नहीं जलाई हेडलाइट तो भरना होगा जुर्माना, जानें क्या है बात!
भोपाल। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के बाद एक और बड़ी खुशी देने जा रही है। ये खुशी मध्यप्रदेश में काम कर रहे करीब 50 हजार केेंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स को भी मिलेगी। खुशी है डीए की। यानी महंगाई भत्ता। खबर है कि केंद्र सरकार जल्द ही केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में दो से चार फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि ये बढ़ोतरी हुई तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 132 फीसदी से अधिक हो जाएगा। आइए हम बताते हैं इस फैसले का एमपी में क्या असर होगा....यह भी पढ़ें: SBI से अब निकाल पाएंगे कम पैसा, देना पड़ेगी ज्यादा फीस, पढ़ें नए RULE...इसलिए आ रही ये खबरकेंद्र सरकार के अभी देशभर में 50 लाख कर्मचारी जबकि 58 लाख पेंशनर्स हैं। महंगाई भत्ता और महंगाई राहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनकी आय पर मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करने के लिए दिया जाता है। श्रमिक यूनियनें हालांकि इस प्रस्तावित वृद्धि से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि इससे मूल्यवृद्धि के वास्तविक असर की भरपाई करने में मदद नहीं मिलेगी।यह भी पढ़ें: OMG! 400 साल से श्रापित है ये गांव, यहां बच्चे पैदा नहीं कर पाती महिलाएंमध्यप्रदेश पर ये असरमध्यप्रदेश मेें 27 दिसंबर 2016 को ही राज्य के 7.5 लाख कर्मचारियों का डीए 125 से बढ़ाकर 132 फीसदी किया गया था। यदि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों का डीए बढ़ाती है तो एमपी में कार्यरत करीब 50 हजार केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स को भी लाभ होगा। वहीं राज्य के 7.5 कर्मचारियों का भी डीए 132 से बढ़कर 136 फीसदी होने की संभावना बढ़ जाएगी।यह भी पढ़ें: हार्ट का LIVE ऑपरेशन: बॉडी में डॉक्टर ऐसे डालते हैं स्टेंट, देखें वीडियो....ये संगठन नाराजकन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंपलॉइज के अध्यक्ष केकेएन कुट्टी ने कहा कि केंद्र सरकार के सहमति वाले फॉर्मूले के तहत महंगाई भत्ता वृद्धि दो प्रतिशत होगी। यह एक जनवरी 2017 से प्रभावी होगी। हालांकि, कुट्टी ने इतनी मामूली वृद्धि पर निराशा जताते हुए कहा कि महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए बेंचमार्क माना जाने वाले औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वास्तविकता से दूर है।
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Bank Employee
बैंककर्मीयों की खुलेआम गुंडई, बैंक के भीतर दो ग्राहकों को बुरी तरह पीटा
कुशीनगर. जिले के पटहेरवा थानाक्षेत्र के फाजिलनगर कस्बे में स्थित पीएनबी की शाखा में बैंक कर्मियों ने खुलेआम गुंडई करते हुए दो युवकों को पीट दिया। युवक बैंक में अपने अकाउंट से आधार नंबर जोड़ने के लिये आये
रायपुर. मां-बाप और गर्लफ्रेंड की हत्या करने वाले किलर उदयन दास के फर्जीवाड़े में सहयोग करने वाले सेंट्रल बैंक के क्लर्क को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बैंक के बड़े अधिकारियों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस उनकी भूमिका की अभी भी जांच कर रही है। बैरन बाजार स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्लर्क गोपाल स्वामी ने आठ हजार रुपए लेकर उदयन दास को उसकी मां इंद्राणी दास की चेकबुक, एटीएम कार्ड और गोपनीय कोड दे दिया था। इसके अलावा इंद्राणी के लाइफ सर्टिफिकेट को भी बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट में अपलोड किया और पेंशन जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद ही इंद्राणी की पेंशन दोबारा शुरू हुई थी। सिविल लाइन पुलिस ने स्वामी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे स्थानीय न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।Read More: बैंक कर्मियों पर दबाव बनाने सीरियल किलर उदयन ने अपनाया था यह हथकंडाइस तरह हुआ फर्जीवाड़ाइंद्राणी की पेंशन वर्ष 2015 में बंद हो हुई और अचानक 2016 में चालू भी हो गई, जबकि उदयन ने इंद्राणी और अपने पिता बीके दास की वर्ष 2010 में ही हत्या कर दी थी। सेंट्रल बैंक के अलावा फेडरल बैंक में भी उदयन ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अपनी मां इंद्राणी और पिता बीके दास के खातों से रकम का आहरण किया था। पुलिस के मुताबिक मां-बाप की हत्या के बाद उदयन उनकी संपत्ति और बैंक में जमा राशि से एेशोआराम करना चाहता था।Read More: बड़ा खुलासाः Psycho killer ने जिंदा दफना दिया था मां-बाप और गर्लफ्रेंड कोइंद्राणी रायपुर में सांख्यिकी विभाग में सहायक संचालक के पद से रिटायर्ड हुई थीं। उनकी हत्या के बाद उदयन सेंट्रल बैंक से इंद्राणी का पेंशन लेता रहा। वर्ष 2015 में फिजिकल वेरीफिकेशन नहीं होने के कारण इंद्राणी की पेंशन बंद हो गई। दोबारा चालू कराने के लिए उदयन ने न्यूयार्क फॉरेन एबेंसी का फर्जी लेटर बनवाया। इसमें अपनी मां इंद्राणी को न्यूयार्क में रहने और बुजुर्ग होने की वजह से सेंट्रल बैंक में फिजिकल वेरीफिकेशन के लिए उपस्थित नहीं हो सकने की जानकारी दी। और उसके जीवित रहने का फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट लगाया। यह आवेदन उसने भोपाल स्थित सेंट्रल बैंक के रीजनल ब्रांच मैनेजर भास्कर राव के पास किया था। इस आवेदन को रायपुर सेंट्रल बैंक भेज दिया गया।Read More: साइको किलर उदयन का खुला एक और राज, पुलिस के उड़े होशपूरा मामला बैंक के क्लर्क गोपाल स्वामी के पास पहुंचा।उसने लाइफ सर्टिफिकेट के आधार पर पेंशन की प्रक्रिया पूरी की। फिजिकल वेरीफिकेशन भी नहीं किया। इसके अलावा उसने इंद्राणी के नाम से चेकबुक, एटीएम कार्ड और उसका गोपनीय कोड का लिफाफा भी उदयन को दे दिया। इसके एवज में उसे उदयन ने चेक के माध्यम से 8 हजार रुपए दिए। उस चेक में भी उदयन ने इंद्राणी के फर्जी हस्ताक्षर किए थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद से वर्ष 2016 में इंद्राणी की पेंशन फिर चालू हो गई। चेकबुक और एटीएम मिल जाने के कारण उदयन हर माह पेंशन व अन्य राशि चेक से आहरण करता रहा।Read More: सीरियल किलर उदयन मामले में बैंककर्मी गिरफ्तार, पैसों के लिए इस करतूत में की थी मददसाढ़े सात लाख का आहरणपुलिस के मुताबिक चेकबुक मिलने के बाद उदयन ने इंद्राणी के खाते से चेक में फर्जी हस्ताक्षर करके एरियर्स के 7 लाख 68 हजार रुपए का आहरण किया। इस आहरण में भी गोपाल स्वामी के अलावा दूसरे बैंक अधिकारियों की भूमिका थी। किसी ने चेक में इंद्राणी के फर्जी हस्ताक्षरों की बारीकी से जांच नहीं की। पूरे मामले में गोपाल के अलावा बैंक के दूसरे अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सूत्रों के मुताबिक गोपाल वर्ष 2015 में बैंक में पदस्थ हुआ है, जबकि उदयन वर्ष 2010 से अपनी मां का पेंशन ले रहा था।Read More : चौंक गए लड़की वाले, जब बारात निकलने से पहले दूल्हे के करतूतों का खुला राजफेडरल बैंक अधिकारियों पर मौनउदयन ने फर्जी दस्तावेजों से इंद्राणी की पेंशन चालू करवाया और उनके हस्ताक्षर करके चेक के माध्यम से एरियर्स को निकाला। इसी तरह उसने अपने पिता बीके दास के फेडरल बैंक में भी उनके फर्जी हस्ताक्षर वाले 7 से अधिक चेक लगाकर रकम निकाली। इस मामले में बैंक के एक भी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
रायपुर. सीरियल किलर उदयन दास मामले की जांच कर रही रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। उदयन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पेंशन और खातों से रकम निकालने में सहयोग करने वाले सेंट्रल बैंक के कर्मचारी गोपाल स्वामी को पुलिस ने रायपुर से गिरफ्तार किया है। बैंककर्मी ने पुलिस को बताया कि उसने उदयन के कहने पर फर्जी दस्तावेज बनवाया और पैसे निकलवाने में उसकी मदद की। पुलिस आरोपी को कोर्ट में पेश में करेगी।Read More: बैंक कर्मियों पर दबाव बनाने सीरियल किलर उदयन ने अपनाया था यह हथकंडातो इसलिए हुई बैंककर्मी की गिरफ्तारीउदयन के फर्जीवाड़े में शामिल होने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद एसआईटी के निशाने पर गोपाल स्वामी समेत चार बैंक अफसर हैं। उदयन पहले ही यह खुलासा कर चुका है कि सेंट्रल बैंक बैरनबाजार और फेडरल बैंक रायपुर तथा भोपाल के अधिकारियों की मदद से उसने मां-बाप के खातों से लाखों रपए निकाले थे। बदले वह बैंक अधिकारियों को बतौर कमीशन मोटी रकम दी थी। Read More: बड़ा खुलासाः Psycho killer ने जिंदा दफना दिया था मां-बाप और गर्लफ्रेंड कोदरअसल उदयन ने अपनी मां इंद्राणी दास का फर्जी जीवित प्रमाण पत्र और फॉरेन एंबेंसी का सर्टिफिकेट इस्तेमाल पेंशन लेने में किया था। इन कूटरचित दस्तावेजों के सहारे वह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से अपनी मां का पेंशन लेता रहा। बैंक अफसरों ने उसकी मां के जीवित होने या मृत होने का भौतिक सत्यापन नहीं किया। इसके चलते वर्ष 2015 से जनवरी 2017 तक पेंशन की राशि उदयन के खाते में आती रही। बैंक अफसरों की लापरवाही के चलते उदयन सरकारी पैसे का दुरुपयोग करता रहा। इसी तरह उसने अपनी मां और पिता बीके दास के नकली हस्ताक्षर करके उनके बैंक खातों व एफडी के ब्याज की राशि का आहरण करता रहा। इसकी भी बैंक अफसरों ने जांच नहीं की।Read More: साइको किलर उदयन का खुला एक और राज, पुलिस के उड़े होशकौन है उदयनउदयन ने जुलाई 2010 में सुंदर नगर स्थित मकान में पिता बीके दास और मां इंद्राणी की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद उनके शव को मकान के गार्डन में ही दफन कर दिया था। इसके बाद दिसंबर 2016 में भोपाल में अपनी प्रेमिका आकांक्षा उर्फ श्वेता शर्मा की हत्या कर दी। और उसके शव को भी अपने कमरे में दफन कर दिया था। आकांक्षा की तलाश के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ।
ग्वालियर . एटीएम नंबर पूछकर लगातार लोगों से ठगी हो रही है। इसके बाद भी जनता सतर्क ता नहीं बरत रही है। इस बार ठग ने एक ड्राइवर की पत्नी के खाते से 50 हजार रुपए पार कर दिए। पीतम्बरा कॉलोनी निवासी आशा शर्मा ने बताया सोमवार की शाम को 7808358963 से उसके मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक का कर्मचारी बताया। फिर पूछा कि किस बैंक में अकाउंट है। आशा ने बताया बैंक ऑफ बड़ौदा में उसका खाता है। इसके बाद बोला कि उसका एटीएम कार्ड ब्लॉक हो गया है। इसलिए खाता नंबर और एटीएम कार्ड नंबर चाहिए। उसकी बातों में आकर आशा ने उसे बैक खाता नंबर और एटीएम कार्ड नंबर बता दिया। कुछ देर बाद मोबाइल पर पैसे निकलने के मैसेज आने लगे। उसके खाते मे दो लाख रुपए थे जिसमें 50 हजार रुपए निकल गए। मंगलवार को वह बैंक पहुंची। वह जानकारी लेने के बाद एसपी के पास आई। तीन बार में निकाले आशा के खाते से ठग ने तीन बार में रुपए निकाले है। आशा का कहना है तीनों बार उसके मोबाइल पर मैसेज आया। उसका रिकॉर्ड भी आशा के मोबाइल में है।
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रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में बजट का उचित उपयोग नहीं किए जाने को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सख्त रुख अपना लिया है। जिसको लेकर विवि में हड़कंप मच गया है।यूजीसी ने विश्वविद्यालय को निर्देशित किया है कि उनके द्वारा उस कार्य का उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाए, जिसके लिए बजट जारी किया गया था। उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दे पाने की स्थिति में विवि को ब्याज सहित बची राशि वापस करना होगा। 16.40 लाख रुपए का मामलायूजीसी द्वारा विश्वविद्यालय के लिए जारी इस निर्देश को लेकर अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। अधिकारी इस प्रयास में हैं, कि उन्हें यूजीसी को केवल मूलधन देकर छुटकारा मिल जाए। दरअसल यूजीसी वर्ष 2004 में रसायन शास्त्र विभाग को प्रोजेक्ट के लिए 16.40 लाख का बजट जारी किया था। जिसे खर्च नहीं किया जा सका है। रिकॉर्ड की तलाश हुई शुरू फिलहाल विश्वविद्यालय का वित्त विभाग अभी संबंधित रिकॉर्ड के तलाश में लगा हुआ है। अधिकारी यह जानने में लगे हैं कि प्रोजेक्ट के बावत आई राशि किन कार्यों में और क्यों खर्च किया गया है। संबंधित अधिकारियों से इस बावत स्पष्टीकरण भी मांगे जाने की तैयारी है। केवल 2.70 लाख रुपए खर्च सूत्रों की माने तो विश्वविद्यालय के पास संबंधित प्रोजेक्ट में से केवल 2.70 लाख रुपए के उपयोग का प्रमाणपत्र है। बाकी राशि के उपयोग का प्रमाणपत्र विवि प्रशासन देने की स्थिति में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक विवि प्रशासन द्वारा संबंधित राशि दूसरे कार्यों में खर्च कर दी गई है।
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में बगैर मान्यता संचालित कई पाठ्यक्रमों पर विवाद खड़ा हो गया है। विभागाध्यक्षों की बैठक में न केवल पाठ्यक्रमों को संबंधित इकाईयों से मान्यता नहीं होने की बात उठाई गई, बल्कि छात्रहित में नए शैक्षणिक सत्र से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया भी स्थगित करने की मांग की गई। नए शैक्षणिक सत्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रवेश को लेकर कुलपति ने विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। जिसमें कंप्यूटर साइंस विभाग से संचालित एमटेक और विधि विभाग से संचालित बीएएलएलबी पाठ्यक्रम का मामला चर्चा का केंद्र बिन्दु बना रहा है। फिलहाल इन पाठ्यक्रमों पर सैद्धांतिक सहमति देते हुए अंतिम निर्णय केंद्रीय प्रवेश समिति पर छोड़ दिया गया। सदस्यों ने मामले में विधिक राय लेने की बात भी कही है।छात्रहित में प्रवेश बंद करने की मांग विभागाध्यक्षों की बैठक में सदस्यों ने मुद्दा उठाया कि एमटेक पाठ्यक्रम के लिए ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) की मान्यता नहीं है। बीएएलएलबी में भी बार काउंसिल की मान्यता नहीं होने की बात कही गई। मान्यता नहीं होने का हवाला देते हुए छात्रहित में नए सत्र से इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं लेने की बात भी कही गई। विधि विभाग द्वारा नए सत्र से शुरू होने वाला एलएलएम पाठ्यक्रम को लेकर भी मान्यता नहीं होने का मुद्दा उठा। ऑनर्स पाठ्यक्रम को हरी झंडी बैठक में बीए ऑनर्स में अंग्रेजी व बीएससी ऑनर्स में कंप्यूटर साइंस व बायोकेमेस्ट्री पाठ्यक्रम को शुरू करने की हरी झंडी मिली। विश्वविद्यालय में पहली बार शुरू होने जा रहे इन पाठ्यक्रमों के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों का ऑर्डिनेंस ग्रहण किया जाएगा। केंद्रीय प्रवेश समिति की मंजूरी लेने की औपचारिकता के बाद इनमें प्रवेश के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभागाध्यक्षों का ये है कहना- बैठक में उठे इन मुद्दों के संबंध में कंप्यूटर साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष आरके कटारे का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के मुताबिक विश्वविद्यालयों को एमटेक जैसे भी पाठ्यक्रम के संचालन के लिए एआईसीटीई के मान्यता की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बावत उनके द्वारा कुलपति को भी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। - विधि विभाग के प्रोफेसर इन इंचार्ज प्रो. सीडी सिंह का बीएएलएलबी व एलएलएम पाठ्यक्रम के संबंध में कहना है कि बार काउंसिल को मान्यता के बावत आवेदन दिया जाएगा। सभी शर्तें पूरी हैं। काउंसिल की फीस भी जमा है। अब केवल काउंसिल द्वारा निरीक्षण किया जाना बाकी है। मान्यता मिलने की प्रत्याशा में पाठ्यक्रम शुरू किए जाने का प्रावधान है। विवादों में यह पाठ्यक्रम- कंप्यूटर साइंस विभाग का एमटेक पाठ्यक्रम- विधि विभाग का बीएलएलबी व एलएलएमइन पाठ्यक्रमों में बनी सहमति- अंग्रेजी में बीए ऑनर्स पाठ्यक्रम- कंप्यूटर साइंस में बीएससी ऑनर्स - बायोकेमेस्ट्री में बीएससी ऑनर्स
रीवा। यूजीसी व रूसा से बजट नहीं मिलने के चलते अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कंगाली का असर छात्रों पर भी देखने को मिल रहा है। विवि प्रशासन मेधावियों के प्रोत्साहन राशि को भी हजम कर गया है। मेधावियों को पिछले पांच वर्षों से प्रोत्साहन राशि नसीब नहीं हो रही है। पढ़ाई पूरी करने के बाद सैंकड़ों छात्र विश्वविद्यालय भी छोड़ चुके हैं। विवि की प्रोत्साहन योजना के तहत हर वर्ष प्रत्येक पाठ्यक्रम के सभी सत्रों के उस छात्र को प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है, जो संबंधित पाठ्यक्रम व सत्र के टॉपर होते हैं। वर्ष 2013 के बाद नहीं हुई बैठकलेकिन विवि प्रशासन ने पिछले चार वर्षों में किसी भी छात्र को कोई राशि नहीं दी है। वर्ष 2013 में इस बावत अधिकारियों और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई तो गई थी। लेकिन उसके बाद से न तो कोई बैठक ही बुलाई गई और न ही छात्रों को प्रोत्साहित किया गया। निर्धारित है 2000 रुपए की राशिस्नातक व परास्नातक पाठ्यक्रमों के छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए विवि द्वारा 2000 रुपए की राशि निर्धारित है। शोधार्थियों को प्रतिवर्ष 6000 रुपए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन पिछले पांच वर्षों को मेधावियों को राशि नसीब नहीं हुई है। अंतिम वर्ष वालों को मिला मेडलविवि में पिछले दो वर्षों से दीक्षांत समारोह के आयोजन में विभिन्न पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के टॉपर्स को गोल्ड मेडल जरूर प्रदान किया गया है। जबकि नियमानुसार प्रत्येक वर्ष के छात्र को प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। स्ववित्तीय पाठ्यक्रम भी इसमें शामिल है। लिम्का बुक में शामिल तीन बहनों को भी भुलायामेधावियों को प्रोत्साहन राशि से वंचित रखने के साथ ही विवि अधिकारियों ने उन तीन बहनों को भी भुला दिया है। जो एक साथ विवि से पीएचडी प्राप्त कर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल हुए हैं। बात वर्ष 2014 में डॉ. अर्चना मिश्रा, डॉ. अंजना मिश्रा व डॉ. आशु मिश्रा ने अलग-अलग विषयों में एक साथ पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। विवि प्रशासन इन तीरों सगी बहनों को सम्मानित करने का वादा किया था। लेकिन दीक्षांत समारोह बीत जाने के बावजूद इनके संम्मान का नंबर नहीं आया।
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