jaipur literature festival-2010
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60 की हूं , पर अम्मा मत कहो
जयपुर। ढ़लती उम्र मशहूर लेखिका शोभा डे के चेहरे पर साफ दिखाई देती है लेकिन वह अपनी उम्र को किसी तरह की कमजोरी नहीं मानती। शोभा डे का कहना है कि वह भले ही 60 साल की हो गई हो लेकिन उन्हें माताजी जैसे सम्बोधन पसंद नहीं है। जयपुर साहित्य उत्सव के आखिरी दिन सोमवार को शोभा डे ने कहा कि वह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती कि महिलाओं को इस तरह से सम्बोधित किया जाना चाहिए।

डिग्गी पैलेस के फ्रंट लॉन में आयोजित सीक्रेट्स ऑन बीइंग शोभा डे सत्र के दौरान शोभा डे ने कहा कि माताजी व बहिन जी जैसे सम्बोधन महिलाओं को अबला के रूप मे पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि वह 60 साल की उम्र में भी लगातार रचनात्मक काम कर रही है। उन पर ढ़लती उम्र का कोई फर्क नहीं पड़ा है। साहित्य उत्सव के आखिरी दिन शोभा डे ने अपने लेखन, राजनीतिक व कई अन्य मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इस कार्यक्रम की प्रस्तोता थी मेरी ब्रेनर।

मुंबईया इंग्लिश गलत नहीं
शोभा डे ने कहा कि वह अपने उपन्यासों में मुंबईया इंग्लिश के इस्तेमाल को गलत नहीं मानती। उन्होंने कहा कि हमारे देश में कई तरह की अंग्रेजी है और यह बहुत ही रोचक है। कई साल से मुम्बई में रहने के कारण उनके लेखन में मुंबईया इंग्लिश की झलक मिलती है। शोभा डे ने कहा कि मुंबई में बाहरी प्रदेश के टैक्सी ड्राइवरों के लाइसैंस रद्द किए जाने को वह गलत नहीं मानती। उन्होंने कहा कि इस विषय को मीडिया में गलत तरीके से पेश किया गया है।

शोभा डे ने कहा कि हर चीज को राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। मुम्बई में जो नए टैक्सी ड्राइवर आते हैं वह शहर के रास्ते नहीं जानते, ऎसे में पर्यटकों व मुंबई के लोगों को काफी दिक्कत होती है। उन्होंने युवाओं से तो राजनीति में आने की बात तो कही लेकिन खुद के राजनीति में आने से साफ इनकार कर दिया। शोभा डे ने कहा कि उनकी रोजी रोटी लेखन से चल रही है, इसलिए उनका राजनीति में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि मुंबई हमलों के बाद बॉलीवुड से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की।
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