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गूगल ने बदल डाला हमारा नक्शा !
जयपुर। अपने देश की धूल पर भी किसी और के कब्जे की बात सोचो तो खून खौल जाता है, ऎसे में अगर आपके सामने कोई भारत की सीमाओं के साथ ही खिलवाड़ करता दिख जाए तो! ऎसा दुनिया के सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल कर रहा है। गूगल से जुड़ी तीन अलग-अलग वेबसाइटों पर भारत के तीन अलग-अलग नक्शे दर्शाए गए हैं। कहीं जम्मू-कश्मीर और अरूणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र बताया गया है तो कहीं देश के हिस्से पाकिस्तान और चीन में दर्शा दिए गए हैं।
चीन में ड्रैगन का हुआ गूगल!
"गूगल मैप" के चीनी वर्जन "गूगल डीटू" में वेबसाइट मानो तथ्य दर्शाने की जगह चीनी सरकार की वेबसाइट बन गई है। इस साइट पर दर्शाए गए भारत के मानचित्र में जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा और लगभग पूरा अरूणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा बताया गया है। यहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गो का दर्शित चीनी सीमा में अटपटे तरीके से लोप हो गया है, जबकि वास्तविकता में ये राजमार्ग भारतीय मुख्य भूमि के हिस्से अरूणाचल के आखिरी छोर तक जाते हैं। "गूगल डीटू" में ताइवान को भी चीनी सीमा में ही दिखाया गया है।
पाकिस्तान पर भी मेहरबानी!
गूगल के एक अन्य एपलिकेशन "गूगल एनालिटिक्स" में जम्मू-कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में दर्शाया गया है। "गूगल मैप" में पूरे जम्मू-कश्मीर और अरूणाचल प्रदेश को बिंदु रेखा में दर्शाया गया है। विकिपीडिया वेबसाइट पर बिंदु रेखा की व्याख्या सीमा-विवादित क्षेत्रों के रूप में की गई है।
गूगल का जवाब
पत्रिका ने जब इस सिलसिले में गूगल के बेंगलूरू कार्यालय में बात की तो वहां से जवाब मिला कि जो भी पूछताछ करनी है, उसे मेल के जरिए भेज दिया जाए। इस पर पत्रिका ने गुरूवार शाम प्रेस एट गूगल डॉट कॉम पर मेल भेजा। शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक गूगल की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
आखिर हम इतने कमजोर क्यों हैं कि कोई व्यापारिक कंपनी भी हमारी सम्प्रभुता पर अंगुली उठाने लग जाती है। गूगल को देश में तुरंत रोका जाना चाहिए। अगर हमने इसे नहीं रोका तो इस प्रकार के भ्रामक नक्शों से देश के विरोधी तत्व दुष्प्रचार करेंगे। - प्रोफेसर के. एल. कमल, पूर्व कुलपति, राजस्थान विश्विद्यालय व विशेषज्ञ अन्तरराष्ट्रीय राजनीति
मैंने अपनी वेबसाइट की स्थिति जानने के लिए "गूगल एनालिटिक्स" खोला तो पता चला कि वहां भारत का काफी हिस्सा चीन व पाकिस्तान में दिखाया जा रहा है। मेरा मानना है कि देश के गृह विभाग को इस पर कठोर कदम उठाना चाहिए। - विवेक त्रिपाठी, अधिवक्ता व साइबर लॉ विशेषज्ञ
"गूगल डीटू"
"गूगल डीटू" गूगल मैप की तरह ही एक सेवा है, जो चीनी भाषा के यूजर्स के लिए गूगल ने तैयार की है। इसे दुनिया के किसी भी कोने से देखा जा सकता है और इसका इस्तेमाल "गूगल मैप" की तरह ही किया जा सकता है।
"गूगल एनालिटिक्स"
गूगल एनालिटिक्स वेबमास्टर टूल है, जो वेबसाइट संचालकों को उनकी वेबसाइट के ट्रेफिक से जुड़े आंकड़े मुहैया कराता है। इससे पता चलता है कि किसी वेबसाइट पर ट्रेफिक किस देश से आ रहा है और सर्च के लिए किस तरह के की-वड्र्स प्रयोग में लाए जा रहे हैं।
आशीष खंडेलवाल/हीरेन जोशी
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