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रावण नहीं होता तो राम को कौन जानता
उज्जैन।जिस प्रकार से दिन की वैल्यू रात होने से है, वैसे ही अत्याचारियों के कारण साधु-संत और परमात्मा की भी वैल्यू है। यदि रावण नहीं होता तो राम को कौन जानता? इससे स्पष्ट है कि हर समस्या का समाधान भी है और जिस दिन राजनीति में धर्म का समावेश हो जाएगा, अत्याचार स्वत: ही खत्म हो जाएगा। यह बात आचार्य कौशिकजी महाराज (वृंदावन धाम) ने कही। वे गुरूवार को पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।
रामदेवजी न जाएं राजनीति में कौशिकजी महाराज ने योग गुरू रामदेवजी महाराज को राजनीति में प्रवेश नहीं करने की सलाह दी। उनका कहना था की रामदेवजी योग व धर्म गुरू हैं। उनकी बातों में दम और प्रभाव है, हर कोई उनकी बात मानेगा। ऎसे में उन्हें राजनीति में जाने की जरूरत नहीं। उन्होंने उमा भारती का उदाहरण देते हुए कहा कि वे राजनीति में जाने से पूर्व में क्या थी और अब क्या हैं?
सल्फास से खतरनाक अहंकार सबकुछ प्राप्त करने के बावजूद इंसान को अहंकार नहीं आए यह बड़ी बात है। वरना अहंकार सल्फास से भी ज्यादा खतरनाक होता है। हनुमान ने लंका जलाई लेकिन जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने अभिमान से बचने के लिए कह दिया की मैंने लंका नहीं जलाई। ऎसे ही भगवान राम ने दशानन का वध किया और जब उनकी मां ने पूछा कि बेटा इतने बड़े व्यक्ति को कैसे मार गिराया तो उन्होंने भी अहंकार से बचने के लिए यही कहा कि दशानन को धराशायी करने वाली ताकत मेरी नहीं किसी और की थी।
जो कुछ मांगों देश के लिए हमेशा सत्कर्म करते रहो और जो कुछ भी मांगो देश के लिए ही मांगो । हम सबकुछ बाद में है सबसे पहले भगवान के और भगवान हमारा है। इसलिए रोजाना सुबह उठते से ही ईश्वर से देश की अच्छाई के लिए कामना करो न की खुद के लिए।
अच्छी बात गंभीरता से नहीं लेता मीडिया कौशिकजी महाराज ने एक सवाल के जवाब में मीडिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अत्याचार और दुराचार की खबरों को मीडिया गंभीरता से लेता है और खूब हाइलाइट करता है लेकिन कोई संत हजारों श्रोताओं को प्रवचन दे रहा है, उसे मीडिया 10 फीसदी भी स्थान नहीं देता है।
कौशिकजी महाराज के मुख से भागवत कथा शुरू श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन गुरूवार से महाकाल मंदिर प्रवचन हॉल में शुरू किया गया है। आयोजन से जुड़े कमलेश पंचौली ने बताया कि प्रवचन 5 मई तक रोजाना शाम 4 से 7 बजे तक कौशिकजी महाराज प्रवचन देंगे। कौशिकजी महाराज के मुताबिक पुरूषोत्तममास के दौरान प्रवचन सुनने से सामान्य दिनों की अपेक्षाकृत कई अघिक लाभ मिलता है।
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