| |
|
उच्च शिक्षा से महरूम छात्राएं
हरदा। बीस वर्ष बाद भी हाईस्कूल का उन्नयन नहीं होने से बालागांव की कई बालिकाएं हर साल उच्च शिक्षा लेने से महरूम रह जाती हैं। आर्थिक तंगी औैर सामाजिक रोकटोक के चलते वे चाहकर भी आगे नहीं पढ़ पातीं। हाईस्कूल के साथ ही गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में बालिकाओं की दर्ज संख्या बालकों से अधिक होने के बावजूद शासन की इस दिशा में अनदेखी से इन लड़कियों के सपने चूर हो रहे हंै।
जो कुछ कर दिखाने की तमन्ना रखती हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का नारा, इस गांव में हायर सेकंडरी स्कूल की कमी के आगे खोखला साबित हो रहा है। खास बात यह है कि 1990 में उक्त स्कूल के साथ स्थापित जिले के अन्य स्कूलों को हायर सेकंडरी का दर्जा प्राप्त हो गया है।
करीब 2700 की आबादी वाले बालागांव के हाई स्कूल की 29 बालिकाएं आगे की पढ़ाई को लेकर कुछ न कह पाने की स्थिति में हैं। पढ़ाई जारी रखने गांव के निजी हायर सेकंडरी स्कूल में प्रवेश को लेकर भी यही बात है। अगर वहां प्रवेश लिया तो भी वाणिज्य के अलावा अन्य संकाय की पढ़ाई असंभव है। शहर में रहकर पढ़ाई करना बस में हो तो ठीक, वरना घर बैठने के सिवाए उनके पास कोई चारा नहीं रहता। बालागांव के पास बसे बूंदड़ा, जिजगांव आदि की लड़कियां भी यहीं से हाईस्कूल उत्तीर्ण करती हैं।
अधिक है संख्या हाईस्कूल में इस वर्ष कुल दर्ज संख्या 39 में से 29 लड़कियां हैं। वष्ाü 2009-10 में इनकी दर्ज संख्या 59 में से 40 रही। इसके पूर्व वर्ष 2008-09 में 57 छात्रों में से 27 लड़कियां थीं। बीते वर्ष इस स्कूल का कक्षा दसवीं का परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा था। मिडिल स्कूल में भी बालिकाओं की संख्या बालकों से अधिक है। गांव में हायर सेकंडरी स्कूल नहीं खुलने की दशा में, हाईस्कूल पास करने के बाद इनमें से कई बालिकाएं आगे की पढ़ाई छोड़ सकती हैं।
दान के भवन में स्कूल दो एकड़ भूमि के एक कोने में वष्ाü 2005 में दान की राशि से बनाए गए हाईस्कूल भवन में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। भवन के नाम पर बने कक्ष तथा बरामदे में ही दोनों कक्षाओं का संचालन होता है। बारिश तथा तेज धूप के दौरान बरामदे में बैठे बच्चे कैसे पढ़ाई करते होंगे इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। विज्ञान प्रयोगशाला के अभाव में प्रयोग के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती है। बाउंड्रीवाल नहीं होने से भवन में असामाजिक गतिविधियों का संचालन भी होता है। लड़कियो के लिए अलग से शौचालय नहीं होने से वे कॉमन यूरिनल के उपयोग को मजबूर हैं।
व्यवस्था के प्रयास गांव के दौरे के दौरान मुझे इस बात की जानकारी लगी थी। वहां अब तक हायर सेकंडरी स्कूल क्यों नहीं खुल सका, इसकी पड़ताल कराई जाएगी। बालिकाएं आगे पढ़ाई जारी रखें, इसकी व्यवस्था के प्रयास प्राथमिकता से किए जाएंगे। डॉ.यामिनी मानकर, अध्यक्ष जिला पंचायत हरदा।
गुरूदत्त राजवैद्य
|
|
| |
| |
|
|
| |
| |
|
|
|
|
Comments are moderated. Comments that include profanity or personal attacks or other inappropriate comments or material will be removed from the site. Additionally, entries that are unsigned or contain "signatures" by someone other than the actual author will be removed. Finally, we will take steps to block users who violate any of our posting standards, terms of use or privacy policies or any other policies governing this site.
|