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मौसम ने गंवाई एसी बसों की कमाई
चेन्नई। पहले से ही यात्रियों के अभाव का सामना कर रही महानगर परिवहन निगम की एसी बसें अब बारिश के इस मौसम में आई तापमान में गिरावट के कारण दोहरी मार झेल रही हैं। इन बसों में लगातार यात्रियों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है जिससे निगम को इन बसों के परिचालन के कारण अतिरिक्त भार सहना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से महानगर में इन्द्रदेव की कृपादृष्टि से हो रही कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश ने इन ठंडी बसों को यात्रियों से और दूर कर दिया है। इन बसों के परिचालन से प्रतिदिन मात्र 12,000 रूपए की किराया वसूली हो रही है जबकि निगम ने इनके लिए 18,000 रूपए का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है।
निगम द्वारा महानगर में गर्मी के दिनों में यात्रियों को राहत देने के लिए वातानुकूलित बसें सितम्बर 2007 में शुरू की गई थी। ऎसी 100 बसें चलाए जाने का प्रावधान था लेकिन केवल 90 बसें ही संचालित की जा रही हैं। इन बसों का किराया अधिक होने के कारण यात्रियों में इसे लोकप्रियता नहीं मिल पाई। महानगर के कुछ खास बस स्टापों को छोड़ दिया जाए तो ऎसा कम ही होता है जब इन बसों में यात्री थोक भाव में चढ़ते हों। इन बसों के यात्रियों में वे लोग शामिल हैं जो या तो किसी बड़े व्यवसाय से जुड़े हैं या फिर मोटी पगार लेते हैं। वैसे निगम ने यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए इन बसों को कुछ खास मार्गो पर ही चलाया जाता है। हालांकि बस परिचालक जो अपनी विशेष ड्रेस में होते हैं की पूरी कोशिश रहती है कि अधिकाधिक यात्रियों को बसों में यात्रा कराई जाए। इसके लिए इन बसों के परिचालक चेन्नई सेंट्रल एवं एलआईसी जैसे महत्वपूर्ण बस स्टाप्स पर प्रतीक्षा करते देखे जा सकते हैं। बावजूद इसके ऎसा कम ही देखने में आता है कि इन बसों की सभी सीटें यात्रियों से भरी हों।
न्यूनतम किराया दस रूपया महानगर परिवहन की वातानुकूलित बसों का न्यूनतम किराया 10 रूपए है जो डीलक्स बसों के किराए से दुगुना ज्यादा है जबकि इनका अधिकतम किराया 25 रूपए तक है। ऎसे में सामान्य यात्रियों के लिए इन बसों में चढ़ना मुश्किल होता है। जो थोड़ी बहुत हिम्मत दिखाते भी हंै वे सिर्फ न्यूनतम किराया यानी 10 रूपए ही दे पाते हैं। इससे ज्यादा उनकी जेब पर भारी पड़ता है। वोल्वो एसी बसों को एमटीसी ने 80 लाख रूपए प्रति बस की लागत से खरीदा है। इतने पैसों में चार सामान्य बसें खरीदी जा सकती हैं। गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण योजना के तहत एमटीसी को 1,100 बसों के लिए कोष आवंटित किया गया था जिसका 20 प्रतिशत हिस्सा एसी बसों के लिए था।
नियमित सफाई नहीं महानगर परिवहन निगम एक तरफ अपनी एसी बसों में यात्रियों की संख्या में कमी की समस्या से जूझ रहा है तो दूसरी ओर सामान्य बसों में साफ सफाई की नियमित व्यवस्था नहीं है। एमटीसी द्वारा सिंगल डेकर (लीलैंड की 1385, टाटा की 79), सेमी लो फ्लोर बसें 1761, वेस्टीबुल 100 चलाई जाती हैं। सफाई के मामले में ये बसें सफाई की बाट जोहती नजर आती हैं। स्थिति यह है कि पूरी बस के अलावा बस चालक के आस-पास भी रैपर एवं कागज के टुकड़े, पॉलीथिन व परित्यक्त खाद्य सामग्री आदि बिखरे हुए देखे जा सकते हैं। ऎसे में अब जब बारिश का दौर शुरू हो चुका है इस तरह की सामग्रियों से बसों में यात्रियों की यात्रा दुखद होने लगी है। बसों में बैठे यात्रियों पर मच्छरों का प्रकोप शुरू हो जाता है। पुरानी बसों में स्थिति और भयावह है क्योंकि उनमें तो यात्री के बैठते नहीं मच्छरों का प्रकोप शुरू हो जाता है। इन बसों के बाहरी हिस्से की सफाई के लिए निगम द्वारा मशीनों का प्रयोग किया जाता है।
अधिकारी कहिन बसों की साफ सफाई के लिए 10-12 आटोमेटिक वाशिंग मशीनें खरीदी गई हैं तथा इनकी सफाई विभाग द्वारा की जाती है। इसके अतिरिक्त वोल्वो बसों की सफाई का काम निजी कंपनियों के हाथ में है। जहां तक बसों में मच्छरों के प्रकोप का सवाल है विभाग द्वारा निर्धारित समय पर बसों में मच्छर एवं कीटों को मारने के लिए मशीनों द्वारा छिड़काव किया जाता है।
अतुल्य मिश्रा, परिवहन सचिव तापमान में गिरावट के कारण वातानुकूलित बसों के यात्रियों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक की कमी आई है। इन बसों के परिचालन पर 18,000 रूपए प्रतिदिन की लागत आती है। इसके अतिरिक्त पेट्रोल डीजल के मूल्य में वृदि्ध से महानगर परिवहन निगम की सभी बसों के परिचालन पर 1.5 करोड़ रूपए प्रति महिने का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। हम स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं तथा समय के अनुसार उचित निर्णय ले लिया जाएगा। वी.बाबू, संयुक्त प्रबंध निदेशक, दक्षिणी क्षेत्र व कारपोरेट, महानगर परिवहन निगम
संतोष्ा तिवारी
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