Hindi News
Welcome Guest | Make Home Page | Login | Register | E-Mail | Epaper | RSS feed
| Last updated - Mon, Sep 06, 2010
Home | India | World | Sports | Business | Opinion | Entertainment | NRI | Health & Science | Education | My Life | Videos | Forum | SMS Alert
Photo Gallery Epaper पाक में आत्मघाती हमला, 8 पुलिसकर्मियों की मौत • राजस्थान के 15 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार • ग्वाटेमाला : भूस्खलन से 40 की मौत, 80 दबे • बिहार : नक्सलियों ने बंधक पुलिसकर्मियों को रिहा किया • आईसीसी ने पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी अकमल से पूछताछ की • चंडीगढ़ में एनआरआई की कोठी से 23 हथियार बंद लोग पकड़े गए |
Rajasthan bullet Gujarat bullet Madhya Pradesh bullet Others
Raisen
Bookmark and Share ईमेल प्रिंट
डॉक्टर नहीं, मरीज परेशान
 

रायसेन। जिला अस्पताल में लाख प्रयासों के बाद भी डॉक्टरों के तौर तरीकों में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और पदों की खींचतान के में लगे डॉक्टरों को मरीजों की सेवा से कोई लेना-देना नहीं है। शासन के आदेश अनुसार सुबह आठ बजे सभी डॉक्टरों को अस्पताल पहुंचकर डयूटी संभालनी चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में नो बजे के बाद डॉक्टरों का आना शुरू होता है।

सरकारी क्वाटर में रह रहे कुछ डॉक्टर तो समय पर पहुंच जाते हैं। वे भी बमुश्किल तीन या चार ही हैं। बाकी डाक्टर दस बजे तक अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल में पदस्थ 24 डाक्टरों में से दस डाक्टर भोपाल से अप-डाउन करते हैं। डाक्टरों के अप-डाउन पर अंकुश लगाना सिविल सर्जन के तो बस से बाहर की बात, क्योंकि वे और उनकी पत्नी स्वयं भोपाल से अपडाऊन करते हैं। ऎसे में वे कैसे अन्य डाक्टरों को मुख्यालय पर रहने के लिए कह सकते हैं। लेकिन इस सब के बीच सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डाक्टरों का इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज अपनी तकलीफ से परेशान हो निजी डाक्टरों के यहां चले जाते हैं। लेकिन गरीब, ग्रामीण मरीजों को यह इंतजार करना मजबूरी है।

पत्रिका टीम ने जिला अस्पताल की ओपीडी का सुबह आठ बजे जायजा लिया। मौके पर देखा तो कई डाक्टरों के टेबल खाली थे। महिला ओपीडी का तो हाल और भी खराब है। वहां इस समय में एक भी महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी।



इनकी भी समस्या है
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के रहने के लिए आवास की सुविधा मुख्यालय पर नहीं है। डॉक्टरों के लिए कुल सात भवन हैं। इनमें से तीन जर्जर हालत में हैं। जिन्हे कंडम घोषित किया जा चुका है। फिर भी इनमें डॉक्टर रह रहे हैं। इसके अलावा लगभग पांच डॉक्टर स्थानीय निवासी हैं। वे अपने मकानों में रहते हैं। बाकी डॉक्टर भोपाल से अप-डाउन करते हैं। हालांकि रायसेन में रहने के लिए किराए के मकानों की कमी नहीं है, लेकिन ये भोपाल रहना ही मुनासिब समझते हैं।

स्थिति में सुधार है
डॉक्टरों को समय पर अस्पताल आने के लिए बार-बार कहा जा रहा है। लगातार तीन दिन लेट होने पर एक दिन की सीएल लगाई जा रही है। इससे स्थिति में कुछ सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह से सुधार के लिए और कड़ाई
बरतनी होगी। डॉ. सुधीर जेसानी, सिविल सर्जन

Add Fav Set Default Go Top
प्रिंट ईमेल Bookmark and Share
 
 
 
 
      write to the editor
Write here:
(Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi)
Terms & Conditions
Name:

Location:

E-mail:
 
 
 
 
       more news in Raisen
 
 
Readers speak:No comments have been added for this news yet. Be the first to comment!
 
http://festivals.patrika.com | http://travel.patrika.com | http://cricket.patrika.com
Photo gallery | My Life | Cook's Book |My Board | NewsLetters | Privacy Policy | Disclaimer
About Us | Contact Us | Work With Us | Advertise With Us | Feedback | Faq's | Site Map
All Rights Reserved with Rajasthan Patrika ™, Kesargarh, Jawaharlal Nehru Marg, Jaipur, Rajasthan, India
Phone: +91-141-39404142, Advertising : 3005813, Web : 3005662 , Fax: +91-141-2566011, Email : info@patrika.com

Hindi News | Patrika - Largest Hindi News Portal