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चिकित्सालयों में हड़कम्प
चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी व महिला एवं बाल चिकित्सालय में शुक्रवार को प्रमुख शासन सचिव बी.एन.शर्मा के निरीक्षण से हड़कम्प मच गया। शर्मा ने सांवलियाजी चिकित्सालय में सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि वार्डो में रोगियों से ज्यादा उनके परिजनों की संख्या है और चिकित्सालय के कॉरिडोर में ही लोग भोजन कर रहे हैं, इससे संक्रमण फैल सकता है। महिला एवं बाल चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने उन्हें बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले में मातृ मृत्यु दर प्रति लाख पर 218 है, इस पर प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि यह आंकड़ा सौ प्रतिशत गलत है। उन्होंने निर्देश दिए कि इसे फिर से दिखवाएं।
पानी के नमूनों की जांच समिति को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव बी.एन.शर्मा ने कहा कि पेयजल स्रोतों के नमूनों की जांच जिला कलक्टर की देखरेख में गठित समिति करेगी। चिकित्सा व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा एक दूसरे पर लगाए जाने वाले आरोपों को देखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है।
इससे कोईभी विभाग नमूने की रिपोर्ट को नकार नहीं सकेगा। वे शुक्रवार को कलक्ट्रेट के समिति कक्ष में विभागीय अधिकारियों की बैठक में बोल रहे थे। समिति में प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का भी प्रतिनिधित्व भी होगा। संस्थागत प्रसव में कमी पर अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए मौसमी बीमारियों से निपटने की तैयारी करे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच से संक्रमण का खतरा रहता है अत: वहां चूना और ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाए। बैठक में जिला कलक्टर आरूषि मलिक भी मौजूद थीं।
चिकित्सकों की भर्ती विभाग स्तर पर राज्य में चिकित्सकों के पच्चीस फीसदी पद रिक्त है। ग्रामीण इलाकों में करीब पैंतीस फीसदी पर खाली है। इस कमी को पूरा करने के लिए शीघ्र ही कदम उठाए जाएंगे। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य बी.एन.शर्मा ने शुक्रवार को चित्तौड़गढ़ के सर्किट हाउस में पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार मौसमी बीमारियों से निपटने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने को लेकर गंभीर है। राज्य में पैरामेडिकल स्टाफ 15 फीसदी कम है। अब चिकित्सकों की भर्ती निदेशालय स्तर पर ही वरीयता सूची बनाकर की जाएगी, ताकि प्रक्रिया में लम्बा समय नहीं लगे। इस संबंध में नियमों में भी बदलाव किया जाएगा। राज्य में अब तक 880 चिकित्सकों की भर्ती हो चुकी है और 204 चिकित्सकों की भर्ती और होगी। चित्तौड़गढ़ में संस्थागत प्रसव में कमी को लेकर कार्रवाई के संकेत भी दिए। राज्य में खाद्य निरीक्षक मात्र 83 ही है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में नमूने लेने की कार्रवाई हुई लेकिन लाइसेंस निरस्त नहीं किए गए। उन्होंने मिलावटियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत बताई।
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