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Photo Icon सेना को आदेश थमा दो घाटी गैर नहीं होगी...

Updated: IST balidan diwas jhansi ki rani laxmi bai
भारत-पाक क्रिकेट मैच के सदमे से निकलकर शहरवासी देशभर से आए प्रख्यात कवियों की रचनाओं में उत्साह और उमंग के गोते लगाते दिखे.....

ग्वालियर। बलिदान मेले में रविवार शाम वीर, हास्य और व्यंग्य के इंद्रधनुषी रंगों के नाम रही। भारत-पाक क्रिकेट मैच के सदमे से निकलकर शहरवासी देशभर से आए प्रख्यात कवियों की रचनाओं में उत्साह और उमंग के गोते लगाते दिखे। एक के बाद एक रचनाएं सुन उनकी टेंशन पलभर में ही काफूर हो गई।

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने वाशिंदों को कभी हंसाया, कभी गुदगुदाया तो कभी उनके अंदर देश का जज्बा भर दिया। वीर रस प्रधान क्षणिकाओं को सुन श्रोतागण भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारे लगाकर कवियों को एक के बाद एक कविता पढऩे को विवश करते नजर आए। देर रात तक मंच सजा रहा और शहरभर से जुटे सैकड़ों श्रोतागण रचनाओं को रसपान करते रहे।

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कार्यक्रम की शुरुआत आगरा की रुचि चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना के साथ की। श्रोताओं को जोड़ते हुए उन्होंने नारी अस्मिता पर एक गीत पढ़ा। अगली पंक्तियों में रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी पंक्तियों में बताईं शौर्य वीरता पथ दिखलाया हमको वीरा रानी ने और पराक्रम सिखलाया है बुंदेली इस पानी ने, सम्मुख हो दुश्मन तो डटकर करो सामना वीरो तुम, जब तक सांसें हैं लडऩा बतलाया पुण्य कहानी में सुनाकर श्रोताओं का दिल जीता।

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मंच का संचालन कर रहे दिल्ली के प्रवीण शुक्ला ने पढ़ा जाने कितनों की चरखी घुमा दी मोदी ने कमाल कर दिया, एक ओवर में सेंचुरी घुमा दी मोदी ने कमाल कर दिया...। राज्यों के हालात पर व्यंग्य कसते हुए इटावा के कमलेश शर्मा ने सुनाया बिछाकर जाल भाषण के उबरने ही नहीं देते, नशा विद्वेश का देकर उतरने ही नहीं देते, जलाकर रख दिया है राज्य पूरा वोट के खातिर, जमीनी हाल को नेता सुधरने ही नहीं देते...।

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पवार ने ज्वलंत मुद्दे पर की बात : अब बारी उसकी थी जिसका शहर के लोगों को बेसब्री से इंतजार था। वह नाम था हरिओम पवार का। उन्होंने हर एक के दिल में सुलग रहे ज्वलंत मुद्दे से अपनी पंक्तियों की शुरुआत की। सेना को आदेश थमा दो घाटी गैर नहीं होगी, जहां तिरंगा नहीं मिलेगा उनकी खैर नहीं होगी। किसका खून नहीं खौलेगा सुन पढ़कर अखबारों मे, शेरों की गर्दन कट गई है कुत्तों के दरबारों में। जबलपुर के सुनील भोला ने पढ़ा पत्थर भी जिनके हौसले को तोड़ न पाए, वो मौत को भी देखकर मुंह मोड़ न पाए, वो खून की हर बूंद वतन पर लुटा गए, हम एक मैच देखना भी छोड़ न पाए। प्रतापगढ़ के पार्थ नवीन ने रचना में कहा भारत के टुकड़े करने की जिन लोगों ने ठानी, हम उनके टुकडो कर देंगे ऐसी जिनकी वानी, वंदे मातरम जनगण मन चल लहर तूफान, हिंदुस्तान में वही रहेगा जो हैं हिंदुस्तानी।

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राजनीति समीकरणों पर द्वंद्व
अलवर के कवि विनीत चौहान ने पढ़ा गर अपनी ही रानी से अगर दगा नहीं करते, वो एक सिंघनी ही बढ़कर मां की जंजीर काट देती, आजादी के काले बादल विप्रू का हर शीष छांट देती, वो रणचंडी बनकर शत्रु का सारा लहू चाट लेती। सभी धर्मों को जोड़ते हुए कानपुर के सुरेश अवस्थी ने पढ़ा सीमा पर होते नहीं अगर जवान शहीद, मना नहीं पाते कभी तीज दिवाली ईद, मस्जिद में गीता मिले मंदिर में कुरान, विश्व गुरु हो जाएगा फिर से हिंदुस्तान। विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए कोई हिंदुत्व इस्लाम न पूछा जाए, मरने के बाद का अंजाम न पूछा जाए, कौन हूं मुझसे मेरा नाम न पूछा जाए, मेरी आंखों में बस वतन की खुशबू पढ़ी जाए।

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