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दुर्भाग्य: आत्मघाती हमलावरों के लिए बच्चें बन रहें आतंकियों की पहली पसंद 

Updated: IST  Children as suicide terrorist
आतंकवादी समूहों के लिए बच्चें हमलावरों के रूप में पहली पसंद बनते जा रहे है। नाइजीरिया के प्रतिबंधित आतंकवादी समूह बोको हराम ने साल 2017 के शुरुआती तीन महीनों में पिछले साल की तुलना में बच्चों का इस्तेमाल तीन गुना बढ़ा दिया है।

जेनेवा। आतंकवादी समूहों के लिए बच्चें हमलावरों के रूप में पहली पसंद बनते जा रहे है। नाइजीरिया के प्रतिबंधित आतंकवादी समूह बोको हराम ने साल 2017 के शुरुआती तीन महीनों में पिछले साल की तुलना में बच्चों का इस्तेमाल तीन गुना बढ़ा दिया है। इस बात का खुलासा यूनीसेफ की एक रिपोर्ट से हुआ है। "साइलेंट शेम: ब्रिंगिंग आउट द वॉइसेज ऑफ द चिल्ड्रन काट इन द लेक चाड क्राइसिस" नामक इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चाड झील के आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय इस्लामी चरमपंथी समूह बोको हराम द्वारा 2016 की पहली तिमाही में नौ बच्चों की संलिप्त्ता पाई गई थी। 2017 की पहली तिमाही यह आंकड़ा 27 तक पहुंच चुकी है।

यूनीसेफ की क्षेत्रीय निदेशक (पश्चिम व मध्य अफ्रीका) मेरी पियरे पॉइरियर ने कहा, इस साल के शुरुआती तीन महीनों में बम हमलों में इस्तेमाल किए गए बच्चों की संख्या लगभग पिछले साल पूरे समय में इस्तेमाल किए गए बच्चों की संख्या के जितना ही है। यह संघर्ष में बच्चों का संभवत सबसे बुरी तरह से इस्तेमाल करने का उदाहरण है।

रिपोर्ट की खास बातें

# 1. कैमरून, चाड, नाइजर और नाइजीरिया जैसे अफ्रीकी देशों के सार्वजनिक जगहों पर बम हमलों के लिए पिछले चार सालों में 117 बच्चों का इस्तेमाल किया गया।
# 2. साल 2014 में चार बच्चों का इस्तेमाल हुआ था।
# 3. साल 2015 बच्चों को हमलावर के रूप में प्रयोग करने का आंकड़ा 56 तक पहुंच गया था।
# 4. साल 2016 में 30 बच्चों का भविष्य इस अंधकार में धकेला गया।
# 5. साल 2017 की पहली तिमाही में 27 बच्चों को आत्मघाती हमलावर के रूप में इस्तेमाल किया जा चुका है।
# 6. इन हमलों को अंजाम देने में ज्यादातर लड़कियों का इस्तेमाल हुआ है।

विद्रोहियों की खतरनाक रणनीति
यूनीसेफ ने कहा है कि बच्चों को आत्मघाती हमलावरों के रूप में प्रयोग करने वाली यह वृद्धि विद्रोहियों की खतरनाक रणनीति को दर्शाती है। इसके परिणामस्वरूप बच्चों को समाज के लिए खतरा माना जाने लगा है। पॉइरियर ने जोर देते हुए कहा, ‘ये बच्चे पीड़ित हैं, अपराधी नहीं।‘

दोनो ओर पीसता बचपन
यूनीसेफ ने इस रिपोर्ट में खुलासा किया कि इस समस्या से बचपन दोनो ओर से पीसता जा रहा है। जो बच्चे किसी तरह बोको हराम के चंगुल से बच कर भाग आते है, वे डर के मारे अपना अनुभव नहीं बताते हैं। जबकि पुलिस कई बच्चों को आतंकवादी समूह के साथ संबंध होने के संदेह में लंबे समय तक हिरासत में रखती है।

यह समाधान सुझाती है रिपोर्ट
रिपोर्ट इन बच्चों को अपराधी नही पीड़ित मानती है। बचपन को बर्बाद करने वाली इस समस्या का समाधान सुझाते हुए रिपोर्ट कहती है कि हिरासत में लिए गए बच्चों को सुरक्षित स्थान, मनोवैज्ञानिक सहायता देने और समाज से उन्हें फिर से जोड़ने के लिए फौरन नागरिक अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।

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