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व्यापारी बोले- इन वस्तुओं पर लगे 28 फीसदी जीएसटी

Updated: IST gst spacial
व्यापारियों का कहना है कि जब तक जीएसटी की विसंगतियां दूर नहीं हो जाती हैं, तब तक स्थगित किया जाना चाहिए।

आगरा। मोदी सरकार एक जुलाई, 2017 से जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) को जोरदार ढंग से लागू करने जा रही है। दूसरी ओर व्यापारी अभी संतुष्ट नहीं हैं। वे जीएसटी में निहित प्रावधानों पर लगातार अंगुली उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जीएसटी की विसंगतियां दूर नहीं हो जाती हैं, तब तक स्थगित किया जाना चाहिए। यह भी सलाह दी है कि किन वस्तुओं पर 28 फीसदी टैक्स लगाया जाए।
कारोबारियों को नम्बर तक नहीं मिले
आगरा मण्डल व्यापार संगठन के संस्थापक गोविन्द अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि एक जुलाई, 2017 से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवा कर से कारोबारियों को राहत नहीं मिलने वाली। इसका मुख्य कारण है अभी तक कारोबारियों का माइग्रेशन का कार्य पूरा तक नहीं हुआ है और ना ही जी.एस.टी. पंजीकरण नम्बर कारोबारियों को आवंटित हुए हैं। देश का बहुत बड़े व्यापारियों के वर्ग को नियम व उपनियमों की जानकारी नहीं हुई है। यहां तक कि सम्बन्धित अधिकारियों, अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउण्टेन्ट भी अभी तक दावे से नहीं कह सकते कि उनको जीएसटी के नियम व उपनियम की जानकारी है।
हड़बड़ी से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा
श्री अग्रवाल ने कहा है कि जीएसटी के कर रेटों में भी समानता नहीं है। लगभग 214 पन्नों की लिस्ट में कई-कई वस्तुएं कई-कई जगह लिखी हैं। कहीं 18 फीसदी तो वही वस्तु कहीं 28 फीसदी पर भी लिखी है। पूरे देश के कारोबारियों व उद्योगपतियों के तमाम प्रत्यावेदन जीएसटी परिषद को भेजे गये हैं, जिसमें कर की जारी हुई लिस्ट की गलतियों को दर्शाया गया है। नियम व उपनियमों की गलतियों को भी दिखाया गया है। हड़बड़ी में जीएसटी लगाने से इन्स्पेक्टर उत्पीड़न करेंगे और भारत का व्यापार लगभग समाप्त हो जायेगा।
शराब पर लगे अधिक टैक्स
श्री अग्रवाल ने कहा है कि 28 फीसदी कर टैक्स को सिर्फ उन वस्तुओं पर लगाया जाना चाहिए जैसे देशी-विदेशी शराब, हर प्रकार के नशे की वस्तुएं, हथियार, सभी लग्जरी सामान। किसानों, मजदूरों, कारीगरों के रोजमर्रा इस्तेमाल में आने वाली सभी वह वस्तुएं चाहे वह बिजली का सामान, दवाइयां, खाने की वस्तुयें, पहनने के कपड़े, 20 लाख तक के आवास, साइकिल, रिक्शा, सस्ती कारें, फ्रिज कूलर, पंखे आदि पर पुनः कर मूल्यों का परीक्षण किया जाना आवश्यक है। देश से प्राप्त हुए प्रत्यावेदनों पर भी गम्भीरता से परीक्षण करना होगा।
बगैर सिले कपड़ों पर कर न लगे
श्री अग्रवाल ने कहा है कि आज देश का सबसे बड़ा मसला बगैर सिले कपड़ों पर कर लगाने का है। जीएसटी परिषद को इस कर को वापस लेना होगा। कपड़ा मिलों पर ही जीएसटी लागू किया जाना चाहिए।
एक सितम्बर से पूर्व न लगाएं
व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल ने बताया कि संगठन ने पूर्व में तमाम मांग पत्र, संशोधन पत्र, जीएसटी परिषद को लिखे है प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री, राजस्व सचिव हसमुख अधिया जी को भी प्रत्यावेदन दिये गये हैं। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) एक सितम्बर से पूर्व न लगाया जाये। प्राथमिकता के आधार पर देश से प्राप्त हुए प्रतिवेदनों पर विचार किया जाना अति आवश्यक है।

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