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'तकनीकि का सही इस्तेमाल कर लीड​रशिप को बनाए बेहतर'

Updated: IST mps group
लीडरशिप एक कला है और इस कला में व्यक्ति के पास विषम परिस्थितियों में सकरात्मक सोच रखते हुए बेहतर प्रदर्शन करने का हुनर होना चाहिए।

आगरा। क्लास खत्म होने के बाद आखिरी स्टूडेंट को क्लास रूम की बिजली और पंखे चलते हुए दिखते हैं और यदि क्लास रूम की बिजली बंद करता है, तो वो देश के लिए अपना योगदान दे रहा है। हर किसी को देश के लिए योगदान देना चाहिए। ये कहना है कि डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अरविंद कुमार दीक्षित का। शुक्रवार को डॉ. एमपीएस ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत हुई। उदघाटन सत्र में कुलपति ने बोलेते हुए छात्रों को आज के दौर में लीडरशिप का महत्व समझाया।

हाथों से बनता था रिजल्ट
कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने कहा कि आज के डिजिटल युग में तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों की जानकारी होना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वो इलाहाबाद में थे, जब रिजल्ट का प्रक्रिया हाथों से पूरी होती थी, आज कंप्यूटर के माध्यम से सारी प्रक्रिया बहुत सरलता से पूरी हो जाती है। लेकिन उन्होंने कहा कि कभी कभी डिजिटल युग में नुकसान भी होते हैंं। हाथों से जब रिजल्ट में कोई बदलाव किया जाता था, तो पहचान में आ जाता था, लेकिन आज एक सीडी के माध्यम से पूरा डेटा ही बदल जाता है। उन्होंने छात्रों को देश के लिए योगदान देने के लिए आगे आने के लिए कहा।

अतिथियों का किया स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन से हुआ। डॉ.एमपीएस ग्रुप की कोचेयरपर्सन नीलम सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। नीलम सिंह ने कहा कि आज सब कुछ डिजिटल हो रहा है। स्मार्ट फोन से लेकर कंप्यूटर, इंटरनेट के माध्यम से हम डिजिटल युग में पहुंच रहे हैं। यहां तक कि अब हम रुपये को डिजिटल रूप में खर्च कर रहे हैं। आईआईएम इंदौर से आए डॉ. के के जैन ने कहा कि भारत में विकासशील से विकसित देशों की श्रेणी में आने की का​बलियत है। डिजिटल युग में आई आंधी के बारे में उन्होंने चर्चा करते हुए कहा कि भातर के युवा, यहां तक की जनता भी आज आॅनलाइन और डिजिटल पद्धति को अपना रही है। लीडरशिप एक कला है और इस कला में व्यक्ति के पास विषम परिस्थितियों में सकरात्मक सोच रखते हुए बेहतर प्रदर्शन करने का हुनर होना चाहिए।

उपकरणों से घिरे
डॉ.एमपीएस ग्रुप के चेयरपर्सन स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह ने चर्चा को बढ़ाते हुए कहा कि सिर्फ तकनीकि उपकरणों और डिजिटल संसाधनों से घिरे रहना ही लीडरशिप नहीं है। डिजिटलाइजेशन हमारी सोच में होना चाहिए। आजकल सभी हर वक्त आधुनिक मोबाइल, टेबलेट, लैपटॉप आदि उपकरणों से घिरे रहते हैं। ज्यादातर वक्त सोशल मीडिया पर बिताते हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि हम तकनीकि के गुलाम होते जा रहे हैं। हमें तकनीकि का सही इस्तेमाल करते हुए ली​डरशिप को बेहतर करने की आवश्यकता है।

ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में निदेश डॉ.राजीव रतन, चीफ एडवाइजर कर्नल सीके सिंह, डीन डॉ.एके गोयल, प्राचार्य डॉ.उदित जैन, चाल्र्स क्लेरेंस के साथ सभी स्टॉफ मौजूद रहा।

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