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Video Icon खाकी पहनी तो करवाचौथ का रंग भी बदला, ताकि आपका त्यौहार न रहे फीका

Updated: IST  Karva Chauth
हम ये त्यौहारों, मान्यताओं से इतर हकीकत का वो पहलू आपके सामने ला रहे हैं जिससे साफ हो जाता है कि इस देश में महिलाओं को क्यों देवी का दर्जा दिया गया है।

अमित शर्मा

आगरा। करवाचौथ पर पत्नियां पति की लंबी आयु के लिए निर्जला वृत रखती हैं। कई दिनों पहले से ही इस त्यौहार के लिए महिलाएं शॉपिंग शुरू कर देती हैं हाथों में मेहंदी रखवाती हैं। ये सब बातें हम और आप जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ महिलाएं समय से न हाथों में मेहंदी रखवा पाती हैं न शॉपिंग कर पाती हैं लेकिन वह भी पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ का वृत जरूर रखती हैं।

Manisha Singh CO

यहां छुट्टी नहीं होती बल्कि ड्यूटी बढ़ जाती है

हम उन महिलाओं की बात कर रहे हैं, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। ये ऐसा विभाग है जिसमें कोई छुट्टी नहीं होती बल्कि त्यौहारों पर ड्यूटी और बढ़ जाती है। ऐसी ही एक पुलिस अधिकारी मनीषा सिंह हैं, जो हाथरस में सीओ सिटी के पद पर तैनात हैं। मनीषा सिंह की शादी 7 जुलाई 2002 में हुई। उनके पति संग्राम मोहन सिंह का गाजियाबाद में व्यापार है। कामकाजी महिलाओं खासतौर पर पुलिस विभाग की महिलाओं की करवाचौथ अन्य़ महिलाओं से कैसे अलग होती है ये जानने की कोशिश की मनीषा सिंह से ।

Manisha Singh

कानून व्यवस्था संभालना ही सबसे बड़ा 'वृत'

वैसे तो हर साल मनीषा सिंह भी करवाचौथ विधि विधान के साथ मनाती हैं। लेकिन पुलिस विभाग में होने के कारण उनकी करवाचौथ या यूं कहिए कि ज्यादातर त्यौहार अन्य महिलाओं से अलग होते हैं। मनीषा सिंह कहती हैं पुलिस विभाग में होने के कारण उनके लिए सबसे बड़ा 'वृत' चौबीस घंटे कानून व्यवस्था संभालना है। इसी कारण करवाचौथ के दिन छुट्टी तो दूर कई बार तो शाम को भी समय से घर नहीं पहुंच पाईं।

Manisha Singh

पूजा की थाली छोड़ हाथ में थामनी पड़ी रिवॉल्वर

मनीषा सिंह एक पुराना वाकया याद करते हुए बताती हैं कि साल 2013 में वह मेरठ में सीओ कोतवाली के तौर पर तैनात थीं। उन्होंने अपने कप्तान से शाम को सात बजे घर निकल जाने के लिए पहले से ही अनुमति ले ली थी। वह घर पर पहुंच कर पूजा की तैयारी भी करने लगीं लेकिन तभी उनकी सर्किल में कोई विवाद हो गया। ऐसे में उन्हें तुरंत सभी तैयारियों को वहीं छोड़ते हुए वर्दी पहन दोबारा ड्यूटी पर जाना पड़ा।

हम ये त्यौहारों, मान्यताओं से इतर हकीकत का वो पहलू आपके सामने ला रहे हैं जिससे साफ हो जाता है कि इस देश में महिलाओं को क्यों देवी का दर्जा दिया गया है। वह घर में रह कर वृत रखती हैं तो भी आपके जीवन को बचाने के लिए वहीं पुलिस और फौज जैसे फोर्स में शामिल होकर घर से बाहर रह भी कइयों का जीवन बचा रही होती हैं।

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