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Breaking भाजपा जिलाध्यक्षों के लिए ये नया फरमान जिताएगा चुनाव

Updated: IST bjp
भाजपा ने उत्तर प्रदेश चुनाव 2017 के दृष्टिगत एक नया फरमान जारी किया है। इससे जिलाध्य़क्षों का सपना टूट सकता है।

आगरा। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश चुनाव 2017 के दृष्टिगत एक नया फरमान जारी किया है। इस आदेश के बाद विधानसभा टिकट के दावेदार मुश्किल में हैं। इसके साथ ही दूसरों के बल पर अध्यक्षी चलाने वालों का सपना टूट गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्य़क्ष अमित शाह और प्रदेश अध्य़क्ष केशव प्रसाद मौर्य इस मामले में काफी सख्ती बरत रहे हैं।

टिकट नहीं मांगेंगे जिलाध्यक्ष
भाजपा ने दो निर्देश किए हैं- जिलाध्यक्ष टिकट नहीं मांगेंगे। आमतौर पर यह देखा जाता है कि कोई कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष बनता है, तो वह विधानसभा टिकट का दावा करने लगता है। पार्टी में जिलाध्य़क्ष सबसे ताकतवर व्यक्ति होता है। इसी ताकत का फायदा उठाकर वे टिकट मांगते हैं। अन्य कार्यकर्ताओं से अपने लिए संस्तुति भी करवा लेते है। इसके साथ ही टिकट के अन्य दावेदारों को उलझा लेते हैं। उनका पक्ष कमजोर कर देते हैं।

संगठन का काम ध्वस्त
यह भी देखने में आया है कि जिलाध्य़क्ष पूर जिले में काम न करके उस विधानसभा क्षेत्र में अधिक समय देते हैं, जहां से वे चुनाव लड़ने का सपना देख रहे होते हैं। उसी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को तरजीह देते हैं। इससे अन्य विधानसभा क्षेत्र उपेक्षित हो जाते है। संगठन का काम ध्वस्त हो जाता है। जिलाध्यक्षों से यह भी कहा गया है कि टिकट के दावेदारों का समर्थन या विरोध न करें। पार्टी अपने स्तर पर टिकट का फैसला करेगी।

मंडल अध्यक्षों के लिए निर्देश
इसके साथ ही पार्टी ने मंडल अध्य़क्षों को विशेष निर्देश दिए हैं। मंडल अध्य़क्षों से कहा गया है कि वे टिकट के किसी भी दावेदार की कार में नहीं बैठेंगे। मंडल अध्य़क्षों की पार्टी में बड़ी भूमिका है। मंडल अध्य़क्षों की संस्तुति टिकट आदि में भी मदद करती है। इस कारण टिकट के दावेदार मंडल अध्य़क्षों को अपने साथ लेना चाहते हैं। उन्हें अपने वाहन में बैठाकर लखनऊ और दिल्ली ले जाते हैं। वहां होटल में रुकवाते हैं। इससे मंडल अध्य़क्ष दावेदारों के समर्थक या विरोधी हो जाते हैं। कायदे से मंडल अध्यक्ष संगठन के कार्यकर्ता हैं, न कि टिकट के दावेदारों के समर्थक या विरोधी।

जिलाध्य़क्ष को ये करना चाहिए
भाजपा के जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया ने पूछे जाने पर कहा कि जिलाध्य़क्ष हो या मंडल अध्य़क्ष, सबको संगठन का काम करना है। अगर जिलाध्य़क्ष दूसरे की गाड़ी में चलेगा, तो संगठन का काम नहीं कर पाएगा। कोई जिलाध्य़क्ष बना है, तो उसे स्वयं के संसाधनों का उपयोग करना चाहिए, न कि टिकट के दावेदारों का।

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