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गवर्नर साहब, ये रेजगारी आपको ही मुबारक, हमें तो नोट दीजिए

Updated: IST close to coins of market
10 रुपये के सिक्के व्यापारियों के लिए आफत बन गए हैं। रेजगारी से छुटकारा दिलाने की गुहार व्यापारी लगा रहे हैं

आगरा। नोटबंदी के बाद व्यापारियों के सामने नई समस्या पैदा हो गया है। यह समस्या है रेजगारी की। 10 रुपये के सिक्के व्यापारियों के लिए आफत बन गए हैं। रेजगारी से छुटकारा दिलाने की गुहार व्यापारी लगा रहे हैं। उनकी मांग है कि 10 रुपये के सिक्कों के स्थान पर नोट दिए जाएं, ताकि अतिरिक्त भार से मुक्ति मिल सके।

10 रुपये के सिक्के दिए गए
नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष और लोकस्वर के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर ऊर्जित पटेल को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा 8 नवम्बर, 2016 की रात्रि को 500 और 1000 के नोटबंदी का ऐलान किया गया। यह कहा गया कि अपनी रकम को आप बैंक से बदलवा लें। साथ ही अगर अपने खाते से रकम निकालते हैं, तो उसकी भी एक सीमा निश्चित की गई। सरकार के इस फैसले का समस्त भारतवासियों ने सम्मान किया व पूर्ण सहयोग दिया। बैंकों ने रुपये की वापसी उस अनुपात में नहीं की, जिस अनुपात में पैसा जमा हुआ था। उस कमी को भी समस्त जनता ने स्वीकार किया। जो पैसा जनता को बदलकर मिला या खाते से निकाला, उस पैसे के बदले जनता को बहुतायत मात्रा में रु10. की रेजगारी प्रदान की गयी, जो कि बड़ी समस्या है।

हो रहे झगड़े
पत्र में कहा गया है कि 10 रुपये के सिक्के समस्त नागरिकों के लिये भी एक बहुत बड़ी परेशानी का कारण बन गए हैं। आज व्यापार में जो मंदी का दौर चल रहा है, उसमें यह रेजगारी और परेशानी बढ़ा रही है।आज हर व्यक्ति सर्वप्रथम अपने पास की रु.10 की रेजगारी को खर्च करने के लिये आतुर है,जिसके फलस्वरूप रेजगारी आपसी लेन देन में झगड़े का कारण बनती जा रही है। अधिक मात्रा में रेजगारी रखने से उसकी क्रय-शक्ति भी कमज़ोर हो रही है, इसका असर उद्योग-धन्धों के साथ-साथ आपसी सम्बन्धों पर भी पड़ रहा है।

रेजगारी नहीं, रुपये दें
मांग की गई है कि समस्त बैंकों को निर्देशित करें कि वो जब तक खाताधारक न मांगें, उन्हें रु.10 की रेजगारी न दें। बैंक उस रेजगारी को जमा करके उसके बदले रु.10, 20, 50,100 के नोट में मुद्रा प्रदान करें। आज अधिक मात्रा में रेजगारी को लाने व ले जाने में कितनी असुविधा होती है। राजीव गुप्ता ने पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजी गई है।

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