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वजन नहीं बढऩे दें, नियमित कसरत करें

Updated: IST ahmedabad
लीवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह हमारे शरीर की कार्य प्रणाली में अहम भूमिका निभाता है। यह

अहमदाबाद।लीवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह हमारे शरीर की कार्य प्रणाली में अहम भूमिका निभाता है। यह कई महत्वपूर्ण कार्य करता है। इसके बिना जीवन असंभव है। फुटबॉल के आकार का करीब एक किलोग्राम वजन का यह अंग उदर में दाई तरफ व निचली पसली के पीछे होता है। लीवर रोग से बचाव के लिए रक्त, प्लाज्मा व अन्य रक्त अवयवों से दूर रहना चाहिए और जब अत्यावश्यक हो तभी चढ़वाना चाहिए। लोगों को अपना वजन न बढऩे देना चाहिए और नियमित कसरत करना चाहिए। मधुमेह से पीडि़त होने पर उसका सही इलाज करवाना चाहिए।

स्थानीय अपोलो हॉस्पिटल के लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रवण बोहरा के अनुसार लीवर हमारे भोजन को जीवन वृद्धि के लिए आवश्यक रासायनिक पदार्थों में बदलता है। शरीर को आवश्यकता पडऩे पर यह जल्दी ही ऊर्जा प्रदान करता है। शरीर के लिए आवश्यक नए प्रोटीन बनाने में सहायक है। लीवर में विटामिन, खनिज, शर्करा का भंडार होता है। भोजन के पाचन में सहायक पित्त का उत्पादन लीवर में होता है। लीवर में होने वाली बीमारियों में वायरल हिपेटाइटिस, शराब सेवन से होने वाले लीवर रोग, सिरोसिस ऑफ लीवर, लीवर में संक्रमण व मवाद, पोषण की कमी से संबंधित लीवर रोग, लीवर कैंसर अर्थात हिपेटाइटिस 'बीÓ व हिपेटाइटिस 'सीÓ वायरस की उपस्थिति लीवर कैंसर होने के खतरे को कई गुना बढ़ाती है। पित्ताशय की पथरी व बच्चों में होने वाले लीवर रोग प्रमुख हैं। लीवर रोग के शारीरिक लक्षण व चिन्हों में त्वचा और आंखों का रंग पीला होना अर्थात पीलिया होना, मूत्र का रंग भी पीला होना, उल्टी व घबराहट होना, भूख कम लगना, खून की उल्टी होना व मल में खून आना, पेट में सूजन अर्थात पेट में पानी भरना, त्वचा पर खुजली होना आदि शामिल हैं।

लीवर रोग से ऐसे बचें

डॉ. बोहरा के अनुसार अच्छे, स्वच्छ खान-पान व पानी का ही सेवन करना चाहिए। गंदे पानी से वायरल हिपेटाइटिस होने की संभावना रहती है। पुरानी, बासी मंूगफली का सेवन नहीं करना चाहिए। हिपेटाइटिस 'बीÓ का टीका लगवाना चाहिए। शराब व नशीले पेय पदार्थों के उपयोग में कमी करनी चाहिए। अनावश्यक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। हानिकारक रासायनिक पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। पित्त की नली में पथरी या सिकुडऩ होने पर उसका तुरंत इलाज करवाना चाहिए। इनमें से कोई भी लक्षण व चिन्ह दिखने पर लीवर रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए। पारिवारिक लीवर रोग होने पर परिवार के अन्य सदस्यों के लीवर की भी जांच करवानी चाहिए। बेहद रोगग्रस्त लीवर को सर्जरी से हटाकर अब नया लीवर प्रत्यारोपण करके रोगी को नई जिंदगी देना संभव है।

फैटी व लीवर की सूजन खतरनाक : फैटी लीवर व लीवर में सूजन काफी खतरनाक साबित हो सकती है। युवा पीढ़ी में यह महामारी के तौर पर फैल रही है। बेहद आराम की जीवनशैली वाले मोटे युवकों के साथ ही मधुमेह के पीडि़त भी इससे ग्रस्त होते हैं। लीवर की सूजन ही आगे चलकर लीवर सिरोसिस का ला-ईलाज बीमारी और मौत का कारण बन सकती है। रक्त में एजीपीटी की रिपोर्ट अधिक आती है और लीवर की सोनोग्राफी में ग्रेड-2 या ग्रेड-3 फैटी लीवर है तो लीवर रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। फाइब्रोस्केन से प्रारंभिक अवस्था में ही लीवर रोग का पता लगाना संभव है।

पांच दिन के शिशु का भी लीवर प्रत्यारोपण संभव : डॉ. देसाई

स्थानीय अपोलो हॉस्पिटल के लीवर सर्जन डॉ. चिराग देसाई के अनुसार अब नवजात शिशुओं का लीवर प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया जाने लगा है। सिर्फ पांच दिन के शिशु का लीवर प्रत्यारोपण भी किया जा चुका है। लीवर प्रत्यारोपण एक प्रकार का उपचार है, इसके लिए मरीजों का उचित चयन आवश्यक है। तीव्र (एक्यूट) व पुराना (क्रानिक) लीवर फेलियर होने के कई कारण हैं।

डॉ. देसाई के अनुसार करीब 50 प्रतिशत बच्चों का लीवर प्रत्यारोपण पीलिया रोग के कारण पैत्तिक (बिल्यरी) एट्रैसिया, खुजली व लीवर फेलियर के चलते करना पड़ता है। अन्य कारणों में वायरल हिपेटाइटिस, दवा के दुष्प्रभाव और मेटाबोलिक डिसॉर्डर भी शामिल हैं। लीवर प्रत्यारोपण के बाद इन खामियों को नए लीवर से दूर करना संभव है। शिशुओं को सामान्यतया 55 वर्ष के पारिवारिक सदस्य रक्त घट (ब्लड ग्रुप) मिलान के बाद ही लीवर दान कर सकते हैं। लीवर का केवल कुछ हिस्सा ही दाता से लिया जाता है। लीवर प्रत्यारोपण के सामान्यतया 10 से 20 दिन बाद शिशु व सात दिन बाद दाता को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।

मोटापा व मधुमेह है खतरनाक : डॉ. टांक

शैल्बी हॉस्पिटल के लीवर सर्जन डॉ. अविनाश टांक के अनुसार लीवर में सूजन के लिए मोटापा व टाइप-2 मधुमेह सबसे खतरनाक है। करीब 40 से 80 प्रतिशत लोग टाइप-2 मधुमेह व 30 से 90 प्रतिशत लोग मोटापे के शिकार हैं। फैटी लीवर व लीवर में सूजन शांत रोग है और सामान्यतया इनके कोई लक्षण नहीं होते। लीवर में सूजन के कारण सिरोसिस होने के भी सामान्यतया कोई लक्षण नहीं दिखते। थकान और पेट के ऊपरी भाग में परेशानी इसके लक्षण में शामिल हैं। वजन कम करने, खान-पान संयमित करने से फैटी लीवर व लीवर में सूजन से बचना संभव है।

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