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जीएसटी पर असमंजस के घने बादल नहीं छंटे

Updated: IST ahmedabad
एक देश एक टैक्स के स्लोगन के साथ जीएसटी को लागू हुए 12 दिन होने को आए, लेकिन इस कर प्रणाली

एक देश एक टैक्स के स्लोगन के साथ जीएसटी को लागू हुए 12 दिन होने को आए, लेकिन इस कर प्रणाली को लेकर असमंजस, उलझन और बदहवासी का आलम बरकरार है। जीएसटी के बाद कंपनियों के लिए हर उत्पाद पर कोडिंग बड़ा सरदर्द बना हुआ है तो बड़े व्यापारिक संस्थान अभी तक अपने सॉफ्टवेयर को पक्के बिलों के लिए अप-डेट नहीं कर पाए हैं। जीएसटी लागू करते समय कहा गया था कि अब किराना दुकानों तक पर बगैर बिल कोई सामान नहीं बिकेगा, लेकिन हकीकत यह है कि सूरत में अभी तक कई जगह सामान धड़ल्ले से बगैर बिल बेचा जा रहा है।

व्यापारी उलझन में हैं कि बैक डेट का बिल काटा जाए, कच्चे बिल से काम चलाया जाए या फिलहाल कुछ दिन और बिल सिस्टम से दूर रहा जाए। जो बिल दे रहे हैं, वह इस जानकारी को गोल कर रहे हैं कि किस सामान पर कितना जीएसटी वसूला गया है। आम जनता को समझ में नहीं आ रहा है कि जीएसटी में क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा। वह अधिकारी भी असमंजस के कोहरे में घिरे हुए हैं, जिन पर जीएसटी पर अमल और निगरानी की जिम्मेदारी है। जाहिर है कि इस नई कर प्रणाली के लिए हर मोर्चे पर जो तैयारी पहले से की जानी चाहिए थी, नहीं की गई। नतीजतन घरों और दफ्तरों से बाजार तक जीएसटी फिलहाल ऐसी पहेली बना हुआ है, जो समझ में कम आती है, परेशान ज्यादा करती है।

टिकट कैंसिल कराने पर भी 5 फीसदी जीएसटी

अहमदाबाद/ सूरत. जीएसटी लागू होने के बाद ट्रेनों में उच्च श्रेणी के किराए में 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। टिकट रद्द करवाने पर प्रति टिकट पांच से दस रुपए अधिक कटौती की जा रही है। इसके अलावा रेलवे ने प्वॉइंट टू प्वॉइंट चार्ज वसूलना भी शुरू किया है। सूरत आरक्षण केन्द्र में रिजर्व टिकट रद्द करवाने वाले यात्रियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। द्वितीय श्रेणी शयनयान (स्लीपर) का टिकट रद्द करवाने पर अब कैंसिलेशन शुल्क के अलावा पांच फीसदी जीएसटी भी काटा जा रहा है। एक जुलाई से पहले हर टिकट पर 4.5 फीसदी सर्विस टैक्स रहता था। कैंसिलेशन पर यह टैक्स वापस कर दिया जाता था, लेकिन अब सर्विस टैक्स की जगह स्लीपर टिकट पर 4.5 फीसदी और एसी के टिकट पर पांच फीसदी जीएसटी लग रहा है।

मोबाइल रिचार्ज करने वाले एजेंट परेशान

सूरत. जीएसटी की पूरी जानकारी नहीं होने और रजिस्ट्रेशन नहीं लिए जाने के कारण कई व्यापारियों का कामकाज अटक ग या है। मोबाइल रिचार्ज करने वालों की भी यही हालत है। मोबाइल रिचार्ज करने के लिए संबंधित कंपनी के डीलरों से बैलेंस करवाना पड़ता है। एक जुलाई से सूरत में कई जगह यह काम बंद है। प्री-पेड मोबाइल कनेक्शन धारकों को परेशान होना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि वह बैलेंस करने के लिए मोबाइल कंपनी के डीलर्स को कहते हैं, लेकिन वह जीएसटी के नए नियमों के कारण रिचार्ज नहीं कर पा रहे हैं। कुछ डीलर्स के पास जीएसटी का रजिस्ट्रेशन नहीं है और कुछ नियमों को नहीं समझ पाए हैं, इसलिए उन्होंने बैलेंस करना बंद कर दिया है।

मेडिकल स्टोर में कई दवाएं नहीं

जीएसटी के कारण कंपनी से होलसेलर के पास स्टॉक नहीं आने के कारण कई मेडिकल स्टोर में दवाइयां समाप्त हो गई हैं। नया स्टॉक नहीं आने से मरीजों के साथ-साथ मेडिकल स्टोर संचालक भी परेशान हैं। संचालकों का कहना है कि कई दवाओं के दाम बदल गए हैं, इसलिए भी कंपनियों को दिक्कत आ रही है। कई होलसेलर्स के जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लेने से वह खरीद-बिक्री कम कर रहे हैं। कई विक्रेता जीएसटी के नए नियमों से अनजान हैं। वह भी कम सौदे कर रहे हैं। इससे दवाएं बाजार तक नहीं पहुंच रही हैं। जीएसटी लागू होने के एक महीने पहले से दवाओं का टोटा शुरू हो गया था। साउथ गुजरात मेडिकल एसोसिएशन के प्रवीण वेकरिया ने बताया कि वैट और जीएसटी के स्लैब अलग-अलग होने से दवाओं की कीमत बदली है। कंपनियां अब नए दाम से दवाएं भेजेंगी। दवाओं पर अंकित मूल्य भी बदलना पड़ रहा है।

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