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एक बाल-एक पौधा मंत्र के साथ ग्रीन व क्लीन गुजरात पर जोर

Updated: IST ahmedabad
मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने एक बाल-एक पौधे का संकल्प पूरा करने की लोगों से अपील करते हुए कहा कि

हिम्मतनगर। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने एक बाल-एक पौधे का संकल्प पूरा करने की लोगों से अपील करते हुए कहा कि गुजरात में राज्य सरकार इस वर्ष 10 करोड़ पौधे रोपने का संकल्प साकार करेगी। वे साबरकांठा जिले की विजयनगर तहसील के पाल दढवाव गांव में रविवार को राज्य के 17वें वन 'वीरांजलि वनÓ का लोकार्पण करने के साथ ही राज्यव्यापी 68वें वन महोत्सव का उद्घाटन करने के बाद उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने वृक्षों व वनों से ग्लोबल वार्मिंग के निराकरण व क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार की ओर से जनजागृति लाने की विस्तृत भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि सौर पवन, पानी सरीखे प्राकृतिक अनुसंधानों का उपयोग करके व वृक्षाच्छादित क्षेत्र बढ़ाकर पर्यावरण की रक्षा की जानी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यालयों में सौर ऊर्जा के उपयोग को व्यापक बनाने की दिशा में राज्य सरकार आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच वर्ष में पांच करोड़ गैस कनेक्शन देने का संकल्प किया है, इसके तहत रुपाणी ने आदिवासी महिलाओं को गैस किट व गैस कनेक्शन पत्र वितरित किए। उन्होंने एक बाल-एक पौधा व गैस किट से ग्रीन गुजरात-क्लीन गुजरात के नारे के साथ राज्य को हरियाला बनाने में जनसहयोग जरूरी बताते हुए कहा कि इससे ग्रीन गुजरात के संकल्प के साथ पर्यावरण की रक्षा भी होगी।

गरीबों, वंचितों, शोषितों व पीडितों की सरकार

मुख्यमंत्री ने गुजरात सरकार को गरीबों, वंचितों, शोषितों व पीडि़तों की सरकार बताते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्र की शालाओं में शिक्षकों की कमी पूरी करने के साथ सात मेडिकल कॉलेज को सरकार ने मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि यात्रियों के लिए पाल एक पर्यटन का केंद्र बनेगा और राज्य सरकार इस वर्ष 10 करोड़ पौधे रोपेगी। मुख्यमंत्री ने साबरकांठा जिले के सुदूरवर्ती आदिजाति गांवों में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए चार करोड़ 41 लाख की लागत वाले 10 उप स्वास्थ्य केंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन किया।

इसके साथ ही राज्य में वन विभाग में नवनियुक्त 1480 वनकर्मियों व बीट गार्ड को नियुक्ति पत्र वितरित किए और वन विभाग की ओर से प्रकाशित क्लाइमेट चेंज व पाल दढवाव अंतर्गत पुस्तक का विमोचन भी किया। इसके अलावा वनवासी शहीदों की स्मृति में निर्मित शहीद वन का अवलोकन करके श्रद्धांजलि अर्पित की।

10 वर्ष में वृक्षों की 20 प्रतिशत वृद्धि

वन मंत्री गणपत वसावा ने अपनी संस्कृति को वृक्ष में भगवान के दर्शन की संस्कृति बताते हुए कहा कि वनवासी क्षेत्र में वन महोत्सव के महत्व के चलते लोक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से वन महोत्सव का आयोजन राज्य के जिलों में शुरू किया है। राज्य मेंं पिछले 10 वर्षों में वृक्षों की संख्या में 20 प्रतिशत वृद्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, देखभाल व संवद्र्धन के लिए कटिबद्ध है। वन राज्यमंत्री शब्दशरण तडवी ने स्वागत भाषण दिया। विधानसभाध्यक्ष रमणलाल वोरा, आदिजाति विकास निगम की अध्यक्षा रमीला बारा, जिला प्रभारी व परिवहन राज्यमंत्री वल्लभ काकडिया, विधायक राजेंद्रसिंह चावड़ा, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद अग्रवाल, जिला कलक्टर पी. स्वरूप, जिला विकास अधिकारी हर्ष व्यास भी मौजूद थे।

ऐसा है वीरांजलि वन

सामाजिक वनीकरण के उप वन संरक्षक जी.ए. ब्रह्मभट्ट ने कहा कि पाल दढवाव गांव में गोचर की 4.6 हेक्टर व समीप की हाथमती नदी किनारे की 1.2 हेक्टर सहित कुल 5.8 हेक्टर जमीन पर वीरांजलि वन तैयार किया गया है। इसमें से 4.6 हेक्टर जमीन पर 4 हजार पौधे, 74 हजार छोटे पौधे, 12 सौ डेकोरेटिव प्लान्ट सहित एक लाख तीन हजार 700 पौधे और 1.2 हेक्टर जमीन पर सात हजार 600 सहित 5.8 हेक्टर जमीन पर कुल एक लाख 8 हजार पौधे-वृक्ष रोपे हैं।

वीरांजलि वन के प्रवेश द्वार के समीप बाहर की ओर 225 वर्ष पुराना वृक्ष यहां की विरासत का साक्षी है, यह वृक्ष राज्य के 50 हेरिटेज वृक्षों में से एक है। वीरांजलि वन के अंदर निसर्ग दर्शन के लिए कडाया-तरू सुंदरी वृक्ष के आस-पास लोहे की रेलिंग की व्यवस्था की है।

प्रवेश द्वार पर पाल दढवाव गांव की पहचान के समान रजवाड़ी दरवाजा तैयार किया है, अंदर प्रकृति पूजन की पाल व भील क्रांति के प्रणेता मोतीलाल तेजावत की आदमकद प्रतिमा यहां की सांस्कृतिक गरीमा की प्रतीक है। इसके अलावा झूलता वन सेतु, वॉटर बर्ड्स के साथ फव्वारे, बांस की कमान, राज्य प्राणी सिंह की प्रतिमा, प्रकृति दर्शन समी मशाल, क्रांति स्तंभ, बाल क्रीडांगन, औषध वन, एम्पी थियेटर, वन चबूतरा आदि भी निर्मित किया गया है।

इसके साथ ही यहां राशि वन, नक्षत्र वन, नवग्रह वन, देव वन, जैविक वन, आजीविका वन, स्मृति वन, बांस की बुवाई, औषध नर्सरी, आकर्षक बगीचा भी निर्मित किया गया है। इनके साथ ही शहीद स्मृति वन भी यहां राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का पे्ररक बनकर खड़ा है।

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