Patrika Hindi News

रेल पटरी बिछाने में पहली बार तकनीक का तड़का

Updated: IST ahmedabad
रेलवे में आमतौर पर पटरियां बिछाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

अहमदाबाद।रेलवे में आमतौर पर पटरियां बिछाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में चाहे पटरियां बिछानी हो या फिर स्लीपर बिछाना। इन कार्यों में पहली बार न्यू ट्रेक कंस्ट्रक्शन (एनटीसी) मशीन का इस्तेमाल किया जा है।

आमतौर पर विदेशों में ऐसी मशीन का इस्तेमाल होता है। इस मशीन के जरिए स्लीपर और पटरियों को ऑटोमेटिक तरीके से बिछाया जा सकता है। पटरियों के टर्नआउट खास तरीके के डिजाइन किए जा रहे हैं, जिससे ट्रेनों की गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जो मौजूदा समय में 45 किलोमीटर प्रति घंटा से 10 किलोमीटर प्रति घंटा अधिक है। इसके जरिए गुड्स ट्रेन की रफ्तार धीमी नहीं होगी।

इस मशीन के जरिए रोजाना ढाई से तीन किलोमीटर तक ट्रेक बिछाया जाता है। दादरी (दिल्ली) से लेकर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) तक बनने वाले पश्चिमी गलियारे में रेवाड़ी से इकबालगढ़ तक सौ किलोमीटर का ट्रेक बिछाया जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है जून वर्ष 2020 तक पश्चिमी गलियारे पर गुड्ज ट्रेनें दौडऩे लगेंगी।

एक अधिकारी ने बताया कि पटरियां बिछाने में पहली बार एनटीसी मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। इसके जरिए स्लीपर और पटरियों को बिछाने में गति आई है। इस कॉरिडोर में कोई भी समपार फाटक (एलसी) गेट नहीं होगा। इसके चलते रोड ऑवरब्रिज और रोड अंडरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है तो अर्थवर्क (भू-कार्य) किया जा रहा है। ट्रेक निर्माण कार्य के बाद विद्युतीकरण कार्य होगा।

दो किलोमीटर पर होंगे सिग्नल

डीएफसी में ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। दो किलोमीटर के अंतराल में सिग्नल होंगे तो चालीस किलोमीटर पर स्टेशन होगा। मौजूदा समय में भारतीय रेलवे में गुड्ज ट्रेन 650 मीटर लम्बी होती है, डीएफसी में गुड्ज ट्रेन की लम्बाई डेढ़ किलोमीटर होगी। इसके जरिए दोगुना से ज्यादा माल की ढुलाई हो सकेगी। मौजूदा समय में गुडज ट्रेन में 5300 मीट्रिक टन की ढुलाई होती है, लेकिन डीएफसी में दस हजार मीट्रिक टन की ढुलाई हो सकेगी।

ट्रेन पर होंगे ट्रक

डीएफसी में रो-रो सेवा भी शुरू की जाएगी। इसके जरिए गुड्ज ट्रेनों पर ट्रक रखे जाएंगे, जिनको एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकेगा। यह कॉरिडोर विद्युतीकृत होने से न सिर्फ डीजल की बचत होगी बल्कि पर्यावरण का स्तर सुधरेगा। (कासं)

सुरक्षा चेतावनी प्रणाली लगेगी

इस कॉरिडोर पर दौडऩे वाली गुड्ज ट्रेनों में सुरक्षा चेतावनी प्रणाली (प्रॉटेक्शन वॉर्निंग सिस्टम) लगेगी। ऐसे में यदि लोको पायलट सिग्नल क्रॉस करेगा तो न सिर्फ सिग्नल से पहले ही उसे सिस्टम वार्निंग दे देगा, बल्कि लोको पायलट सिग्नल क्रॉस कर लेता है तो ट्रेन खुद ही रुक जाएगी। सभी गुड्ज ट्रेनें औसतन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। जबकि अभी में यह गति 25 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा है।

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें ! - BharatMatrimony
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???