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जैन मुनि रत्नसुंदर सुरीश्वर को पद्मभूषण

Updated: IST ahmedabad
मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने गुरुवार को यहां मकतमपुर के दिव्य जीवन संघ हॉल में जैन मुनि रत्नसुंदर सुरीश्वर

भरुच।मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने गुरुवार को यहां मकतमपुर के दिव्य जीवन संघ हॉल में जैन मुनि रत्नसुंदर सुरीश्वर महाराज को पद्मभूषण अवार्ड देकर सम्मानित किया। जैनाचार्य के संयम जीवन के 50 साल पूरे हो गए हैं।

गुरुवार का दिन जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और उत्साह वाला रहा। जैन मुनि रत्नसुंदरसूरीश्वर महाराज को पदम् भूषण अवार्ड से 26 जनवरी को ही सम्मानित किया जाना था, लेकिन किसी कारण से जैनाचार्य द्वारा अवार्ड लेने के लिए नई दिल्ली नहीं पहुंचने से उन्हें यह अवार्ड भरुच में गुरुवार को दिया गया। मुख्यमंंत्री के साथ गृह राज्यमंत्री, भरुच के प्रभारी मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा, सहकारिता राज्यमंत्री ईश्वर पटेल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री और जैनाचार्य को बैंड-बाजे की धुन के बीच मंच पर लाया गया।

सज्जनों का संगठित होना जरूरी : रत्नसुंदर सुरीश्वर

जैन मुनि रत्नसुंदर सुरीश्वर ने गुरुवार को पद्म विभूषण पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा कि सज्जनों का संगठित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लड्डू का दाना चिपका रहता है और अनार का दाना अनार को छीलने पर बाहर निकल जाता है। आज माहौल बहुत बिगड़ा हुआ है। बालक शिक्षा देने वाले गुरुओं का उपनाम रखने लगे हैं, जो सही नहीं है। हमारी नींव मजबूत होनी चाहिए।

अहिंसा परमो धर्म: को पूरी दुनिया ने अपनाया : सीएम

समारोह में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने क हा कि अहिंसा परमो धर्म: के सिद्धांत को आज पूरी दुनिया अपना रही है। भगवान महावीर द्वारा बताए गए मार्ग पर चल कर ही देश, प्रदेश और दुनिया का कल्याण हो सकता है । मुख्यमंत्री ने कहा कि रत्नसुंदर सूरीश्वर महाराज ने मात्र 18 साल की उम्र में दीक्षा ली और नित्य परिश्रम कर नई पीढ़ी के लिए तारणहार तथा प्रेरणामूर्ति बने हैं। उन्होंने 312 पुस्तकें लिखकर समाज को साहित्य का उपहार दिया है।

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