Patrika Hindi News

> > > > Notbandi central bank and central government on notice

नोटबंदी पर रिजर्व बैंक व केन्द्र सरकार को नोटिस

Updated: IST Notbandi
नोटबंदी के खिलाफ किसानों की ओर से एक और मामला गुजरात उच्च न्यायालय पहुंचा है।मुख्य न्यायाधीश

अहमदाबाद।नोटबंदी के खिलाफ किसानों की ओर से एक और मामला गुजरात उच्च न्यायालय पहुंचा है।मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी.एम.पंचोली की खंडपीठ ने बुधवार को किसानों के एक संगठन-गुजरात खेड़ूत हितरक्षक समिति की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को नोटिस जारी किया है।

याचिका के अनुसार जब किसी का पैसा बैंक में रखा है तो उसे निकालने की सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती। कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। केन्द्र सरकार का यह कदम गैरकानूनी है। इससे किसानों को काफी ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि अधिकांश किसानों के पास न तो बैंक खाता और ना ही क्रेडिट व डेबिट

कार्ड है।

याचिकाकर्ता के वकील जीतेन्द्र पंड्या ने दलील दी कि आरबीआई अधिनियम की धारा 26(2) के तहत सरकार को एक विशेष सीरीज के नोट बंद करने का अधिकार है। इसके लिए सरकारी गजट की जरूरत होती है। लेकिन गजट से विमुद्रीकरण नहीं किया जा सकता है। केन्द्र सरकार ने 500 व 1000 रुपए के नोट को बंद करने के लिए संसद में किसी तरह का कानून पारित नहीं किया, जबकि नोटबंदी के लिए नया कानून पारित करना पड़ता है। वर्ष 1978 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार ने एक हजार, पांच हजार व दस हजार रुपए के नोट रद्द करने के लिए पहले अध्यादेश और फिर बाद में द हाई डिनोमिनेशन बैंक नोट्स डिमोनिटाइजेशन एक्ट, 1978 पारित किया था।

तब सिर्फ अधिसूचना नहीं जारी की गई थी।याचिका में यह भी कहा गया कि आरबीआई नियमों के तहत राष्ट्रीयकृत बैंक, निजी बैंक व शहरी सहकारी बैंक संचालित होते हैं ऐसे में उपर्युक्त बैंकों की बजाय सिर्फ जिला सहकारी बैंकों को पुराने नोट नहीं स्वीकारने व नए नोट नहीं वितरित करने का निर्णय पूरी तरह भेदभाव भरा है। यह संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है।

इससे पहले मंगलवार को भी उच्च न्यायालय ने भावनगर जिला सहकारी बैंक की ओर से दायर याचिका पर केन्द्र व रिजर्व बैंक को नोटिस जारी किया था। खंडपीठ ने साथ ही मौखिक आदेश दिया है कि लोगों को वेतन के लिए परेशानी नहीं हो इसके लिए बैंकों को ज्यादा कैश उपलब्ध कराया जाए। खंडपीठ ने इन दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई का निर्देश दिया। इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई अब 5 दिसम्बर होगी।

अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!

Latest Videos from Patrika

Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???