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वेतन भोगियों के उमडऩे से और लंबी हुई कतारें

Updated: IST Bank Queue
राज्य सरकार ने विमुद्रीकरण के कारण पैदा हुए नकदी संकट के बीच इस बार पूरे वेतन अथवा इसके कुछ हिस्से के नकद भुगतान की मांग को ठुकरा दिया था

अहमदाबाद। विमुद्रीकरण के बाद से मची अफरातफरी के बीच गुजरात में गुरुवार को राज्य सरकार के चार लाख से अधिक कर्मियों और करीब इतने ही पेंशनरों के बैंक खातों में वेतन/पेंशन का भुगतान होने के कारण बैंकों और एटीएम के समक्ष लोगों की और लंबी कतारे दिखाई पड़ी। इसके साथ ही केंद्र सरकार तथा इसके कई उपक्रमों ने भी अपने कर्मियों का आज ही वेतन भुगतान किया है।

राज्य सरकार ने विमुद्रीकरण के कारण पैदा हुए नकदी संकट के बीच इस बार पूरे वेतन अथवा इसके कुछ हिस्से के नकद भुगतान की मांग को ठुकरा दिया था। वेतन के हर बार की तरह इस बार भी बैंक खातों में ही किए जाने के कारण आज एक बार फिर बैंकों और एटीएम मशीनों के सामने भारी भीड़ दिखाई पड़ी। विमुद्रीकरण के बाद से ही दिख रही लंबी कतारे गुरुवार को और भी लंबी थी और कई स्थानों पर अहले सुबह से ही कतार में खड़े वेतनभोगी और अन्य लोग बैंकों के कथित मनमाने रवैये की शिकायत करते भी दिखे। सूरत में स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मी ने कहा कि कई बैंक, रिजर्व बैंक की ओर से चेक के जरिए 24 हजार रुपए तक की निकासी सीमा की अनुमति के स्पष्ट आदेश के बावजूद मनमाने ढंग से एक व्यक्ति को मात्र 10 हजार रुपए ही दे रहे हैं।

राजकोट में ऐसे ही एक कर्मी ने कहा कि खाते में वेतन होने के बावजूद वह जरूरत के मुताबिक पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी लंबी चौड़ी बाते करें पर वास्तविकता तो यह है कि लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। पूरा दिन बैंकों के सामने बीतने पर भी जरूरत के मुताबिक पैसा और छुट्टा नहीं मिल पा रहा। दूध और शाकभाजी खरीदना मुश्किल हो रहा है। दो हजार रुपए के नोटों का तो और बुरा हाल है। इसे लेने के लिए अनाप शनाप खर्च करना पड़ रहा है। एटीएम भी खस्ताहाल हैं। जनता सरकार के निर्णय का फिर भी स्वागत कर रही है पर प्रधानमंत्री को बैंकों के मनमाने रवैये और कामचोरी तथा भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने के बारे में सोचना चाहिए।

वडोदरा में बैंककी लंबी और सुस्त रफ्तार लाइन से उकता कर एक घंटे बाद निकल आए एक पेंशनर ने कहा कि धक्कामुक्की और एक घंटे खड़े रहने के बाद बैंककर्मियों के बेरुखी वाले बर्ताव और उलूल जुलूल फरमान ने उन्हें और उनके जैसे कई लोगों को बेहद निराश किया है। उन्होंने कहा कि बैकों का यह रवैया सरकार के लोकप्रिय फैसले के परिणामों पर पानी फेर सकता है।

डिजीटल बैंकिंग का सपना देख रही सरकार को पहले बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। अहमदाबाद के एक बैक से अपने वेतन में से मात्र 10 हजार रुपए ले सके एक अन्य सरकारी कर्मी ने कहा कि मुझे पहलेे यह कहा गया कि मैं किसी अन्य शाखा से पैसे नहीं निकाल सकता पर जब मैने कठोर रवैया दिखाया तो मुझे पैसे दिए गए। उन लोगों ने कई अन्य लोगों को काफी समय तक लाइन में खड़े रहने के बाद यही दलील देकर लौटा दिया था।

रिजर्व बैंकके निर्देशों और परिपत्र की वे खुलेआम खिल्ली उड़ा रहे हैं और मनमाने ढंग से लोगों से बर्ताव कर रहे हैं। इस बीच, यहां स्टेट बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि नकदी की समस्या के साथ ही साथ अन्य बाते भी लोगो की परेशानी के लिए जिम्मेदार हैं। उनका इशारा कई बैंकों में कर्मियों की कमी तथा उपलब्ध लोगों में उचित कार्यसंस्कृति के अभाव की ओर भी था।

एक अन्य बैंक कर्मी ने कहा कि आम दिनों में भी कामचोरी करने वाले कई कर्मी मोदी जी के निर्णय के बाद पैदा हुई स्थिति से हतप्रभ हैैं, उन्हें लगता है कि यह स्थिति लंबे समय तक चलने वाली हैं, इसलिए कई बार टालमटोल भी करते हैं। इससे जनता क्षुब्ध भी होती है। ज्ञातव्य है कि गुजरात सरकार के चार लाख 65 हजार कर्मी तथा चार लाख 12 हजार पेंशनर हैं।

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