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नहीं तो अलीगढ़ के मुसलमान बनाएँगे नया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Updated: IST  triple talaq
अगर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक, हलाला और बहुपत्नी व्यवस्था पर जैसी कुरीतियो मे बदलाब करने पर विचार नहीं किया तो अलीगढ़ के मुसलमान नया पर्सनल लॉ बोर्ड बनाएगे।

अलीगढ़। फोरम फॉर मुस्लिम स्टैडीज एण्ड एनालिसिस ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे तीन तलाक, हलाला और बहुपत्नी व्यवस्था पर दखल देने की माँग की है। फोरम ने इस सम्बन्ध में ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखा। साथ ही यह भी साफ किया है कि अगर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक, हलाला और बहुपत्नी व्यवस्था पर जैसी कुरीतियो मे बदलाब करने पर विचार नहीं किया तो अलीगढ़ के मुसलमान नया पर्सनल लॉ बोर्ड बनाएगे।

ऐसे भी प्रावधान है जो शरिया का अंग नहीं

फोरम फॉर मुस्लिम स्टैडीज एण्ड एनालिसिस के निदेशक डॉ० जसीम मोहम्मद ने बताया कि देश में मुसलमानो के विवाह एवं तलाक से सम्बन्धित कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ के बारे मे समाज के बीच यह भ्रान्ति है कि उक्त कानून शरयी है जब कि एंसा नहीं है। उन्होंने कहा मुस्लिम पर्सनल लॉ शरिया पर आधारित है परन्तु इसमें कुछ एैसे भी प्रावधान है जो शरिया का अंग नहीं है। उन्होंने कहा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 और डिस्यूलेशन ऑफ मुस्ल्मि मैरिज एक्ट, 1939 तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने मुस्लिम इस्लामिक विद्वानों से चर्चा करके लागू किया था।

कई मुस्लिम देशों ने कानूनों में किए है समयानुसार बदलाव

डॉ० जसीम मोहम्मद ने कहा कि इस समय मुस्लिम समाज मे गैर इस्लामिक परम्पराये जड़ पकड़ चुकी है। जैसे एक बार मे तीन तलाक, हलाला और बहुपत्नी परम्परा। उन्होंने कहा कि विश्व के कई मुस्लिम देशों ने अपने अपने यहाँ विवाह एवं तलाक से सम्बन्धित कानूनों में समयानुसार बदलाव किए है। डॉ० जसीम मोहम्मद ने बताया कि मिस्र, अल्जीरिया, जार्डन, इराक, लीबिया, लेबनान, कुवैत, सीरिया, सूडान, मोरक्को, यमन, फिलीस्तीन, अफगानिस्तान, तुर्की, सोमालिया, पाकिस्तान, बंगलादेश, ब्रुनेई, इन्डोनेशिया, इरान और मलेशिया ने इस प्रकार बदलाव किए है। उन्होंने कहा कि इस समय तीन तलाक, बहुपत्नी और हलाला का वर्तमान मुस्लिम पर्सनल लॉ के अर्न्तगत दुरूपयोग हो रहा।

मुस्लिम महिलाओ का हो न्यायिक सशक्तिकरण

डॉ० जसीम मोहम्मद ने कहा कि एक समय मे तीन तलाक द्वारा मुस्लिम महिलाओं का न सिर्फ मानसिक आर्थिक और सामाजिक उत्पीड़न हो रहा है बल्कि वह हमारे संविधान के भी विरूद्ध है क्योंकि यह लिंग भेंद पर आधारित है। उन्होंने कहा अब समय आ गया है जब हमें अन्य मुस्लिम देशों की तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ के संशोधन करके मुस्लिम महिलाओ का न्यायिक संशक्तिकरण करना चाहिए। डॉ० जसीम मोहम्मद ने कहा ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों की एक सम्मानित संस्था है। उसे मुस्लिम पर्सनल लॉ में संशोधन के लिए आगे आना चाहिए था परन्तु मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कलकत्ता मे आयोजित अपने 25वीं अधिवेशन मे तीन तलाक को अपनी सहमति प्रदन कर दी जो गलत है और गैर इस्लामिक है।

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