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नोटबंदी के बाद ताला उद्योग से जुड़े एक लाख लोगों पर रोजी-रोटी का संकट

Updated: IST aligarh lock industry
नोटबंदी के बाद जहां आम जनता परेशान है वहीं उद्योग-धंधों पर भी बुरा असर पड़ा है। हालात ये है कि कई उद्योग-धंधे को बंदी की कगार पर हैं।

अलीगढ़। दुनियाभर में मशहूर अलीगढ़ के ताला उद्योग पर नोटबंदी का बुरा असर पड़ा है। इससे जुड़े एक लाख से ज्यादा कारीगरों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। ताला नगरी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन के महासचिव सुनील दत्ता ने बताया कि नोटबंदी के बाद अलीगढ़ का ताला उद्योग भी बंदी की कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि इसका ज्यादातर कारोबार नकदी में होता है। पांच सौ और हजार रुपये के नोटों का चलन अचानक बंद हो जाने से चीजें जहां-तहां रुक गयी हैं।

नकदी रहित लेन-देन संभव नहीं

सुनील दत्ता ने बताया कि बैंक फिलहाल इस स्थिति में नहीं हैं कि वे ताला उद्योग की रवानी बनाये रखने के लिये पर्याप्त नकदी मुहैया करा सकें। सरकार नकदी रहित लेन-देन को बढ़ावा देने की बात तो जरुर कर रही है, लेकिन इतने कम समय में नकदी आधारित अर्थव्यवस्था को नकदी रहित नहीं बनाया जा सकता। हालांकि ताला उद्योग पर ताला लगाने के लिये इतना वक्त काफी है।

90 प्रतिशत कुटीर और लघु उद्योग बंद

सपा के विधायक और ऑल इंडिया लाक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जफर आलम का कहना है कि नोटबंदी की वजह से जिले के 90 प्रतिशत कुटीर और लघु उद्योग या तो बंद हो चुके हैं, या फिर बंदी की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि शहर में करीब एक लाख लोग अपनी रोजीरोटी के लिये ताला उद्योग पर निर्भर हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बेरोजगार हो जाने की कल्पना से ही डर लगता है।

80 प्रतिशत काम रुका

छेरत इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एसोसिएशन के महासचिव मीर आरिफ अली ने कहा कि उन्हें नहीं पता है विमुद्रीकरण के क्या दीर्घकालिक परिणाम होंगे, लेकिन मौजूदा हालात बेहद भयावह है। अलीगढ़ में तालों का 80 प्रतिशत काम नकदी की किल्लत के कारण रुका हुआ है। अलीगढ़ में तालों और पीतल उत्पादों का सालाना कारोबार 210 करोड़ रुपये से ज्यादा का है और यह जिले की आर्थिक बुनियाद भी है। जिले में छह हजार से ज्यादा लघु और मध्यम उद्योग इकाइयां ताला निर्माण कार्य में लगी हैं।

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