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Photo Icon अतरौली में कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत बचेगी या नहीं

Updated: IST Daughter in Law of kalyan Singh
प्रदेश की राजनीति में बड़ा चेहरा देने वाले अतरौली विधानसभा पर इस बार सबकी नजर टिकी है।

अलीगढ़। प्रदेश की राजनीति में बड़ा चेहरा देने वाले अतरौली विधानसभा पर इस बार सबकी नजर टिकी है। भाजपा के लिए इस सीट पर जीतना यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं मौजूदा विधायक के लिए अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए यहाँ चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है। इन दोनों परिस्थितियों के बीच दूसरे दल भी अपनी पूरी ताकत इस सीट पर विजय पताका लहराने की जुगत में लगे है। कई दशक तक कल्याणसिंह को इस क्षेत्र से विधानसभा पहुंचाने वाली जनता ने पिछले चुनाव में उन्हें किनारे कर दिया था। आइए जानते हैं अतरौली की जनता का मिजाज

पिछली बार अपने विवेक से वोट दिया था
बुधवार को दोपहर के 12 बजे हैं और मैं इस समय रामघाट रोड स्थित चौमुंहा गांव में हूं। अतरौली विधानसभा क्षेत्र का यह प्रमुख गांव है। गांव में सड़क किनारे खेत पर पवन वर्मा अपने परिवार के साथ गाजर निकाल रहे थे। चुनावी चर्चा हुई तो कहने लगे कि पिछले चुनाव में कल्याण सिंह की नयी पार्टी थी। कल्याण सिंह ने अपनी बहू प्रेमलता को चुनाव लड़वाया था। उन्हें वोट देते तो सरकार बनने का मतलब नहीं था। इसविए अपने विवेक से वोट दिया। अब वे भाजपा के साथ हैं, तो लोधी वोट भी भाजपा के साथ पक्का है।

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कैसे करें समर्थन
सरायवली, अतरौली के समाजसेवी सौरभ गुप्ता से चुनावी चर्चा हुई तो कहने लगे कि कल्याण सिंह ने अपने मुख्यमंत्री काल में जो काम शुरू किए थे, वे पूरे नहीं कराए। डिग्री कॉलेज अधूरा रह गया। आईटीआई की स्थापना की, लेकिन टीचर नहीं दिए। युवाओं के रोजगार के लिए फैक्ट्री स्थापित नहीं की। कल्याण सिंह ने केएमवी इंटर कॉलेज में कल्याण सिंह ने पढ़ाया, लेकिन एग्रीकल्चर की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं की। अब आप ही बताएं कि किस तरह समर्थन करें।

कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को सहेजेंगे
पक्की गढ़ी, अतरौली के रहने वाले बुजुर्ग मयंक शर्मा कहते हैं कि उन्होंने 13 बार विधानसभा चुनावों में वोट डाला है। इसी अनुभव के आधार पर वह इस बार कह सकते है कि कल्याण सिंह का परंपरागत वोट फिर से यहाँ राजनीतिक विरासत को सहेजना चाहता है। कल्याण सिंह के परिवार से किसी को टिकट मिला तो समर्थन मिलेगा।

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नए को मौका देने में बुराई क्या है
अतरौली के दुकानदार मोहम्मद सगीर ने कहा कि अतरौली में रेलवे स्टेशन नहीं है। कई बार आंदोलन के बाद भी रेल लाइन से अतरौली को नहीं जोड़ा है। कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए भी कुछ नहीं किया। विधायक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में नए को मौका देने में क्या बुराई है।

कल्याण सिंह परिवार का व्यक्ति विधायक रहे
कल्याण सिंह के साथ चुनावी समर में कई बार साथ रहे रामघाट रोड पर नौअरी भोजपुर के रहने वाले बुजुर्ग तेगसिंह कुछ लोगों के साथ चारपाई पर बैठे थे। हमने बातचीत की तो कहने लगे कि कल्याण सिंह ने लोधी जाति की पहचान प्रदेश ही नहीं, देश में दिलाने का काम किया है। अतरौली में कल्याण सिंह परिवार का व्यक्ति विधायक रहे, यह यहाँ की जनता चाहती है।

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विधानसभा पर एक नजर
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 44 किमी दूर स्थित अतरौली विधानसभा में वर्षो तक कल्याण सिंह का जलवा रहा है। कल्याण सिंह इसी जलवे के बूते यूपी के मुख्यमंत्री तक रह चुके हैं। लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में कल्याण को करारा झटका लगा।
मतदान केंद्र : 276
कुल बूथ : 384
कुल आबादी : 6,15,030
कुल मतदाता : 3,82,037
पुरुष मतदाता : 2,06,331
महिला मतदाता : 1,75,730
अन्य मतदाता : 12

विधानसभा चुनाव 2012 का चुनाव परिणाम
प्रत्याशी पार्टी वोट
वीरेश यादव सपा 54,785
प्रेमलता वर्मा निर्दलीय 45,918
साकिब बसपा 42.436
जीत का अंतर 8,667

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