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ऐसे करें माघ स्नान और सूर्य उपासना, पूरे होंगे मनोरथ

Updated: IST Makar Sankranti
ज्योतिष के अनुसार, माघ मास में प्रत्येक मनुष्य को स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।

अलीगढ़। धार्मिक दृष्टिकोण से माघ मास का बहुत अधिक महत्व है। वैदिक ज्योतिष संस्थान के पंडित गौरव शास्त्री के अनुसार भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चन्द्रमा और दसवां सौरमास माघ कहलाता है। इस महीने में मघा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने से इसका नाम माघ पड़ा। इस मास में सूर्योदय से पूर्व शीतल जल के भीतर डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त हो जाते हैं।

माघ स्नान कर दें सूर्य को अर्घ्य

पद्मपुराण में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए गौरव शास्त्री ने कहा कि पूजा करने से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि माघ महीने में प्रातः स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने मात्र से होती है। इसलिए सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्रीति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।

इसलिए है तिल दान का महत्व

गौरव शास्त्री के अनुसार माघ मास में जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्तपुराण का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि माघ में ब्रह्मवैवर्तपुराण की कथा सुननी चाहिए यह संभव न हो सके तो माघ महात्म्य अवश्य सुनें। इस मास में स्नान, दान, उपवास, सूर्य उपासना और भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। माघ मास की अमावास्या को प्रयाग राज में स्नान से अनंत पुण्य प्राप्त होते हैं। माघ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके सूर्य स्वरूपी भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

ऐसे करे भगवान सूर्य आराधना

ज्योतिषाचार्या ने बताया कि इस बार माघ मास का प्रारंभ 13 जनवरी शुक्रवार से हो रहा है, जो 10 फरवरी शुक्रवार तक रहेगा। माघ मास में विधिपूर्वक भगवान माधव की पूजा से पहले सुबह तिल, जल, फूल, कुश लेकर इस प्रकार संकल्प करना चाहिए-

ऊं तत्सत् अद्य माघे मासि अमुकपक्षे अमुक-तिथिमारभ्य मकरस्त रविं यावत् अमुकगोत्र (अपना गोत्र बोलें) अमुकशर्मा (अपना पूरा नाम बोलें) वैकुण्ठनिवासपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं प्रात: स्नानं करिष्ये।

ये प्रार्थना करें

दु:खदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय: च।

प्रात:स्नानं करोम्यद्य माघे पापविनाशनम्।

मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युत माधव।

स्नानेनानेन मे देव यथोक्तपलदो भव।।

दिवाकर जगन्नाथ प्रभाकर नमोस्तु ते।

परिपूर्णं कुरुष्वेदं माघस्नानं महाव्रतम्।

माघमासमिमं पुण्यं स्नानम्यहं देव माधव।

तीर्थस्यास्य जले नित्यं प्रसीद भगवन् हरे।।

ज्योतिष के अनुसार माघ मास की ऐसी महिमा है कि इसमें जहां कहीं भी जल हो, वह गंगाजल के समान होता है। फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, राजघाट, नरौरा तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है।

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