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#AIDSday फैलने के बारे में यह रिपोर्ट आपको हैरान कर देगी

Updated: IST aids day 2016
भारत में एचआईवी संक्रमण में कमी आई है, लेकिन अलीगढ़ में एक रिपोर्ट से चौंकाने वाले नतीजे सामने आये हैं।

प्रवीण कुमार
अलीगढ़। भारत में एचआईवी संक्रमण में कमी आई है, लेकिन अलीगढ़ में एक रिपोर्ट से चौंकाने वाले नतीजे सामने आये हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एड्स के लिए जिम्मेदार दूसरा बड़ा कारण पुरुष से पुरुष के साथ सेक्स (MSM) बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोग एचआईवी या एड्स से सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सामान्य जनसंख्या में एचआईवी का प्रसार 0.40 प्रतिशत है जबकि इंजेक्शन से नशे का सेवन करने वाले लोगों में इसका प्रसार 7.17 प्रतिशत है।

पुरुष का पुरुष के साथ सेक्स से एड्स
विशेषज्ञ इसका दोष मादक पदार्थ उपयोगकर्ताओं का गरीबी की हालत में गुजर-बसर करना और नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज अधिनियम को देते हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (नाको) तृतीय के तहत चलाई जा रही परियोजना के जिला संचार अधिकारी केशव देव ने बताया कि जो लोग इंजेक्शन के जरिए नशा करते हैं, वे सामाजिक, चिकित्सकीय और कानूनी स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पीड़न का सामना करते हैं। यह स्थिति उन्हें एचआईवी/एड्स की रोकथाम वाली सेवाओं का लाभ उठाने से वंचित कर देती है। इसलिए सबसे ज्यादा एड्स पॉजिटिव लोग इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थो का सेवन करने वाले पाये गए है। दूसरे नंबर पर एड्स के लिए पुरुष से पुरुष यौन सम्बन्ध जिम्मेदार है।

एड्स पीड़ितों में 18 लोगों की मौत
केशव देव बताते है कि अक्टूबर 2014 तक 186 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाये गए हैं। इनमे से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस बार सेक्स वर्कर इलाकों में स्वयंसेवी संगठन ग्रामीण विकास समिति के सहयोग से नाको और हेल्पपत ने जगह-जगह कंडोम रखवा दिए थे। इससे सेक्स वर्कर्स में एचआईवी पॉजिटिव के नए मामले सामने नहीं आये है।

कानून में कुछ बदलावों की जरूरत
अलीगढ़ जिले में एड्स के प्रति ग्रामीण और शहरी लोगो में जागरूकता फ़ैलाने का काम कर रही प्रमुख स्वयंसेवी संगठन ग्रामीण विकास समिति की प्रदेश सचिव एवं समाजसेविका चंचल वर्मा ने बताया कि भारत के कई हिस्सों में इसके नुकसान को कम करने वाले कार्यक्रमों में बाधा के लिए एनडीपीएस अधिनियम भी दोषी है। उन्होंने कहा कानून में कुछ बदलावों की जरूरत है। विशेष रूप से जहां तक नशा करने वालों का संबंध है, वहां इसे नरम होने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भारत में अधिकतर नशा करने वाले गरीबी की पृष्ठभूमि से आते हैं और नासमझी के कारण अपनी सुई और सीरिंज साझा करते हैं, जो एचआईवी संक्रमण फैलाते हैं।

एचआईवी संक्रमण में आई कमी
नाको के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में युवा आबादी के बीच एचआईवी संक्रमण में अनुमानित 57 प्रतिशत वार्षिक की कमी आई है। 2011 में एचआईवी संक्रमित लोगों की अनुमानित संख्या 20.8 लाख थी। एनडीपीएस अधिनियम अपने आप में कठोर है, लेकिन इसमें नशा करने वालों से अलग तरह से व्यवहार करने का प्रावधान है, लेकिन ये प्रावधान पुलिस के लिए नहीं है।

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