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चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने पर कोर्ट नहीं कर सकती हस्तक्षेप

Updated: IST Allahabad high court
चुनावी प्रक्रिया में यदि कोई निर्णय गलत लगता है तो निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 के अन्तर्गत चुनाव बाद चुनाव याचिका के मार्फत उसे चुनौती दे

इलाहाबाद.इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि जब एक बार चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है तो संविधान के अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत दायर याचिका में कोर्ट चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

हाईकोर्ट ने कहा कि संविधन का अनुच्छेद 329 (बी) कोर्ट को चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को प्रतिबंधित करता है। न्यायालय ने कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में यदि कोई निर्णय गलत लगता है तो निर्णय से दुखी व्यक्ति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 के अन्तर्गत चुनाव बाद चुनाव याचिका के मार्फत उसे चुनौती दे।

यह निर्णय न्यायमूर्ति वी.के.शुक्ल व न्यायमूर्ति संगीता चन्द्रा की खण्डपीठ ने नीत कुमार नितिन की याचिका में खारिज करते हुए दिया है। याचिका दायर कर निर्वाचन अधिकारी कानपुर नगर के एक फरवरी 2017 के उस आदेश को चुनौती दी गयी थी, जिसके द्वारा याची के कैन्ट विधानसभा क्षेत्र कानपुर नगर से उसके नामांकन को निरस्त कर दिया गया था। याचिका के विरोध में चुनाव आयोग के अधिवक्ता का तर्क था कि निर्वाचन अधिकारी ने अपने विवेक का प्रयोग कर कमियों के आधार पर याची का नामांकन खारिज कर दिया। याची यदि इस खारिज आदेश से दुखी है तो चुनाव बाद उसे चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दे सकता है।

हाईकोर्ट ने निर्णय में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 329 (बी) लोकसभा अथवा विधानसभा चुनावां में किसी भी प्रकार के प्रश्नचिन्ह पर कोर्ट को चुनाव याचिका के अलावा किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को प्रतिबंधित करता है। इस कारण कोर्ट इस प्रकार के याचिकाओं को नहीं सुुन सकती। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 329 (बी) की मंशा के विपरीत होगा।

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