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बीएसएनएल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया पांच लाख रुपये का हर्जाना

Updated: IST High Court
बार बार मुकदमा दयर करने को कोर्ट ने माना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सुनाया फैसला।

इलाहाबाद.न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग कर बार बार मुकदमा दायर करने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग मानते हुए उच्च न्यायालय ने बीएसएनएल नोएडा पर पांच लाख रूपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने बीएसएनएल की याचिका खारिज कर दी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि एक अधिकारी को नोएडा में बनाये रखने के लिए आईटीएस आदेश कुमार गुप्ता का मेरठ तबादला कर दिया गया। इसके खिलाफ केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) द्वारा रोक लगाये जाने पर बीएसएनएल ने याचिका दाखिल की। जब मुकदमे का अंतिम निर्णय होना था तो तबादला आदेश वापस ले लिया गया और दो दिन बाद दोबारा देहरादून भेजने का आदेश जारी हुआ। कैट ने इस आदेश पर भी नीति के खिलाफ होने के कारण रोक लगा दी। बीएसएनएल ने फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कैट के आदेश को चुनौती दी। कोर्ट ने बीएसएनएल द्वारा बार बार याचिका दाखिल करना और तबादला आदेश वापस लेकर पुनः तबादला करना और कैट द्वारा रोक लगाये जाने पर बार-बार हाईकोर्ट आने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग माना। हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों के मुकदमे के बोझ को और बढ़ाने के लिए बेकार के मुकदमे दाखिल नहीं करने चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति के.जे.ठाकर की खण्डपीठ ने बीएसएनएल की याचिका पर दिया है। बीएसएनएल ने आईटीएस अधिकारी आदेश कुमार का एक बार तबादला निरस्त किया इनके स्थान पर अरूण कुमार को तैनात किया गया। कैट द्वारा तबादले पर रोक लगा दी तो उनका दोबारा तबादला देहरादून कर दिया गया। फिर याची को दोबारा याची दाखिल करनी पड़ी। जबकि नियमानुसार चार साल में तबादला हो सकता है। जिसका पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने पाया कि बार-बार अर्जी व याचिका दाखिल कर बीएसएनएल ने अपने तबादले को कायम रखने की भरपूर कोशिश की। हाईकोर्ट ने इसे कानून दुर्भावना करार दिया और कहा कि गलत सलाह से याचिका दाखिल की गयी। हाईकोर्ट नेकहा कि हाईकोर्ट में वैसे ही मुकदमों का पहाड़ है और लोगों को त्वरित न्याय देने की जिम्मेदारी है ऐसे में सरकारी विभागों को व्यर्थ की याचिकाओं से बचना चाहिए।

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