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UP Election 2017

Photo Icon जागो जनमत: शहर दक्षिण में विकास के संगम की उम्मीद  

Updated: IST jago janmat
बर्बाद ट्रैफ़िक व्यवस्था है इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या

इलाहाबाद. इलाहाबाद यूपी के विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी समर का बिगुल बज गया है और राजनीति के इस कुम्भ में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जुटे हुए हैं। चुनाव से पहले एक बार फिर जिस तरह पार्टीयां बड़े बड़े वादे करके यूपी की सत्ता पर आसीन होना चाहती है। उसके लिए पार्टीयों और प्रत्याशियों ने राजनितिक क्षेत्रों में जुट गए है। जागो जनमत की टीम पत्रिका शहर दक्षिण कहने को शहर का हिस्सा है लेकिन हालत ये है की इस इलाके की किसी भी सड़क या गली से सही तरीके से गुजर नहीं सकते हैं। व्यापारियों के बहुलता वाले इस इलाके में यह वर्ग निर्णयाक भूमिका में है।

सामान्य वर्ग और छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों वाले इस क्षेत्र में इस वर्ग की समस्याएँ ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होती हैं इस बार भी इलाके के लोगो का यही कहना है कि जो हमारी आवाज़ सुनेगा हमारी सम्सयाएँ सुलझाएगा वोट उसे ही देंगे। भीषण सड़क जाम इस इलाके की नियति बन गए हैं शहर के सबसे पुराने इलाकों में हालत और बुरे हैं जैसे ही लोगों से चुनावी मुद्दों और चुनाव की बात होती है लोग इस समस्या को सबसे ऊपर रखते हैं व्यापारियों की समस्याएँ और अपनी सुरक्षा को लेकर इस वर्ग में खासी चिंता है। बात शुरू होते ही व्यापारियों पर हो रहे हमलेए अवैध वसूली का मुद्दा उठता है।

jago janmat

गंगाए यमुना सरस्वती के संगम से शुरू होकर औद्योगिक क्षेत्र सहित शहर का पुराना हिस्सा इसी इलाके में आता है। चौक और इससे यमुना किनारे का इलाका जाम की वर्षों पुरानी समस्या से आज तक नहीं निकल पाया है। चुनाव डर चुनाव वादे तो बहुत हुए लेकिन इस इलाके का हाल जस का तस है। आर्य कन्या के सामने से गुजर रहे मुट्ठीगंज निवासी राजीव कहते हैं। ये जो जाम आप देख रहे हैं ये एक दिन की बात नहीं है। रोज की समस्या है। ये सुबह शाम निकलना मुश्किल होता है। बच्चे स्कूल में जितना समय बिताते हैं उतना रसते में भी लग जाता है। पता नहीं इससे कब निजात मिलेगी। नोटबंदी और सपा के पारिवारिक कलह की चर्चा शुरू होती है तो दक्षिण से बात दिल्ली तक पहुँच जाती है। समर्थक अपने नेता के पक्ष में तर्क देते हैं और अपनी टम्पो हाई बताने में जुटे हैं। पार्टियों ने भले अभी प्रत्याशी घोषित न किये हो लेकिन पान की गोमती से चाय के ठेले तक लोग अपने अपने प्रत्याशी खड़े करके उसे जीताने के दावे कर रहे हैं ।

व्यापारियों की प्राथमिकताएं
अमर वैश्य बताते हैं कि हमारे क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफ़िक है। न तो दुकान्दारी हो सकती हैए न हम सुकून से घर से दूकान आ सकते हैं । जब तक इसका निदान नहीं होता हमारे अच्छे दिन कभी नहीं आयेंगे। किराना व्यापारी राजाबाबू कहते हैं ।गंदगी से छुटकारा ही नहीं मिल रहा। हर गली हर सड़क गन्दी हैए निगम में पार्षद नहीं सुनते। आधिकारी मिलते नहींए कहना शिकायत करें।

किससे कहें की क्या समस्या है पुरुषोत्तम जायसवाल समस्या गिनने की जगह नोट बंदी और जीएसटी पर केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन करते हुए कहते हैं कि देश में अच्छे दिन आने की शुरुआत हो चुकी है थोड़ी बहुत समस्या है वो कुछ दिन की बात है बस व्यवसायी संदीप रस्तोगी ने कहा की राज्य सरकार विकास का बही खाता लेकर घूम रही है।

लेकिन आज भी हमारी समस्याए वैसे की वैसे ही है। छोटे दूकानदारों के साथ जो दिक्कते है उनकी कोई सुनवाई नहीं है मयंक जैन ने कहा रोज व्यापारी दहशत में जीता है रोज दुकाने और व्यवसायी लुटे जा रहे है सरकार बस घर की लड़ाई लड़ रही है। पत्रिका के मंच पर शहर दक्षिण के व्यापारियों ने कहा की राजनितिक पार्टियां इस बार अगर इस सीट पर व्यापारी नेता को प्रत्याशी ना बनाया तो चुनाव का बहिष्कार करेंगे जागो जनमत की टीम से लोकेश केशरवानी संजय जैन रोहित छाबड़ा नंदन गुप्ता ओम खरबंदा ने अपनी बात रखी ।

व्यापारियों के मुद्दे
कानून व्यवस्था मजबूत हो ।
व्यापारियों को सरकार सुरक्षा मुहैया कराये ।
राजीनीति दलों में व्यापारी नेताओ को महत्व दिया जाना चाहिए ।
बाजारों मंडियों तक आने वाली सड़के बननी चाहिए ।
बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था हो ।
व्यापारियों को संरक्षण मिले ।

बुजुर्गों की प्राथमिकताएं
टीम पत्रिका से बुजुर्ग कांग्रेसी नेता अभय अवस्थी कहते हैं की नोटबंदी बड़ा मुदा है लेकिन जिस तरीके से रोजमर्रा की चीजें महंगी हुई हैं। अगर इस पर सरकार नियंत्रण न रख पाई तो यह भाजपा के लिये आत्मघाती निर्णय होगा। सरकार कितना भी इसे अपनी उपलब्धी बता रही हो लेकिन सरकार अगर सामान्य जन जीवन से जुडी चीजे सस्ती करने में सफल ना हुई तो खुद प्रधानमंत्री मंत्री अपनी ही पार्टी को सत्ता से दूर ले जायेंगे।

डॉ. अरुण पाठक सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी पर भाजपा का खुला समर्थन करते हुए कहते हैं। कि यही दो मुद्दे उत्तरप्रदेश में भाजपा की वापसी का कारण बन जायेंगे दूसरे दलों के पास कोई मुद्दा नहीं है। राजकुमार केसरवानी कहते हैं कि जिस तेज़ी से इलाहाबाद का विस्तार हुआ। वैसा शहर का विकास नहीं हुआ।

लम्बे समय से शहर के आउटर में रिंगरोड की जरुरत महसूस हो रही है लेकिन किसी ने अभी इस दिशा में काम ही नहीं शुरू किया ज्ञान चौबे ने कहा की राजनितिक दलों को राजनितिक पार्टियों को पारदर्शिता लेन की जरुरत है राजनीत और अपराध का गठजोड़ खत्म होना चाहिए । श्वेतांक कहते हैं की कभी इलाहाबाद को प्रधानमन्त्री का शहर कहा जाता था।लेकिन अब शहर से लीडरशिप ही ख़तम हो गई है, इसका खामियाजा शहर को भोगना पड़ रहा है पार्टी कोई भी हो गुटबाजी के चक्कर में शहर का नुक्सान हो रहा है। पंडित नेहरू के शहर और राजनितिक सीट पर अतीक अहमद जैसा आदमी भी जीत सकता है यह तो राजनिति की विडम्बना है ।

बताये यह मुद्दे
बुजुर्गों के लिये सामाजिक संरक्षण क़ानून बनाया जाए ।
उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गो को बस के सफ़र में रियायत दे किराए में मिले छूट ।
सरकारी संस्थानों में वृद्धों के लिए अलग काउंटर हो ।
महंगाई के अनुसार वृद्धों को मिलने वाली पेंशन भी बढाई जाये ।
सरकार विकास के नाम पर शहर की आत्मा से छेड़ छाड़ ना करे ।

अल्प्सख्यकों की प्राथमिक्ताएं
पत्रिका के मंच पर शौकत अली कहते हैं कोई भी पार्टी हो अल्पसंख्यकों को सिर्फ वोटबैंक समझा जाता है आज़ादी के इतने साल बाद भी हमारी वखत सिर्फ वोट देने वाले की ही रह गई है इससे जयादा कुछ नहींण् हमारी याद केवल चुनाव के समय आती है । जिया कुनैन रिजवी ने कहा की जितना राजनितिक पार्टी जिम्मेदार है उतना हमारा समाज भी।

हालांकि थोडा बदलाव आ रहा लेकिन अल्पसंख्यक यह ही मानते है की हम पढ़ लिख कर भी नौकरी नही पा सकते तो इसलिए खुद के रोजगार में कम उम्र से ही लग जाते है। जिसका खामियाजा यह है की अल्पस्ख्यको के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आ रहा है। अलीअहमद खान ने बताया की यह मुल्क हमारा है लेकिन आज भी हमें अपने वतनपरस्त होने का सूबूत देना होता है। यह हमारे लिये शर्म की बात है इसके लिये जितनी राजनीती जिम्मेदार है उतना ही हमारे लोग भी। वहीं मुद्दशिर कहते है कुछ लोगो की वजह हम जलालत झेलते हैं। अजहर अली कहते हैं कि मुल्क हमारे सरकार को हम भी चुनते ह । जितना सबका है उतना ही हमारा भी है। कुछ लोगो ने देश भर में टोपी दाढ़ी को आतंकवाद की पहचान बना दी है। इस बार हम भी विकास को वोट देंगे जो हमारे हक की बात करेगा ।हमे भी इसी वतन को समझेगा वोट किसी के कहने पर नही अपने नेता को सुन कर जान कर ही वोट देंगे हमे किसी पार्टी से परहेज नहीं है । विकास होगा एजेंडे में। मुजाहिद वासिम रिजवान सुलतान ने पत्रिका के मंच पर अपनी बात रखी ।

ये होंगे मुद्दे
अल्पसंख्को को उनका हक़ मिले ।
मुस्लिम समाज को वोट बैंक ना समझे ।
सविधान में जो अधिकार दिया है उतना ही हमे मिले ।
विकास के घोषणा पत्र पर ही वोट देंगे ।
राजनीत में मुस्लिमो की हिस्सेदारी बढे ।
भेदभाव न हो हमे भी हमारा हक़ मिले ।

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