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शंकराचार्य स्वरूपानंद को हाईकोर्ट से मिली राहत

Updated: IST Allahabad High Court
अर्जी में वासुदेवानंद ने कहा था, केस की सुनवाई का अधिकार अपील में जिला जज को है, स्वामी वासुदेवानंद की अर्जी खारिज

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को बड़ी राहत देकर, स्वामी वासुदेवानंद की अर्जी खारिज कर दी है। वासुदेवानंद ने हाईकोर्ट में अपील की थी कि शंकराचार्य स्वरूपानंद के पक्ष में सिविल जज इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रही अपील की सुनवाई को जिला जज इलाहाबाद के यहां भेजा जाए।

अर्जी में वासुदेवानंद ने कहा था, केस की सुनवाई का अधिकार अपील में जिला जज को है। सिविल जज ने ज्योतिषपीठ- बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वरूपानंद के पक्ष में आदेश में कहा था कि वही इस पीठ के शंकराचार्य हैं। वासुदेवानंद को अपने को शंकराचार्य घोषित करने व छत्र, चंवर के प्रयोग पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ वासुदेवानंद ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर रखी है।

वहीं, शंकराचार्य स्वरूपानंद ने वासुदेवानंद की अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि उनकी अपील पर हाईकोर्ट काफी हद तक सुनवाई कर चुका है। ऐसी स्थिति मे फिर से विवाद को लोवर कोर्ट को भेजना ठीक नहीं है। अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद की उम्र 94 वर्ष की हो रही है, ऐसे में मुकदमे की सुनवाई के लिए लोवर कोर्ट भेजने से शंकराचार्य के जीवनकाल में सुनवाई होना संभव नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस सुधीर अग्रवाल व जस्टिस एसबी सिंह की बेंच ने कहा, स्वामी स्वरूपानंद की अर्जी स्वीकार की जाती है तथा वासुदेवानंद की अर्जी खारिज की जाती है।

लोवर कोर्ट से यह हुआ था आदेश
लोवर कोर्ट ने शंकराचार्य स्वरूपानंद का वाद मंजूर कर आदेश दिया कि वही बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य हैं। आदेश दिया गया था कि वासुदेवानंद शंकराचार्य के रूप में न तो प्रदर्शित करेंगे, न क्षत्र चंवर का प्रयोग करेंगे। इसके खिलाफ वासुदेवानंद की अपील हाईकोर्ट में लंबित है, जिसकी सुनवाई वे लोवर कोर्ट कराना चाह रहे थे। इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। वासुदेवानंद की अर्जी को खारिज कर हाईकोर्ट ने कहा कि 17 अक्टूबर से वह इस केस की प्रतिदिन सुनवाई करेगा।

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