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Video Icon गरीबों के साथ 'सरकारी धोखा' मुख्यमंत्री के हाथ से पाए लोहिया आवास को छीन ले गए अधिकारी

Updated: IST ambedkar nagar
प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों के लिए चलाए जा रहे लोहिया आवास योजना का ऐसा सच सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है

अम्बेडकर नगर. प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों के लिए चलाए जा रहे लोहिया आवास योजना का ऐसा सच सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। एक कार्यक्रम में 9 गरीब महिलाओं को मुख्यमंत्री के हाथों दिए गए लोहिया आवास का 6 महीने बाद भी पैसा नहीं मिल सका और अवैध वसूली के चक्कर में इन लाभार्थियों को अब अधिकारी अपात्र बताकर खाते में आए रुपये पर रोक लगा दी है।
12 जून को अम्बेडकर नगर हवाई पट्टी पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बड़े कार्यक्रम के दौरान हजारों लोगों की मौजूदगी में 68 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास और उद्घाटन किया था। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने तमाम योजनाओं का लाभ भी मंच से ही दिया था। बसखारी विकास खंड क्षेत्र के रुद्रपुर भगाही ग्राम पंचायत की 9 गरीब महिलाओं का नाम भी तमाम जांच के बाद लोहिया ग्रामीण आवास के लिए चयन किया गया था।

हवाई पट्टी पर वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, लैपटॉप वितरण आदि योजनाओं के लाभार्थियों के साथ ही लोहिया आवास की इन 9 लाभार्थियों को भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने हाथों से स्वीकृति पत्र सौंपा था, लेकिन जून से लेकर अब तक इन महिलाओं को आवास का पैसा नहीं मिल सका।
किसी अज्ञात शिकायत पर जांच में बता दिया अपात्र

6 महीने बाद भी मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आवास का लाभ न मिलने से ये गरीब अब अपने आप को ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। गांव में सच्चाई जानने का प्रयास किया गया, जिसमें इन लाभार्थियों की हालत ऐसी नहीं दिखाई पड़ी कि उन्हें आवास न मिल सके। मुख्यमंत्री के हाथों लोहिया आवास का स्वीकृति पत्र पाई विधवा कुलसुम ने बताया कि उसके पति का देहांत हो चुका है और उसके कोई औलाद भी नहीं है। रहने के लिए धंद का छप्पर भी नहीं है, लेकिन अधिकारीयों को एक आवास के लिए 10 हजार रुपये चाहिए तभी उनके खाते पर लगी रोक हटेगी अन्यथा उन्हें अपात्र दिखा दिया जाएगा।

लाभार्थी नाजनीन ने बताया कि उनके पति बाहर रहकर मजदूरी करते हैं और उनकी दो सयानी बेटियां हैं। रहने के लिए घर के नाम पर एक छप्पर है, जिसमें रहना खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने बताया कि 12 जून को 7वां रोजा रखकर भूखे प्यासे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उन्हें यह आवास मुख्यमंत्री ने स्वयं उपलब्ध कराया था, लेकिन किसी अज्ञात की झूठी शिकायत पर अब अधिकारी उन्हें आवास के लाभ से वंचित कर देना चाहते हैं। नाजनीन ने बताया कि जांच में जो अधिकारी आये थे वे 10 हजार रुपये की मांग कर रहे थे, लेकिन रुपया नहीं मिलने पर उन्होंने दूसरों के पक्के घर की फोटो खींच कर उनकी पात्रता समाप्त कर दी है, जबकि उनके पास केवल छप्पर है। यही हाल गांव में मिले अन्य लाभार्थियों का भी है। इन सभी को अपात्र बताते हुए उनके खतों में आई धनराशी पर परियोजना निदेशक ने रोक लगा दी है।

दूसरे अधिकारीयों की जांच पर परियोजना निदेशक नहीं करते भरोसा

गांव की प्रधान एक पर्दा नशीन महिला हैं और उनके प्रतिनिधि के रूप में उनके पुत्र दानिश से मुलाकात हुई। दानिश ने बताया कि जब मुख्यमंत्री को अम्बेडकर नगर आना था, उस समय गांव में कई अधिकारी जांच करने आये थे। उन्होंने बताया कि सारी जांच के बाद ही इन लोगों का चयन किया गया था। डेनिश का कहना है कि लोगों को इसका लाभ मिल पाता इससे पहले ही पुराने परियोजना निदेशक का स्थानांतरण हो गया और नए परियोजना निदेशक प्रदीप कुमार ने चार्ज पाते ही एक झूठी शिकायत पर जांच करने के लिए पहले तो विकास खंड अधिकारी टांडा को जांच सौंपी। उसमें भी विकासखंड अधिकारी ने सभी की पात्रता सही पाई, लेकिन उसके बाद परियोजना अधिकारी स्वयं जांच करने गांव में पहुंच गए और लोगों से अवैध रूप से पैसे की मांग करने लगे। पैसा न मिलने पर अब मुख्यमंत्री के हाथों बांटे गए लोहिया आवास को परियोजना निदेशक इन गरीबों से छीन लेना चाहते हैं।

परियोजना निदेशक की दबंगई

आमतौर पर तो मुख्यमंत्री के हाथों से बांटे गए किसी योजना के लाभ के विषय में किसी भी अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह उस पर ऊंगली उठा सके, लेकिन अम्बेडकर नगर के परियोजना निदेशक ने जिस तरह से दबंगई दिखाकर लाभार्थियों को लोहिया आवास से वंचित किया है, उससे तो लगता है कि उन्हें इन सब का कोई भय नहीं है। लोहिया आवास के इन लाभार्थियों के बारे में जब परियोजना निदेशक से बात करने का प्रयास किया गया तो पहले तो उन्होंने साफ़ तौर पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया, लेकिन काफी कहने पर उन्होंने बताया कि जो शिकायत की गई है उसके आधार पर 9 लाभार्थियों में से 6 अपात्र हैं।

जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर जांच के बाद ही सूची तैयार करने के बाद ही मुख्यमंत्री के हाथों इन लोगों को लाभ दिलाया गया होगा तो उन्होंने साफ कहा कि क्या मुख्यमंत्री स्वयं जांच करने गए थे। हालांकि परियोजना निदेशक की ये सारी बातें ख़ुफ़िया कैमरे में रिकार्ड हो गई हैं। सच्चाई जो भी हो,लेकिन कई जांचों में सिर्फ परियोजना निदेशक की जांच में ही ये लाभार्थी क्यों गलत पाए जा रहे हैं। और अगर ऐसा है तो जिन लोगों ने पहले जांच करके अपनी रिपोर्ट दी है उनके खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई।फिलहाल यह गरीब अभी भी आवासीय योजना का लाभ पाने के इंजार में हैं।

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