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exclusive, जो सोचेंगे आप, वह फेसबुक पर खुद-ब-खुद हो जाएगा टाइप 

Updated: IST Mark Zuckerberg
फेसबुक के निर्माता अब एक ऐसी तकनीक लाने जा रहे हैं, जो यूजर के मन में चल रही बातों को खुद-ब-खुद टाइप कर दिया करेगी। यह कोई कोरी कल्पना नहीं है। फेसबुक के फांउडर और सीइओ 'मार्क जकरबर्ग' ने खुद इस बात की घोषणा की है।

प्रभांशु रंजन
नई दिल्ली. काम के बढ़ते दवाब के बीच सोशल मीडिया पर मन की बातों को लिख पाना अब सभंव नहीं हो पा रहा है। शायद यही कारण है कि अब फेसबुक पर पहले जैसे लंबे पोस्ट नहीं दिखतें। साथ ही लंबे पोस्ट लिखने से अंगुलियों को मिलने वाली थकावट भी इसका एक अहम कारण है। अगर आप भी इन्हीं कारणों से फेसबुक पर लिखने से बच रहे हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है। फेसबुक के निर्माता अब एक ऐसी तकनीक लाने जा रहे हैं, जो यूजर के मन में चल रही बातों को खुद-ब-खुद टाइप कर दिया करेगी। फेसबुक के फांउडर और सीइओ मार्क जकरबर्ग ने खुद इस बात की घोषणा की है। जकरबर्ग ने इस खास तकनीक को 'सायलेंट स्पीच' का नाम दिया है। हालांकि, यह तकनीक अभी अपने शुरुआती पड़ाव मेंं ही है, मगर आने वाले समय में आप जो सोचेंगे वह आपके स्मार्टफोन पर खुद-ब-खुद टाइप हो जाएगा।

जानें सायलेंट स्पीच तकनीक को
सायलेंट स्पीच अर्थात मूक संवाद यह आने वाले दौर में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। इस कनीक के माध्यम से हाथ नहीं बल्कि आपका दिमाग टाइप करेगा। बता दें कि सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने अपने शीर्ष अनुसंधानकों को सायलेंट स्पीच को ईजाद करने में जुटा दिया है। मार्क का मानना है कि इस तकनीक के जरिये हरेक मिनट में 100 शब्द टाइप किए जा सकेंगे। टाइप की यह बहुत तेज रफ्तार होगी क्योंकि आमतौर पर स्मार्टफोन तेज टाइप करने वाले लोग भी एक मिनट में अमूमन 20 शब्द ही टाइप कर पाते है।

जकरबर्ग ने अपने फेसबुक पोस्ट में किया खुलासा
इस चमत्कारिक तकनीक का खुलासा फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपने एक पोस्ट में किया है। इस पोस्ट में मार्क ने लिखा, "हम एक प्रोजेक्ट का खुलासा करते है। इस पर अभी हम काम कर रहे हैं। एक दिन यह तकनीक हमें उसी तरह अपने विचारों को साझा करने की सुविधा देती है जैसे हम फोटो और वीडियो को शेयर करते हैं। आमतौर पर हमारा दिमाग हर सेकंड में 4 एचडी मूवी स्ट्रीम करने इतना डेटा का उत्पादन करता है। मगर सूचना को सार्वजनिक करने के सबसे बेहतर तरीके बात-चीत से हम केवल उतना ही डेटा बाहर निकाल पाते हैं, जितना 1980 के दशक में एक मॉडेम करता था।"

एफ-8 मिटिंग में की इसकी बात
जकरबर्ग ने इस तकनीक को सार्वजनिक करने के लिए एफ 8 मिटिंग का समय चुना। बता दें कि एफ 8 मिटिंग दो दिनों तक चलने वाला वह सालाना तकनीकी सम्मेलन होता है, जिसमें दुनिया भर के तकनीकीविद भविष्य की तकनीकों की संभावनाएं खंगालते हैं। यह एक ऐसा फोरम है, जहां वैसी चीजों के बारे में सोचा जाता है, जो हम आम आदमी के द्वारा मजाक समझा जाता है। मगर बाद में हम उसका उपयोग करते हुए तकनीक का मजा लेते हैं।

पांच गुणा बढ़ जाएगी लिखने की रफ्तार
सायलेंट स्पीच तकनीक के चलन में आने के बाद टाइपिंग की स्पीड पांच गुणा तक बढ़ जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। हालांकि यह तकनीक आपके द्वारा सोचे जाने वाले प्रत्येक विचारों को टाइप नहीं करेगा। दरअसल में हम हमेशा किसी बात पर बहुत कुछ सोचते रहते है। मगर जब बोलने या व्यक्त करने की बारी आती है, तब उसमें से कुछ चुनिंदा चीजों को भी व्यक्त करते है। यह तकनीक उन्हीं चुनिंदें विचारों को टाइप करेगा। जिसे आप अपने विवेक से तय कर चुके होगें।

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