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अस्पताल में 300 तरह की दवाएं, मिल रहीं सिर्फ 21 तरह की

Updated: IST District Hospital, dust in drugs,
अशोकनगर. जिला अस्पताल में मरीजों के लिए 301 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को केवल 21 तरह की दवाएं ही वितरित हो रही हैं।

अशोकनगर. जिला अस्पताल में मरीजों के लिए 301 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को केवल 21 तरह की दवाएं ही वितरित हो रही हैं। बाकी दवाएं औषधि भंडार गृह में पड़ी-पड़ी धूल खा रही हैं। दूसरी ओर मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

डायरेक्टर क्वालिटी एश्योरेंस डॉ. पंकज जैन ने इस पर जमकर नाराजगी जताई और औषधि भंडार प्रभारी गुलाबसिंह यादव को 15 दिन में कंप्यूटर चलाना सीखने की हिदायत दी। वे बुधवार को रात में करीब 08.15 बजे जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। जहां उन्होंने औषधि भंडार गृह के निरीक्षण के दौरान प्रभारी ने कंप्यूटर ऑपरेटर न होने की बात कही। डॉ. जैन के आदेश पर संविदा डॉटा एंट्री ऑपरेटर मोहनसिंह राठौर को औषधि भंडार गृह में बैठने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। डॉ. जैन ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की नई बिल्डिंग, आईसीयू, लेबर रूम, ओटी, ब्लड बैंक, ट्रामा सेंटर की निर्माणाधीन बिल्डिंग का भी निरीक्षण किया।

ओटी व ब्लड बैंक बंद होने पर भड़के

डायरेक्टर जब ओटी का निरीक्षण करने पहुंचे तो ओटी में ताला लटका हुआ था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि अचानक कोई गंभीर ऑपरेशन आएगा तो आप क्या करेंगे। उन्होंने तुरंत संबंधित कर्मचारी को बुलाने के निर्देश दिए। ताला खुलने के बाद ओटी का निरीक्षण किया। आगे बढ़े तो ब्लड बैंक में ताला लटका था। यहां भी उन्होंने स्टॉप वाच पर समय सेट कर प्रभारी को बुलाने के लिए कहा। प्रभारी भी तुरंत ही मौके पर पहुंच गए।

पहली बार देखा है ऐसा

ट्रामा सेंटर में ओटी में दो गेट के बाद उन्होंने अस्पताल की नई बिल्डिंग व ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग को आसपास में जोड़े जाने वाले गलियारे पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार देखा है कि जब गलियारे का गेट वार्ड में खुल रहा हो। उन्होंने निर्माण ठेकेदार को बुलाकर पूछताछ की। लेकिन वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। इसके बाद उन्होंने निर्माण ठेकेदार को गेट वार्ड में न खोलने की हिदायत दी और इसके लिए वह क्या करेंगे, इसकी जानकारी देने को कहा।

ट्रामा सेंटर में मिली कई कमियां

सबसे आखिर में वे ट्रामा सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां भी निर्माणाधीन बिल्डिंग में कई कमियां नजर आईं। ओटी में दो गेट पर असमंजस जताते हुए उन्होंने एक गेट बंद करने के निर्देश दिए। वहीं वार्डों में वेंटीलेटर न होने पर भी आश्चर्य जताया और वेंटीलेटर लगाने को कहा। इसके अलावा लिफ्ट बंद होने या खराब होने की स्थिति में मरीजों की सुविधा के लिए रैंप बनाने और पिलर पर आगे सात फीट का गे्रनाइट न लगाने की हिदायत भी निर्माण ठेकेदार को दी गई।

खास-खास

-अस्पताल भवन में बनाए गए रैंप पर रेलिंग न देख नाराजगी जताई और तुरंत रेलिंग लगाने के निर्देश दिए।

-लेबर रूम में डिलेवरी करवाने वाले स्थान पर दीवार बढ़ाने और ऊपर से पैक करने के निर्देश दिए। इसके लिए एस्टीमेट बनाकर भेजने को कहा।

-जहां भी सुधार या मरम्मत की आवश्यकता है, सब इंजीनियर को इसकी जानकारी भेजने के निर्देश दिए।

-स्थानीय चिकित्सकों द्वारा पुरानी बिल्डिंग को तोडऩे के संबंध में पूछने पर कहा कि यह बिल्डिंग अच्छी है, इसे तोडऩे की परमिशन आपको कोई देगा नहीं।

-पैथोलॉजी लेब को ऊपर खाली पड़े कमरे में शिफ्ट करने के निर्देश दिए।

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