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युवा वर्ग के दिव्यघोष की धूम रहेगी व्यावर मेंं

Updated: IST Ashok nagar
युवा वर्ग द्वारा दी जाएगी नए अंदाज में पिच्छिका परिवर्तन की प्रस्तुति, सजाई जा रहीं आकर्षक झांकियां, बालिकाएं देंगी नृत्य की प्रस्तुति, आज होगी 200 सदस्यीय टीम रवाना

अशोकनगर. राजस्थान के व्यावर में मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में होने वाले पिच्छिका परिवर्तन समारोह को भव्य रूप देने नगर के युवा वर्ग द्वारा व्यापक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। टीम के सदस्य आज पूर्ण तैयारी के साथ व्यावर के लिए रवाना होंगे। जहां 4 दिसम्बर रविवार को होने वाले पिच्छिका परिवर्तन समारोह में युवा वर्ग का दिव्यघोष धूम मचाएगा।

व्यावर मे होने वाले पिच्छिका परिवर्तन समारोह में युवा वर्ग द्वारा विशेष झांकियों के साथ प्रस्तुति दी जाएगी। जिसकी तैयारियां नगर में ही पिछले एक माह से की जा रही हैं। युवा वर्ग के एक सैकड़ा सदस्यों के साथ नगर के दो सैकड़़ा समाज जनों के साथ देशभर के हजारों भक्त समारोह में शामिल होंगे। सोमवार को नगर के भक्तों द्वारा मुनिश्री अभयसागरजी, प्रभातसागरजी, पूज्यसागरजी महाराज की प्रेरणा से आयोजित हो रहे त्रिकाल चौबीसी की रजत जयंती के उपलक्ष्य में 5 दिसम्बर को व्यावर में मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज के सानिध्य में विशेष महा अर्चना की जाएगी। जैन युवा वर्ग के अध्यक्ष विजय धुर्रा ने बताया कि श्रावक संस्कार शिविर की रजत जयंती के उपलक्ष्य में संस्कार प्रेरक झांकी प्रस्तुति की जाएगी। वहीं भारतीय संस्कृति और भारतीय कलाओं की प्रस्तुति दी जाएगी।

पिच्छिका परिवर्तन समारोह में रेगिस्तानी जहाज कहे जाने वाले ऊंट के जोड़ों के माध्यम से बनाई झांकी आकर्षण का केन्द्र रहेगी। युवा वर्ग द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया है। रेगिस्तानी जहाज के माध्यम से मुनिश्री की पिच्छिका समारोह में पहुंचेगी। इस दौरान राजस्थान वेश-भूषा की अलग-अलग प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही बालक एवं बालिकाओं द्वारा आकर्षक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं जावेंगी जिसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली गर्इं हैं। युवा वर्ग के पूर्व अध्यक्ष शैलेन्द्र श्रृंगार द्वारा रचित गीतों को संगीतबद्ध कर झांकी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के शब्दों में कहूं तो संयम के इस नीरस कार्यक्रम को सरस बनाने के लिए इसे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ दिखाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिच्छिका परिवर्तन समारोह में धार्मिक गीतों को संगीत के साथ जोड़कर उसको नए रुप में प्रस्तुत किया जाएगा।

जैन युवा वर्ग के अध्यक्ष ने बताया कि 1996 आर्यिकारत्न मृदुमति माताजी के पिच्छी परिवर्तन से नए अंदाज में यह कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसके बाद 1999 से मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में इस समारोह को नई ऊंचाई दीं। संयम के इस महान उपकरण के परिवर्तन कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए युवा वर्ग के प्रमुख कार्यकर्ता अंकित जैन, टिंकल जैन, विपिन सिंघई, शुभम कांसल, शैलेन्द्र दद्दा, सुलभ अखाई, सौरभ बर्तन, मंटू छाया, राहुल सिंघई, सौरभ जैन, जैकी अखाई, रीतेश बेलई, रोशन जैन, पीयूष छाया के साथ एक टीम बनाकर नई-नई विधाओं पर युवा वर्ग कार्यकर्ता देश के प्रमुख शहरों सूरत, जयपुर, कोटा, जबलपुर, सम्मेद शिखरजी, ललितपुर, कटनी, केकडी, अलवर, सीकर, भीलवाड़ा सहित प्रमुख नगरों में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह की प्रस्तुति दे चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि पिच्छिका जैन साधुओं की पहचान है। साधु-संत बिना पिच्छिका के सात कदम से आगे नहीं चलते। यह पिच्छिकाएं मयूर द्वारा छोड़े गए पंखों सेतैयार की जाती हैं। युवा समाज सेवी संस्था श्रीदिगम्बर जैन युवा वर्ग संयम के इस महान उपकरण को नए अंदाज में प्रस्तुति देने के लिए देशभर में जाना जाता है।

इस बार व्यावर राजस्थान में होने वाले पिच्छिका परिवर्तन समारोह की तैयारियां एक विशेष अंदाज में की जा रही हैं। शहर में त्रिकाल चौबीसी की स्थापना कराकर तीर्थ बनाने वाले मुनि पुंगव सुधासागर महाराज का चातुर्मास राजस्थान क ी औद्यौगिक नगरी व्यावर में हो रहा है। जहां पिच्छिका परिवर्तन समारोह 4 दिसम्बर को सेठ चम्पालाल की नशिया में होगा।

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