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किसानों को नहीं मिलेगा जीएसटी का फायदा

Updated: IST Ashoknagar, GST, farmers worried, impact on income
अशोकनगर. जीएसटी से कर्ज में डूबे किसान को कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। बाजार में जीएसटी को लेकर चल रही उथल पुथल ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।

अशोकनगर. जीएसटी से कर्ज में डूबे किसान को कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। बाजार में जीएसटी को लेकर चल रही उथल पुथल ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। पहले से ही अधिक खेती की लागत जीएसटी के बाद और अधिक बढ़ जाएगी, इसके साथ ही बाजार पर होने वाला खर्च भी बढ़ेगा, लेकिन उसकी तुलना में किसान की आय पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

यह सवाल आज हर किसान को परेशान किए हुए है। किसान दीपक शर्मा के अनुसार पहले ही पिछले पांच सालों में कई चीजों पर लागत दुगुने से अधिक हो गई है। जैसे खाद पांच साल पहले खाद की बोरी 1200 रुपए में आती थी, वह आज 2400 रुपए क्विंटल में आ रही है। लेकिन पांच सालों में किसान की फसल के दाम 5-10 प्रतिशत ही बढ़े हैं। ऐसे में किसान मुश्किल से अपनी लागत निकाल पा रहा है और जीएसटी लागू होने के बाद लागत निकालना और अधिक मुश्किल होगा।

कचनार के कृषक कृष्णभानसिंह यादव ने बताया कि सरकार जीएसटी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो कर रही है, लेकिन उनमें से किसान नदारद हैं। किसानों की मनोदशा पर कहीं कोई बात नहीं हो रही है और बिना पढ़ा लिखा साधारण किसानतो अभी तक जीएसटी से होने वाले असर को समझ भी नहीं पा रहा है। पहले ही कर्जके बोझ तले दबे किसानों का जीएसटी लागू होने के बाद उठ पाना और अधिक मुश्किल हो जाएगा। उदाहरण के लिए आप यदि किसी बड़े शहर में दुकान से 50 रुपए वाली आलू की टिक्की खरीदते हैं तो वह टैक्स लगाकर 59 रुपए की मिलेगी। नौ रुपए की ये महंगाई जीएसटी के चलते होगी।

आपकी जेब से नौ रुपए ज्यादा जरूर जाएंगे, लेकिन इससे आलू उगाने वाले किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। ऐसे ही गेहूं उसी तरह बिकेगा, लेकिन उससे तैयार बिस्किट महंगे हो जाएंगे, उर्वरक और सिंचाई के लिए पाइप और अन्य उपकरण महंगा होगा, लेकिन अनाज पर उसका कोई असर नहीं होगा। बाजार में किसान को महंगाई का सामना करना पड़ेगा और अपने अनाज को उसे पहले की तरह ही सस्ते दामों पर बेचना पड़ेगा।

ंजीएसटी से ये होंगे महंगे

एक जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी में अमीरों की लग्जरी कार किसानों के ट्रैक्टर पाट्र्स पर एक बराबर 28 फ ीसदी टैक्स लगेगा। अभी तक पूरी तरह से टैक्स फ्री ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों को भी 12 फ ीसदी जीएसटी स्लैब में रखा गया है। 12 फ ीसदी जीएसटी से ट्रैक्टरों के तकरीबन सभी मॉडल्स की कीमत में 30 हजार रुपए तक की बढ़त तय है। ट्रैक्टर पाट्र्स अन्य कृषि उपकरणों की कीमतों में भी 15 फ ीसदी तक की बढ़ोतरी तय है। वहीं अन्य कृषि उपकरणों जैसे थ्रेशर, कंबाइन हार्वेस्टर, लेजर लेवलर, पुली आदि पर 12 फ ीसदी जीएसटी लगाया जाएगा। वहीं फर्टिलाईजर्स पर पहले 0 से 8 प्रतिशत टैक्स था अब वह 12 प्रतिशत हो जाएगा, इसका भार कि सानों पर पड़ेगा।

सरकार का दोगला व्यवहार

एक तरफ तो सरकार फसल की लागत घटाने की बात कर रही है और दूसरी तरफ फर्टिलाइजर को, जो पहले 0 से 8 फीसदी के स्लैब में था, अब 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में रख दिया है। इससे फर्टिलाइजर के मूल्य में पांच से सात फीसदी वृद्धि होगी। अगर सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाएगी, तो ये बोझ किसान पर आएगा। इसके अलावा बायोकेमिकल्स, कीटनाशक, प्लास्टिक के पाइप और इलेक्ट्रिक मोटर आदि महंगे हो जाएंगे।

बाजार पर खर्च बढ़ेगा

किसानों की एक ओर बड़ी चिंता यह भी कि बाजार में होने वाला खर्च भी बढ़ जाएगा। दुकानदार जीएसटी का सारा बोझ उन पर डालेगा। किसान महेन्द्र जैन ने बताया कि अभी बाजार में किसानों साल भर का खर्च यदि 50 हजार रुपए है तो वह बढ़कर 70 हजार रुपए तक पहुंच जाएगा। लेकिन आमदनी नहीं बढ़ेगी।

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