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दमिश्क के निकट संघर्ष में 47 की मौत

Updated: IST Damascus Clash
एक आत्मघाती बम हमले में 15 मर्च को करीब 31 लोग मारे गए थे।

दमिश्क। सीरिया की राजधानी दमिश्क में सीरियाई सुरक्षा बलों और आतंककारियों के बीच भीषण संघर्ष में 47 लोगों की मौत हो गई। सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (एसओएचआर)ने कहा कि मारे गए लोगों में 26 सुरक्षाकर्मी और दो आत्मधाती कार बम हमलावर सहित 21 आतंकी शामिल हैं। इस संघर्ष में कई गुटों ने भाग लिया। इसमें तहरीर अल-शाम (सशस्त्र संगठन जिसमें अल कायदा की पूर्व सीरियाई शाखा शामिल है), अहरार अल-शाम और अल रहमान लीजन शामिल हैं।

तहरीर अल-शाम ने रविवार को सीरिया के पूर्वोत्तर इलाके, शहर के पुराने हिस्से और जोबार इलाके में आक्रामक हमले की शुरुआत की घोषणा की। युद्धक विमानों ने जोबार में सोमवार को 10 हमले किए। एक आत्मघाती बम हमले में 15 मर्च को करीब 31 लोग मारे गए थे। यह हमला दमिश्क के केंद्र में मुख्य अदालत परिसर में किया गया। उसी दिन बाद में राबेह जिले में एक रेस्तरां में दूसरा आत्मघाती हमला किया गया। इसमें 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

कार में ब्लास्ट से 9 बच्चों की मौत, सीरिया में सीज फायर के बाद पहली घटना

दमिश्क. सीरिया में हालिया सीज फायर के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर बच्चे हमलों का शिकार हुए हैं। सीरियन टीवी के मुताबिक़ यहां के तटीय शहर जबलेह में एक कार के जरिए विस्फोट किया गया। जिसमें 9 बच्चों की जान चली गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जिस इलाके में यह घटना हुई, वह सरकार के कब्जे में है। पांच साल से सरकार और विद्रोहियों के बीच सिविल वॉर शुरू है। इसकी वजह से लाखों लोग या तो मारे गए हैं या विस्थापित हुए हैं। सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने माना था कि पांच सालों में करीब 4 लाख लोगों के मौतें हुई हैं।

किसी ने नहीं ली है हमलों की जिम्मेदारी

अभी किसी संगठन ने ताजे धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली है। माना जा रहा है कि इसके पीछे आईएस लड़ाकों का हाथ हो। जहां बम विस्फोट हुआ है, वह सीरिया का मजबूत सरकारी गढ़ है। यह क्षेत्र प्रेसिडेंट बशर असद के परिवार से भी ताल्लुक रखता रखता है। मौके से कुछ विजुअल सामने आए हैं। इससे पहले मई में भी इस्लामिक स्टेट द्वारा इलाके के भीड़ वाले बस स्टेशन और अस्पताल को निशाना बनाकर ऐसे हमलों को अंजाम दिया गया था। तब करीब 120 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले हफ्ते सरकार और विपक्ष के बीच संघर्ष विराम का समझौता हुआ था, इसमें आईएस जैसे आतंकी संगठन शामिल नहीं थे।

हमलों की वजह से लाखों लोग कर चुके हैं पलायन

सिविल वॉर की वजह से लाखों की संख्या में लोग अपना घर-बार छोड़ कर यूरोपीय देशों में भाग चुके हैं। ज्यादातर ने जर्मनी और तुर्की की ओर रुख किया है। सीरिया का सिविल वॉर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी मानवीय क्राइसिस है।

इस तरह सीरिया में शुरू हुआ संकट

प्रेसिडेंट बशर अल असद के खिलाफ शुरू हिंसक प्रदर्शनों और संघर्ष में अब तक करीब 4 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2011 में हुई एक छोटी-सी घटना ने सीरिया को सिविल वॉर की ओर धकेल लिया। यह मुट्ठीभर बच्चों की गिरफ्तारी से शुरू हुआ था। दरअसल, जुलाई 2011 में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए सीरियन आर्मी के अफसरों के एक ग्रुप ने सेना छोड़ फ्री सीरियन आर्मी का गठन किया।

दिसंबर 2011 से 2012 तक जगह-जगह आत्मघाती बम ब्लास्ट किए गए। इसके बाद अलकायदा के लीडर अयमान अल जवाहिरी ने सीरियाई लोगों से जिहाद के लिए आगे आने की अपील की। बीते एक साल में इस्लामिक स्टेट भी वहां अपने आतंकी भेज रहा है। असद के लिए सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) को रूस सपोर्ट कर रहा है। वहीं, अमेरिका पर आरोप है कि वह असद के विद्रोहियों की मदद कर रहा है।

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