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भारत की कोशिश सीपीईसी को नाकाम करने की : पाकिस्तान

Updated: IST CPEC
उन्होंने कहा कि भारत की पाकिस्तान में दखलंदाजी कोई छिपी बात नहीं है

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने गुरुवार को आरोप लगाया कि भारत महत्वाकांक्षी 46 अरब डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना (सीपीईसी) को नाकाम करने की योजना बना रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, हम भारत (सरकार) की सीपीईसी को नाकाम करने की योजना से अवगत हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की पाकिस्तान में दखलंदाजी कोई छिपी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के परमाणु हथियार दक्षिण एशिया की शांति के लिए खतरा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत द्वारा बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर सकती है।

जकरिया के मुताबिक, बलूचिस्तान से कथित भारतीय जासूस कुलभूषण यादव को गिरफ्तार किया गया। उसे सीपीईसी के कार्य को प्रभावित करने की कोशिश के तहत पाकिस्तान में प्रवेश कराया गया था। जकरिया का दावा है कि खुद कुलभूषण ने यह बात कबूली है। जकरिया ने कहा कि आर्थिक परियोजना सीपीईसी से सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को लाभ होगा।

सीपीईसी के जरिए तीसरे देश को नहीं बना रहे निशाना : चीन

बीजिंग। चीन ने स्पष्ट किया है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक (सीपीईसी) गलियारा किसी तीसरे देश को निशाना बनाकर विकसित नहीं किया जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह इस सामरिक परियोजना का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करेगा।

मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि सीपीईसी दोनों देशों की ओर से स्थापित सहयोग का एक नया ढांचा है जिसे भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग से चलाया जाएगा। इसका मकसद किसी अन्य देश को निशाना बनाना नहीं है। वहीं, बलूचिस्तान पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए बयान पर सीधे तौर पर कुछ बोलने से बचते हुए हुआ ने कहा कि उच्च पद पर बैठे लोगों द्वारा दिए बयान पर कुछ नहीं कहना चाहूंगी।

भारत के अलावा अमरीका द्वारा बलूचिस्तान पर दिए गए बयान पर भी प्रवक्ता ने सीधे तौर पर कुछ कहने से मना कर दिया। सीपीईसी पर हुआ ने कहा कि इस परियोजना पर हम पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करेंगे। बलूचिस्तान से होकर गुजरने वाली यह परियोजना चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिंजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ेगी।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस परियोजना से विकास को तो बढ़ावा मिलेगा, साथ ही क्षेत्र में स्थिरता आएगी।

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