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 ICJ में न हमारी हार हुई और न ही जाधव को मिला कॉन्सलर एक्सेसः पाक

Updated: IST jadhav case pak says not loss in icj
कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में पाकिस्तान की किरकिरी के बाद गुस्साए पाकिस्तान ने कि वह हारा नहीं है। आने वाले समय में पाकिस्तान मजबूत टीम के साथ कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।

इस्लामाबाद: कुलभूषण जाधव मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हार के बाद तिलमिलाए पाकिस्तान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में उसकी हार नहीं हुई है। पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने मीडिया को बताया कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने जाधव को कॉन्सलर ऐक्सेस देने का आदेश नहीं दिया है। बल्कि फांसी पर रोक लगाई है।

पाकिस्तान के पास तैयारी के लिए 5 दिन-पाक
अजीज ने कहा कि पिछली बार समय की कमी थी लेकिन अगली बार वह अपनी लीगल टीम को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि ICJ ने इस केस की मेरिट या जूरिस्डिक्शन को लेकर कोई फैसला नहीं सुनाया है। अजीज ने कहा, ने सिर्फ अंतिम फैसला सुनाए जाने तक जाधव को फांसी देने पर रोक लगाया है।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास तैयारी के लिए सिर्फ 5 दिन थे और खावेर कुरैशी को भेजने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था।

पाकिस्तान का स्टैंड बदलता रहा
दरअसल इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने जब से जाधव की फांसी पर रोक का फैसला किया है तब से इस मुद्दे पर पाकिस्तान का स्टैंड लगातार बदल रहा है। शुरू-शुरू में तो पाकिस्तान ने ICJ के फैसले को खारिज करते हुए उसे मानने से ही इनकार कर दिया लेकिन बाद में उसने अपनी कानूनी टीम को मजबूत करने की बात कही। ज्यादातर पाकिस्तानी अखबारों ने भी अपने संपादकीय में लिखा है कि पाकिस्तान के लिए ICJ का फैसला बाध्यकारी है और जो भी फैसला आए, उसे स्वीकार करना होगा।

पाक ने ICJ में लगाई पुनर्विचार याचिका
खबर ये भी आ रही है कि पाकिस्तान सरकार ने ICJ में पुनर्विचार याचिका दायर कर कोर्ट से 6 हफ्ते में सुनवाई की मांग की है। पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन मामलों के अनुभवी एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि विदेश विभाग के लीगल विंग में बड़ा बदलाव समय की जरूरत है। विदेश विभाग के अधिकारी जाधव मामले में उचित सलाह देने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर भारत कश्मीर मसले पर अधिकार क्षेत्र को चुनौती दे सकता है तो पाकिस्तान भी अपने मामले में यही तरीका अपना सकता था।'

पाक के वकील ने की दो गलतियां
जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में पाकिस्तान की तरफ से पैरवी करने वाले वकील खावेर कुरैशी विदेश विभाग की पसंद थे। पाकिस्तान के अटर्नी जनरल के कार्यालय ने कुरैशी की जगह किसी दूसरे वकील का नाम सुझाया था। कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि कुरैशी ने दो गलतियां कीं। उन्होंने सुनवाई से पहले ऐड हॉक जज नॉमिनेट नहीं किया और उन्होंने भारतीय वकील के 2008 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई राजनयिक पहुंच से संबंधित समझौते के जिक्र का सही तरीके से बचाव नहीं किया।

पाक ने जाधव से जबरन बात कबूल करवाई-भारत
गौरतलब है कि पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को कथित जासूसी के जुर्म में मौत की सजा सुनाई है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने जाधव को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया है और वह भारतीय नौसेना के अधिकारी हैं। जबकि भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया और उनसे जबरन जासूसी की बात कबूलवाई गई। भारत का आरोप है कि इस मामले में पाकिस्तान ने वियना समझौते का उल्लंघन किया। भारत के बार-बार अनुरोध के बाद भी उसे जाधव तक राजनयिक पहुंच नहीं दी गई। इस पर भारत ने अतरराष्ट्रीय कोर्ट ने भी माना कि भारत को कॉन्सलर ऐक्सेस मिलना चाहिए।

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