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Photo Icon यहां होगा राम विवाह, सीता-राम विवाहोत्सव की तैयारियां शुरु

Updated: IST ayodhya
मार्ग शीर्ष शुक्ल पंचमी यानी कि अगहन पंचमी के पर्व पर चार दिसम्बर को सीता-राम विवाहोत्सव का मुख्य पर्व मनाया जाएगा।

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में श्री राम विवाह महोत्सव का आगाज़ हो गया है। मार्ग शीर्ष शुक्ल पंचमी यानी कि अगहन पंचमी के पर्व पर चार दिसम्बर को सीता-राम विवाहोत्सव का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर कनक भवन, बड़ा स्थान, रंगमहल, जानकी महल, विहुति भवन, दिव्यकला कुंज, रामसखी मंदिर व रामहर्षण कुंज सहित विभिन्न मंदिरों से दशरथनंदन कुमारों की भव्य बारात निकाली जाएगी। इस महोत्सव में शामिल होने के लिए देश के कोने कोने से भक्त श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं।

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सप्ताह भर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का हुआ आगाज़

श्री राम विवाह महोत्सव के मौके धार्मिक नगरी अयोध्या के सभी मठ मंदिरों में सप्ताह भर कथा प्रवचन मंगल गीत गायन सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। इसी कड़ी में अयोध्या के प्रसिद्ध कनक भवन एवं दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में रामकथा प्रवचन व रामलीला के मंचन के साथ उत्सव का शुभारम्भ हो गया है। रंगमहल एवं जानकी महल में एक दिसम्बर को रामलीला मंचन के साथ उत्सव का शुभारम्भ होगा। इससे पूर्व प्राचीन रंगमहल मंदिर परिसर में अभिजित मुहूर्त में महंत रामशरण दास व अन्य संतो ने विधि विधान से मंडप का पूजन किया।

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रामविवाह महोत्सव पर नही पड़ेगा नोटबंदी का कोई असर
अयोध्या में दशरथ महल के महंत स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज ने भी कहा कि नोटबंदी के कारण क्षणिक संकट जरुर पैदा हो गया है लेकिन हमारी परम्पराओं पर कोई आंच नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों ने जिन परम्परा का शुभारम्भ किया, उसके पीछे लोक कल्याण की ही भावना रही है। भगवान सीताराम का विवाहोत्सव भी भारतीय समाज को संस्कारवान बनाने और मर्यादापूर्वक जीवन जीने का संदेश देने के लिए है। इन परिस्थितियों में धन का महत्व तो स्वत: ही गौड़ हो जाता है, इसलिए संकट की बात बेमानी है। भगवान सीताराम का विवाहोत्सव संतो व साधकों के लिए उपासना का विषय है और उपासना भाव से होती है न कि धन से। उन्होंने कहा कि भगवत कार्य तो भगवत कृपा से ही संभव है और उनकी कृपा हो जाए तो जगत का कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवत कार्य में धन का निवेश करने वाले वास्तव में सदुपयोग करते हैं और परम पद को प्राप्त करते हैं। यहां धन-सम्पदा और वैभव का प्रदर्शन करने का प्रयास मात्र भी साधक को पतित बना सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि कड़ा फैसला लेने की जो हिम्मत दिखाई है, वह देश हित और देशवासियों के हित में हैं।

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