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निराजल व्रत रख माताओं ने की पुत्र की दीर्घायु जीवन की कामना

Updated: IST fest
नदी, सरोवरों व देव स्थलों पर उमड़ी भीड़

आजमगढ़. पुत्र की दीर्घायु की कामना हेतु शुक्रवार को माताओं ने निराजल रह ज्यूतपुत्रिका व्रत रखा। श्रद्धालु महिलाओं के मुख में एक बूंद पानी भी नहीं गया था फिर भी चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी। यह तपस्या पुत्र के मंगल के लिए की गई थी इसलिए मन खुश था। पूरा दिन पूजा की तैयारियों में बीता। शाम होने से पहले नदी व सरोवरों की ओर माताओं के कदम बढ़ने लगे थे। बता दें कि सुबह से ही माताओं ने निराजल व्रत रखकर पूजा की तैयारियां की और शाम होने के पहले नदी अथवा सरोवरों के किनारे पहुंचकर पूजा-अर्चना कर अपने पुत्रों के दीर्घायु और मंगलमय भविष्य की कामना की।

घाटों के किनारे पहुंचने के बाद माताओं ने गोठ बनाकर पूजा के बाद सीओ माई की कथा का श्रवण किया और उसके बाद कलश पर दीपक जलाकर अपने घरों को लौटीं। घाटों के किनारे भी दीपक जलाए गए। घाटों के किनारे दीपदान से अद्भुत छटा बिखर रही थी। उधर परम्परा के अनुसार व्रतधारी माताओं ने भोर में तीन बजे जल ग्रहण किया और उसके बाद नींद खुलने पर सबसे पहले मत्स्य दर्शन किया। उधर सुबह से ही घर के बच्चे तथा अभिभावक पूजा में प्रयुक्त होने वाले आवश्यक सामनों की व्यवस्था में लगे हुए थे।

बुधवार से ही बाजारों में व्रत से संबंधित जरूरी सामानों की दुकानें सजी रहीं। फल, फूल के अलावा चीनी के लड्डू, नेनुआ के पत्ते, धागा आदि की बिक्री होती रही। इस व्रत का सम्बन्ध पितृ पक्ष से भी है। व्रत के पारण के दिन को मातृ नवमी भी कहा जाता है और परम्परा यह भी है कि उस दिन जिन माताओं की सास दिवंगत हुई रहती हैं, उन्हें भोजन देकर विदाई दी जाती है। तत्पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। इसमें खास तौर से उड़द की दाल, अरुई के पत्ते की पकौड़ी आदि मातृ पक्ष के पितरों को अर्पित किया जाता है।

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