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आर्थिक अनियमितताओं की जांच विधिक एजेंसी करे

Updated: IST
शासकीय महाविद्यालय में जनभागीदारी समिति द्वारा आर्थिक अनियमितताओं की जांच विधिक एजेंसी से कराने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

सेंधवा.शासकीय महाविद्यालय में जनभागीदारी समिति द्वारा आर्थिक अनियमितताओं की जांच विधिक एजेंसी से कराने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। पत्र में कहा गया कि जनभागीदारी समिति के माध्यम से खर्च की गई राशि में कई अनियमितताएं हैं एवं नियमों का पालन भी नहीं किया गया है।

कहा गया कि व्यय की गई राशि का आज तक चार्टेड अंकेक्षक से लेखा परीक्षण नहीं कराया गया। 20 वर्ष होने के बाद भी लेखा परीक्षण न होना अनियमितता दर्शाता है। संस्था की वार्षिक आमसभा होने के 14 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप पर जानकारी फाइल की जाती है। संस्था के परीक्षित लेखा भेजे जाते हंै। लेकिन आज तक कोई भी जानकारी पंजीयक भोपाल या सहायक पंजीयक इंदौर संभाग को नहीं भेजी गई। ना ही विधिवत निर्वाचन किए गए। फिर भी संस्था अस्तित्व में कैसे है? यह भी जांच का विषय है। समिति की निधि प्राचार्य और जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष के संयुक्त खाते में रखी जाए। जनभागीदारी की राशि का आहरण किस प्रकार किया गया। इसकी जांच की जानी चाहिए। साधारण सामान्य परिषद की बैठक साल में 2 बार होनी चाहिए। प्रबंध समिति की बैठक तीन माह में कम से कम एक बार अवश्य होनी चाहिए। 11 अगस्त 2003 की बैठक के बाद वर्ष 2004, 2005, 2006, 2015 में कोई भी बैठक नहीं हुई। फिर भी लाखों की राशि बैठक की स्वीकृति के बिना ही व्यय कर दी गई। इसी प्रकार जनभागीदारी समिति के तहत की गई नियुक्ति की भी जांच होनी चाहिए कि विज्ञप्ति जारी किए बिना नामजद समिति सदस्यों द्वारा नियुक्ति बैठक में ही कर ली गई। यह जांच का विषय है। सूचना के अधिकार के तहत बैठक कार्रवाई की जानकारी में वाइटनर लगाकर जानकारी दी गई है। महाविद्यालय वर्ष 1997 में वित्त समिति की गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 2015-16 तक वित्त समिति का गठन नहीं किया गया। 18 वर्ष तक बिना वित्त समिति के अनुमोदन से लाखों रुपए व्यय कर दिए गए। जो नियमों के विरुद्ध है।

रोकड़ बही में अनियमितता
पत्र में कहा गया कि रोकड़ बही में कई अनियमितताएं हैं। 18 जून 2002 से 12 जुलाई 2002 तक कैशबुक में ओवर राइटिंग एवं वाइटनर का प्रयोग किया गया। वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2016 तक की कैशबुक का संधारण वर्षवार नहीं किया गया। कैश बैलेंस, नोटों का विवरण भी नहीं लिखा गया है। कैशबुक प्रतिदिनवार नहीं लिखी गई है। इसकी जांच होनी चाहिए।

खाता बही का संधारण नहीं

कहा गया कि वर्ष 2000 से लेकर 2016 तक खाताबही का संधारण भी नहीं किया गया। लेजर के बिना यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि किस मद में कितनी राशि प्राप्त हुई है और कितनी राशि किस मद पर व्यय की गई है। इसकी भी जांच की जानी चाहिए। समिति की सदस्यता पंजी भी महाविद्यालय द्वारा संधारित नहीं की गई है। सदस्यता पंजी रखना अनिवार्य है।

विधिक एजेंसी से कराएं जांच

इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता विजय पाठक, जिपं सदस्य ग्यारसीलाल रावत एवं पूर्व नपा अध्यक्ष राजेंद्र मोतियानी ने एसडीएम कार्यालय के माध्यम से प्रधान मंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनियमिताओं की जांच इंदौर संभाग के प्राध्यापकों से नहीं कराकर लोकायुक्त एवं अन्य किसी विधिक एजेंसी से कराने की मांग की है। अनियमितता करने वाले दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर राशि की वसूली कराने पर भी जोर दिया गया।

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