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डूब प्रभावितों ने अधिकारियों को घेरा, किए सवाल-जवाब

Updated: IST Officers surrounded the affected people drowning.
गांव खाली कराने की बात कहने पहुंचे थे एसडीएम, पुनर्वास अधिकारी, डूब प्रभावितों की समस्या सुनने के लिए आज आने को बोल गए अधिकारी, पुनर्वास स्थल पर अपने-अपने प्लाट देखना चाहते थे डूब प्रभावित

बड़वानी. सरदार सरोवर बांध के गेट लगने के बाद प्रशासन हर हाल में डूब गांवों को खाली कराना चाहता है। अधिकारियों द्वारा डूब ग्रामों में जाकर विस्थापितों को समझाइश दी जा रही है। इस दौरान अधिकारियों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। सोमवार को जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर डूब ग्राम जांगरवा में पहुंचे अधिकारियों को डूब प्रभावितों ने घेर लिया। यहां बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं ने अधिकारियों से सवाल-जवाब किए। करीब डेढ़ घंटे अधिकारी सवालों के जवाब देते रहे, लेकिन डूब प्रभावितों को संतुष्ट नहीं कर पाए। अधिकारी मंगलवार सुबह 11 बजे वापस आने का बोलकर वहां से लौट गए। सोमवार दोपहर 3 बजे राजस्व विभाग के पटवारी डूब ग्राम जांगरवा पहुंचे थे। यहां राजस्व अमले ने पुनर्वास स्थल में जाने की समझाइश देकर 15 जुलाई तक गांव खाली करने की बात कही। डूब प्रभावितों ने राजस्व अमले की बात सुनने से इनकार कर दिया दिया। डूब प्रभावितों का कहना था कि जब आप हमारी समस्या का हल ही नहीं कर सकते तो आपकी बात सुनने का क्या फायदा। डूब प्रभावितों ने मांग की कि मौके पर भूअजर्न अधिकारी और सक्षम उच्च अधिकारियों को बुलाया जाए, तब ही उनकी बात सुनी जाएगी। इसके बाद 4 बजे यहां एसडीएम महेश बड़ोले और भू-अर्जन अधिकारी और राजस्व विभाग के अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों के दल के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा।

15 जुलाई तक कैसे गांव छोड़े
डूब प्रभावितों ने अधिकारियों पर सवालों की झड़ी लगा दी। डूब प्रभावित करीब डेढ़ घंटे तक जवाब तलब करते रहे। डूब प्रभावितों का कहना था कि हम 15 जुलाई तक कैसे गांव छोड़ सकते है। इतने कम दिन में कैसे मकान बनाया जा सकता है। क्या हमारे मूल गांव जैसा पुनर्वास स्थल बना हुआ है। बिना पुनर्वास कैसे रहेंगे, कहां जाएंगे। डूब प्रभावित सुरेश कनासे ने कहा हमारी बाकी जमीनें टापू बनने वाली है। वहां आने-जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं बनाया गया। हमारे मूलगांव में बहुत सारे मंदिर है। वैसे मंदिर आप बना सकते हो, यहां पर मछुआरे सामूहिक परिवार भी है उनको मछली का अधिकार दिया जाए, उसकी सोसायटी पंजीयन किया जाए। हमारे गांव के विस्थापित जो गुजरात में बसाए, उनको भी मूलगांव सुविधाएं सरकार द्वारा नहीं दी गई है।

जल समाधि देना पड़ी तो देंगे
डूब प्रभावित मंशाराम भाई, कुंवरसिंह भीलाला, कलबाई, गंगाबाई, मंगीबाई अन्य विस्थापितों ने कहा जितना मुआवजा दिया है, उतने में कैसे मकान बना सकते है। जिन विस्थापितों के व्यस्क पुत्र-पुत्री हैं, उनका क्या होगा। उस पर कोई कार्य योजना नहीं बनाई गई है। हमें नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन और राज्य की पुनर्वास नीति के तहत संपूर्ण पुनर्वास चाहिए। बिना आदर्श पुनर्वास के हम किसी भी कीमत पर गांव नहीं खाली करेंगे। इसके लिए हमें जल समाधि भी लेना पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे। करीब 5.30 बजे तक चले सवाल-जवाब के बाद अधिकारियों ने मंगलवार सुबह 11 बजे गांव आकर चर्चा करने की बात कही और वापस लौट गए।

डराने के लिए लाए पुलिस बल
नर्मदा बचाओ आंदोलन के राहुल यादव, भागीरथ धनगर ने बताया कि सोमवार को डूब गांव जांगरवा में अधिकारियों का दल चर्चा के लिए गया था। अधिकारियों का दल अपने साथ इतना पुलिस बल लेकर गया था, मानों वहां कोई अपराधी लोग बसर कर रहे है। प्रशासन बड़ी संख्या में डूब ग्रामों में पुलिस बल ले जाकर क्या डूब प्रभावितों को डराना चाहता है। पुलिस को देखकर डूब प्रभावित अपना हक नहीं छोड़ेंगे। जब तक प्रत्येक विस्थापित का पुनर्वास नहीं हो जाता तब तक डूब प्रभावित मूल गांव में ही रहेंगे।

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