Patrika Hindi News

श्रावण के अंतिम सोमवार को डूब जाएगा 12वीं शताब्दी का शिवालय

Updated: IST Ancient Shiva Temple located at Bodhawada (Dhar).
नर्मदा तट पर बसा हुआ हुआ है बोधवाड़ा का प्राचीन शिव मंदिर, वास्तु की दृष्टि से अद्वितीय है शिव मंदिर, निर्माण में रूद्र व श्रीयंत्र उकेरा

मनीष अरोरा.बड़वानी
सरदार सरोवर बांध की डूब में जन, जंगल, जमीन के साथ ही सभ्यता और संस्कृति का भी हृास हो रहा है। बांध की डूब में मप्र के 193 गांव, लाखों हैक्टेयर जमीन और जंगल आ रहे है। साथ ही मानव संस्कृति की पहचान रही प्राचीन धरोहरे भी डूब में जा रही है। 12वीं शताब्दी से हजारों लोगों की आस्था का केंद्र रहे नर्मदा तट पर बना अष्टमुखी महादेव मंदिर भी श्रावण के अंतिम सोमवार को जलमग्न होने की कगार पर है। बड़वानी जिले से 12 किमी दूर धार जिले के बोधवाड़ा में नर्मदा के तट पर स्थित है अष्टमुखी महादेव मंदिर। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में कराया गया था। इस मंदिर में मौजूद शिवलिंग की विशेषता है कि ये गोलाकार न होकर अष्टकोणिय बना हुआ है।
The octagonal shivaling set in the temple

गन्ने के रस से महाभिषेक करने का महत्व है
मान्यता है कि बोधवाड़ा स्थित महादेव मंदिर में श्री समृद्धि के लिए गन्ने के रस से महाभिषेक करने का परम महत्व है। इससे मनुष्य को लक्ष्मी प्राप्त होती है। शिव आराधना के पावन मास श्रावण में श्रद्धालु बोधवाड़ा मंदिर पर जुटते हैं। 12वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर अपनी अनोखी छटा के लिए जाना जाता है। ये मंदिर वास्तु की दृष्टि से भी अद्वितीय है। इस के निर्माण में रूद्र व श्रीयंत्र उकेरा है। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का मां नर्मदा स्वयं अभिषेक करती हैं। शिवरात्रि पर शिवलिंग के पास अपने आप पानी आ जाता है।

नहीं हो पाया पुनर्वास
बोधवाड़ा का प्राचीन शिव मंदिर पुरातत्व विभाग की धरोहरों में भी शामिल है। सरदार सरोवर बांध की डूब में बोधवाड़ा गांव के साथ ये मंदिर भी आ रहा है। नर्मदा कंट्रोल अथॉर्टी (एनसीए) की रिपोर्ट के अनुसार इस पुरातत्व महत्व के इस मंदिर को डुबोया नहीं जा सकता है। इस मंदिर का पुनर्वास किया जाना है। इस गांव में भी पुनर्वास की मांग को लेकर डूब प्रभावित आंदोलनरत है। लोगों की मांग है कि सभी के पुनर्वास के साथ ही मंदिर का भी पुनर्वास किया जाए। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार डूब गांवों का 31 जुलाई तक पुनर्वास किया जाना है। 31 जुलाई को श्रावण मास का चौथा सोमवार आ रहा है। वहीं, 7 अगस्त को अंतिम सोमवार पर रक्षाबंधन पर्व है। ऐसे में यदि 31 जुलाई तक मंदिर का पुनर्वास नहीं हुआ तो सावन के अंतिम सोमवार मंदिर डूब जाएगा।

यह भी पढ़े :
अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???